Mahakumbh पर श्रद्धालुओं की चांदी के छोटे कलश का रुझान, आर्डर देकर तैयार करा रहे सराफा व्यापारी, इतने हजार रुपये है कीमत
महाकुंभ पर श्रद्धालुओं की बढ़ी मांग से सराफा व्यापारी आर्डर देकर तैयार करा रहे सामग्री
कानपुर, अमृत विचार। महाकुंभ में पुण्य का डुबकी लगाकर सूर्यदेव को अर्घ्य देने के लिए चांदी के छोटे कलश का रुझान तेजी से बढ़ने से सराफा कारोबारी मांग पूरी नहीं कर पा रहे हैं। श्रद्धालुओं के बीच सर्वाधिक मांग 8 से 10 हजार रुपये के कलश की है।
सराफा व्यापारियों ने बताया कि बाजार में छोटे कलश के साथ कुछ ग्राहक ऐसे भी कलश मांग रहे हैं जिनमें सूर्य की डिजाइन उकेरी गई हो। मांग के अनुरूप कलश ऑर्डर देकर दो से तीन दिन में बनवाए जा रहे हैं। कानपुर महानगर बुलियन एंड सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष पं. आशू शर्मा ने बताया कि श्रद्धालुओं की चांदी के कलश की मांग चकित करने वाली है।
बाजार इसके लिए तैयार नहीं था। अब मांग के अनुसार नए ऑर्डर दिए जा रहे हैं। फिलहाल बाजार में 10 हजार रुपये के कलश सूर्य को अर्घ्य देने के लिए उपलब्ध हैं। महाकुंभ के लिए 23 ग्राम से लेकर 100 ग्राम तक के कलश आ चुके हैं। इन कलशों में पूजन के दौरान बनाई जाने वाली रंगोली डिजाइन के तौर पर उकेरी गई है।
सराफा कारोबारियों ने बताया कि महाकुंभ में गंगा जल में प्रवाहित करने के लिए छोटे चांदी के सिक्कों की भी मांग तेजी से बढ़ी है। एक और दो ग्राम वजन के यह सिक्के बड़ी संख्या में श्रद्धालु खरीद रहे हैं। चांदी के सिक्कों की मांग अन्य जिलों से भी आ रही है।
सूर्य व चंद्र पूजन के साथ मनोकामनाएं होतीं पूरी
ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा और चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है। महाकुंभ में स्नान के बाद चांदी के कलश से सूर्यदेव को अर्घ्य देने से चंद्रमा व सूर्य दोनों का पूजन हो जाता है। महाकुंभ में चांदी के कलश से जल देने से मनोकामनाएं पूरी होने के साथ लक्ष्य हासिल करने में सरलता होती है।
