Mahakumbh 2025: महाकुंभ में अखाड़ों का अमृत स्नान समाप्त, सनातन संस्कृति के रंग में रंगे विदेशी श्रद्धालु

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Edited By Amrit Vichar
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कुंभमहानगर। 144 साल बाद पड़े महाकुंभ में श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहे नागा साधु संतो का अमृत स्नान समाप्त हो गया। महाकुंभ मेला में अखाड़ों के अमृत स्नान का क्रम सुबह पांच बजे से शुरू हुआ था, जो शाम तीन बजकर पांच मिनट तक चला। इस बीच अखाड़ों के साधु- संत अपने लकझक रथों पर आरूढ़ होकर अपने शिविर से निकल कर संगम क्षेत्र में पहुंचे और वहीं से कुछ दूरी पर पैदल चलकर संगम में अमृत स्नान करते रहे। 

वहीं, बसंत पंचमी के अवसर पर सोमवार को विदेशी श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में पवित्र डुबकी लगाई। विदेशियों ने यहां भारतीय सनातन संस्कृति के जीवंत रंगों में रंगे डूबे दिखाई दिए। उन्होंने कहा यह अवसर हमारे लिए अनोखा और सुखद है। 

इटली से आए एक विदेशी श्रद्धालु ने कहा “मैंने कुछ मिनट पहले पवित्र डुबकी लगाई। यह एक जीवन में मिलने वाला अनोखा अवसर जैसा महसूस इस अवसर के लिए 144 वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे थे। मैं यहां खुद को धन्य महसूस कर रहा हूं। यह मेरे जीवन के सबसे सुंदर अनुभवों में से एक रहा। यहां के लोग हमारे प्रति बहुत ही दयालु रहे हैं।

वहीं क्रोएशिया से आए एंड्रो ने बसंत पंचमी के अवसर पर संगम में डुबकी लगाई और कहा “मैंने और मेरी पत्नी ने यहां आकर पवित्र स्नान किया है। यह एक अद्भुत अनुभव है। यहां दिव्य महाकुंभ की अनुभूति प्राप्त हो रही है। यहां की व्यवस्थाएं और सुविधाएं सब कुछ बहुत बेहतर है।

ऑस्ट्रिया से आई अविगेल ने कहा कि “यह अविश्वसनीय और अद्भुत है। यह जीवन में एक बार मिलने वाला अनुभव है। मैंने भारत के लोगों को समझना शुरू किया है। इससे पहले मैंने कभी ऐसा कुछ नहीं देखा।” 

अमृत स्नान में सबसे पहले साधु-संत, नागा उसके पैदल चलते थे उनके पीछे आचार्य महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, धानपति इसी क्रम में रथ पर सवार होकर संगम में आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे रहे। सभी अखाडों का समय निर्धारित किया गया था। महाकुंभ के तीसरे ‘अमृत स्नान” बसंत पंचमी के अवसर पर सन्यासी अखाड़ों में  पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी एवं  शम्भू पंचायती अटल अखाड़ा सुबह 04.00 बजे अपने शिविर से नकल कर 05.00 संगम स्नान के लिए पहुंचा था। उसका 40 मिनट तक का स्नान का समय निर्धारित था। उसके बाद उसे 05.40 बजे घाट को छोडना था। 

अखाडा सूत्रों ने बताया कि  तपोनिधि पंचायती  निरंजनी अखाड़ा एवं  पंचायती अखाड़ा आनंद का शिविर से 4.50 बज प्रस्थान कर 5.50 बजे स्नान कर 6.30 बजे शिविर में आगमन दिया गया था। इसी प्रकार  पंचदशनाम जूना अखाड़ा,  पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा और  पंचाग्नि अखाड़ा का शिविर से प्रस्थान का समय 05.45 बजे, घाट पर पहुचने का समय 6.45 बजे, घाट से वापस प्रस्थान का समय 7.25 बजे और शिविर में आने का समय 8.30 बजे है। उन्होंने कहा कि बैरागी अखाड़ों के तहत अखिल भारतीय  पंच निर्वाणी अनी अखाड़ा सुबह 08.25 बजे शिविर से प्रस्थान कर, घाट पर आगमन का समय 09.25 बजे और 30 मिनट के स्नान के बाद 09.55 बजे घाट से वापसी हेतु प्रस्थान किया। 10.55 बजे तक यह अखाड़ा अपने शिविर में वापस लौट गए। इसी प्रकार, अखिल भारतीय  पंच दिगंबर अनी अखाड़ा सुबह 09ः05 बजे शिविर से प्रस्थान कर और 10.05 बजे घाट पर पहुँचे और स्नान के बाद 10.55 बजे घाट से वापस शिविर के लिए प्रस्थान किया था। 

अखिल भारतीय  पंच निर्मोही अनी अखाड़ा सुबह 10.05 बजे शिविर से प्रस्थान कर 11.05 बजे घाट पर आगमन था और स्नान के बाद 11.35 बजे घाट से शिविर हेतु वापसी किया था। उदासीन अखाड़ों के तहत  पंचायती नया उदासीन अखाड़ा सुबह 11.00 बजे शिविर से प्रस्थान कर, 12.00 बजे घाट पर पहुंच कर स्नान करने के बाद 12.55 बजे घाट से वापसी तथा 13.55 बजे शिविर में आगमन था। इसके अलावा,  पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण 12.05 बजे शिविर से प्रस्थान किया, 13.05 बजे घाट पर आगमन तथा 14.05 बजे घाट से शिविर हेतु वापसी तथा 15.05 बजे शिविर में पहुंचना था।  

पंचायती निर्मल अखाड़ा का शिविर से प्रस्थान का समय 13.25 बजे, घाट पर आगमन 14.25 बजे तथा स्नान के उपरान्त घाट से वापसी हेतु प्रस्थान का समय 15.05 बजे तथा शिविर में आगमन 15.55 बजे स्नान कर शिविर पहुंचे। प्रत्येक स्नान पर्व पर लगभग 20 कुंतल गुलाब की पंखुड़ियों से बारिश की जा रही थी। पहले स्नान पर्व पौष पूर्णिमा और पहले अमृत स्नान पर्व मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं पर गुलाब की पंखुड़ियां बरसााईं गई थीं जबकि मौनी अमावस्या के दूसरे अमृत स्नान पर भी सांकेतिक रूप से पुष्प वर्षा कराई गई। सोमवार को मौनी अमावस्या पर उद्यान विभाग की ओर 20 क्विंटल से अधिक मात्रा गुलाब के फूलों की साधु-संतों और श्रद्धालुओं पर वर्षा किया गया। 

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