बाराबंकी में जाम के जनक बने बेसिर पैर दौड़ रहे ई-रिक्शा, जहां चाहे चलाओ, निर्धारित नहीं कोई रूट
बाराबंकी, अमृत विचार। बाराबंकी शहर में सड़कों पर बेधड़क दौड़ते और प्रमुख चौराहों पर मनमाने तरीके से खड़े ई-रिक्शा अब जाम की गंभीर समस्या पैदा कर रहे हैं। खास बात यह कि नियम कानून के अभाव में बड़े ही नहीं नाबालिग भी हाथ रवां करते नजर आ रहे हैं। अब यह ई रिक्शा राहत कम आफत का सबब बन गए हैं। कई हादसे सामने आने के बावजूद शहर ही नहीं हाईवे पर इनकी मौजूदगी बराबर बनी हुई है।
स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों के अनुसार, ई-रिक्शा के लिए कोई निश्चित स्टॉप या रूट न होने के कारण वे कहीं भी खड़े हो जाते हैं, जिससे सड़कें संकरी हो जाती हैं और ट्रैफिक जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। खासतौर पर सुबह और शाम के समय जब दफ्तर और स्कूल जाने-आने वालों की भीड़ रहती है, तब यह समस्या और विकराल हो जाती है।

इस समस्या के समाधान के लिए संभागीय परिवहन विभाग और यातायात विभाग की बैठक हुई, नियम कायदे भी बने पर वह महज कागजों तक ही सीमित रहे। रूट निर्धारण न होने से ई रिक्शा किसी भी रूट पर दौड़ते देखे जा सकते हैं। हाईवे पर ई रिक्शा यमराज बनकर दौड़ रहे हैं। जिले में तमाम हादसों के बावजूद इन्हे हाईवे पर स्पीड पकड़ते देखा जा रहा है। खास बात यह कि नियंत्रण के अभाव में अब नाबालिग भी स्टेयरिंग पकड़ रहे हैं। शहर में यातायात व्यवस्था एक मजाक से अधिक नहीं उस पर ई रिक्शा कोढ़ में खाज का काम कर रहे हैं।
क्या हों संभावित बदलाव?
ई-रिक्शा के लिए विशेष रूट तय किए जाएं, प्रमुख चौराहों पर निर्धारित स्टॉप बनाए जाएं, नियमों का उल्लंघन करने वाले ई-रिक्शा चालकों पर हो कार्रवाई होगी, यातायात विभाग और ई-रिक्शा संगठनों के बीच समन्वय बढ़ाया जाए। अगर यह बदलाव प्रभावी ढंग से लागू किए जाएं तो शहर की सड़कों पर बढ़ते जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। देखना यह होगा कि यह पहल कब होती है और यातायात व्यवस्था कितनी सुचारू रूप से चल पाती है।
परिवाहन से परमिट नहीं, इसलिए नियंत्रण नहीं
सहायक संभागीय परिवाहन अधिकारी अंकिता शुक्ला का कहना है कि परिवाहन विभाग का नियंत्रण परमिट वाले वाहनों पर रहता है। कुछ समय पहले ई रिक्शा को लेकर नियम बनाए गए थे पर वह सफल नहीं हो सके। एक बार फिर संयुक्त रूप से निरीक्षण कर प्रस्ताव बनाया जाएगा।
