बरेली: बाट जे पूछेला बटोहिया, बहंगिया केकरा के जाए…
बरेली,अमृत विचार। सूर्यदेव की उपासना के साथ कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से शुरू हुआ आस्था का महापर्व छठ इस बार शनिवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही समाप्त हो गया। लगातार चार दिन तक चले इस महापर्व में श्रद्धालु बेहद उत्साहित नजर आए। व्रतीजनों ने बाट जे पूछेला बटोहिया, बहंगिया केकरा के …
बरेली,अमृत विचार। सूर्यदेव की उपासना के साथ कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से शुरू हुआ आस्था का महापर्व छठ इस बार शनिवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही समाप्त हो गया। लगातार चार दिन तक चले इस महापर्व में श्रद्धालु बेहद उत्साहित नजर आए। व्रतीजनों ने बाट जे पूछेला बटोहिया, बहंगिया केकरा के जाए… आदि गीत गाये।
शहर में इज्जतनगर रेलवे कॉलोनी में स्थित शिव पार्वती मंदिर, देवरनियां नदी के किनारे कुंवर रंजीत सिंह इंटर कॉलेज के पीछे, सिद्धार्थनगर में महावीर के स्थान के पास कार्यक्रम, महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में स्थित मंदिर, धोपेश्वर नाथ मंदिर और रामगंगा घाट में छठ महापर्व का आयोजन किया गया। चार दिन तक चलने वाले इस महापर्व छठ पूजा के अंतिम दिन शनिवार को 6:40 बजे उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा का समापन किया गया। शहर के इन स्थानों पर सुबह सूर्य निकलने से पहले ही पूजा की डलिया सजाकर पहुंची व्रती महिलाओं ने पूजा-अर्चना की। कोरोना संक्रमण को देखते हुए अधिकांश लोगों ने अपने घरों में ही व्रत का पारण किया। यही वजह रही कि बीते दिनों की तुलना में इस बार बेहद कम संख्या में व्रती महिलाएं मंदिर और सार्वजनिक स्थलों पर पूजा करने के लिए पहुंचीं।
पूर्वांचल भोजीपुरी समाज के एसके पांडेय ने बताया कि भोजपुरी समाज के संजय पांडेय ने बताया कि बरेली में इज्जतनगर में शिव पार्वती मंदिर के अलावा अन्य भी कई स्थानों पर पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान नीलम पांडेय, मीरा पांडेय, प्रियंका अनूप पांडेय, मीना सिंह, संजू सिंह, सुप्रिया सिंह, सुनीता ओझा आदि महिलाओं ने पूजा-अर्चना की। पूर्वांचल व भोजपुरी समाज के एसके पांडेय, प्रमोद कुमार सिंह, सीबी चौरसिया, अमित पांडेय, चिराग पांडेय, दीप सिंह, विजय महाराज, अजय कुमार, दयानंद ओझा, संजय सिंह, रजनीश राय, अवधेश वर्मा, कमलेश वर्मा, छोटेलाल यादव, कुंवर जितेंद्र आदि मौजूद रहे।
छठ पूजा में इन वस्तुओं का किया प्रयोग
छठ पूजा में प्रसाद रखने के लिए बांस की टोकरियों के साथ ही सूप, लोटा, थाली, दूध और जल के लिए कच्ची हल्दी, शहद, गिलास, अमरस, नए कपड़े, चावल, सिंदूर, धूप, दीपक, हरा नारियल, गन्ना, शकरकंदी, मिठाई पान, सुपारी, कपूर, कुमकुम, चन्दन आदि वस्तुओं को लेकर उगते सूर्य को अर्घ्य देने पहुंचीं महिलाओं ने ठंडे पानी में उतरकर पूजा-अर्चना की।
