Bareilly: सिविल लाइंस में लूट और गर्भवती की हत्या के तीन दोषियों को उम्रकैद

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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विधि संवाददाता, बरेली। सिविल लाइंस में दिनदहाड़े कपड़ा व्यापारी ब्रह्मानंद अग्रवाल की कोठी में घुसकर लूटपाट करने और विरोध करने पर उनकी नौ माह की गर्भवती बहू रितु अग्रवाल की धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ वार कर हत्या कर देने के 18 साल पुराने मामले में अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। अपर सत्र न्यायाधीश कुमारी अफशां ने विवेक शर्मा उर्फ विक्कू, सय्यद फैज अली और सोमू सारस्वत को दोषी करार देते हुए तीनों को आजीवन कारावास और 25-25 हजार के जुर्माने की सजा सुनाई।

घटना 5 अगस्त 2006 को सिविल लाइंस में आईसीआईसीआई बैंक के सामने वाली गली में स्थित ब्रह्मानंद की कोठी में हुई थी। डीजीसी क्राइम रीतराम राजपूत के मुताबिक घटना की एफआईआर ब्रह्मानंद अग्रवाल के भांजे पीयूष कुमार अग्रवाल ने थाना कोतवाली में दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि दोपहर में करीब डेढ़ बजे तीन लड़के उनके मामा के घर पहुंचे थे। एक ने घंटी बजाकर बताया कि सुबोध जी ने कुछ सामान भेजा है। उनकी मामी गीता अग्रवाल जैसे ही गेट खोला, एक बदमाश ने उनके सिर पर किसी भारी चीज से वार किया और फिर तीनों जबरन अंदर घुस आए।

चीख सुनकर बाहर आईं उनकी मामी की पुत्रवधू रितु अग्रवाल ने शोर मचाने की कोशिश की तो तीनों ने उन पर तेज धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ वार किए। गंभीर घायल होने के बाद वह लहूलुहान होकर लॉबी में ही गिर गईं। इसके बाद तीनों बदमाशों ने तीन सोने की चेन, तीन हीरे की अंगूठियां, दो सोने की चूड़ियां, दो मोती की चूड़ियां, दो सोने के कड़े, एक पन्ने की अंगूठी और 15000 रुपये लूटे और जीने के रास्ते भाग गए। रितु को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन डाॅक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

एफआईआर में पीयूष ने बताया था कि उनकी मामी गीता अग्रवाल ने वारदात को देखने के साथ बदमाशों को अच्छी तरह पहचाना है। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात बदमाशों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की थी। घटना के छह दिन ही बाद पुलिस ने बड़ी बमनपुरी निवासी विवेक शर्मा उर्फ विक्कू को गिरफ्तार कर उसके पास से लूटे गए जेवरात बरामद किए। इसके बाद खन्नू मोहल्ले के सय्यद फैज अली और साहूकारा के कूंचा राजगुरु निवासी उसके साथी सोमू सारस्वत को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।

दुकान पर काम करते थे विवेक और सोमू
एफआईआर लिखाने वाले पीयूष ने अदालत में दी गवाही में उल्लेख किया था कि उनकी मामी ने अस्पताल में होश आने के बाद लूट की वारदात में विवेक शर्मा के शामिल होने के बारे में बताया था। विवेक उनकी बड़ा बाजार स्थित कपड़े की दुकान पर नौकरी करता था और वारदात से तीन महीने पहले ही नौकरी छोड़कर गया चला था। उसने फैज अली और एक किशोर के साथ घर में घुसकर लूट की थी। इस दौरान उसने उनकी मामी और उनकी पुत्रवधू दोनों पर हमला किया। उनकी मामी की पुत्रवधू की हत्या कर दी। सोमू घटना के समय भी दुकान पर काम करता था। वह भी विवेक का दोस्त था। उसे विवेक ने ही दुकान पर लगवाया था।

गर्भस्थ शिशु के शरीर से भी पार कर दी गुप्ती
वारदात के दौरान रितु अग्रवाल नौ माह की गर्भवती थीं और उनकी उम्र सिर्फ 26 वर्ष थी। विवेक और उसके साथियों ने काफी निर्दयता से उनकी हत्या की थी। यहां तक कि उनके गर्भ तक में धारदार हथियार घोंप दिए थे। इससे उनके गर्भस्थ शिशु की भी मौत हो गई थी। उनके शव का पोस्टमार्टम करने वाले डाॅ. वीपी भारद्वाज ने अदालत में बताया था रितु के शरीर पर लगे गंभीर घावों में एक घाव उनकी गर्दन, दूसरा दाहिने कान के पीछे और तीसरा बायीं तरफ सीने के ऊपरी हिस्से में किया गया था जिससे पसलियों की बीच की तंत्रिकाएं और रक्त वाहिनियां अंदर तक कट गईं थी। इसके अलावा धारदार हथियारों के बहुत सारे घाव उनकी पीठ की तरफ थे। तीन घाव उनके पेट पर किए गए थे जिससे उनका गर्भाशय तक कट गया था। गर्भ में मौजूद मेल बेबी के शरीर में भी दाहिनी तरफ से गुप्तीनुमा धारदार हथियार घोपा हुआ पाया गया था। इससे उसकी भी मौत हो गई थी।

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