गोमती का मचलता ये पानी भी है …
लखनऊ विश्वविद्यालय शताब्दी समारोह के पांचवे दिन पहुंचे कवि कुमार विश्ववासपर्यटन और संस्कृति राज्य मंत्री डॉक्टर नील कंठ तिवारी भी हुए शामिल अमृत विचार लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय शताब्दी समारोह के पांचवे दिवस की संध्या में सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत कला संकाय के प्रांगण में सुप्रसिद्ध कवि डॉक्टर कुमार विश्वास शिरकत करने पहुंचे। जहां उन्होंने “गोमती …
लखनऊ विश्वविद्यालय शताब्दी समारोह के पांचवे दिन पहुंचे कवि कुमार विश्ववास
पर्यटन और संस्कृति राज्य मंत्री डॉक्टर नील कंठ तिवारी भी हुए शामिल
अमृत विचार लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय शताब्दी समारोह के पांचवे दिवस की संध्या में सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत कला संकाय के प्रांगण में सुप्रसिद्ध कवि डॉक्टर कुमार विश्वास शिरकत करने पहुंचे। जहां उन्होंने “गोमती का मचलता ये पानी भी है ” पंक्तियों से शुरुआत कर लखनऊ शहर के खूबियों को संकलित कर सम्पूर्ण माहौल में उत्साह का संचार कर दिया। “जवानी में कई ग़ज़लें अधूरी छूट जाती हैं ” का भी उन्होंने वाचन किया। तत्पश्चात उन्होंने सम्पूर्ण राष्ट्र के ह्रदय सम्राट दिवंगत अटल बिहारी वाजपई को स्मरण किया। इसके बाद उन्होंने अटल जी की सुप्रसिद्ध कविता “गीत नहीं गाता हूं ” सुनाया। फिर उन्होंने “हार नहीं मानूंगा, गीत नया गाता हूं ” भी सुना कर युवाओं में जोश भर दिया। डॉक्टर विश्वास ने “ये तेरा दिल समझता है”, “मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है ” जैसी कवितायें भी सुनाई। “पराएं आंसुओं से आंखे नम कर रहा हूं मैं “, “इस अधूरी जवानी का क्या फायदा, बिन कथानक कहानी का क्या फायदा” “वक्त के क्रूर कल का भरोसा नहीं, आज जी लो कल का भरोसा नहीं ” “ताल को ताल की झंकृति तो मिले, रूप को भाव की आकृति तो मिले “, “अगर देश पर प्रश्न आये तो अपने आप के खिलाफ बोलो अपने बाप के खिलाफ बोलो”। उन्होंने कश्मीर पर “ऋषि की कश्यप की तपस्या ने तपाया है तुझे, ऋषि अगस्त ने हम वार बननाया है तुझ, मेरे कश्मीर मेरी जान मेरे प्यारे चमन ” कविता सुना कर सम्पूर्ण श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया वहीं सभी श्रोताओं में देश भक्ति का संचार कर दिया। इस मौके पर पर्यटन और संस्कृति राज्य मंत्री डॉक्टर नील कंठ तिवारी भी मौजूद रहे। जिन्हे कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार राय की ओर से स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
