बरेली: सफाई व्यवस्था ठप, सफाईकर्मी कर रहे चालक और अर्दली का काम
बरेली,अमृत विचार। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन को जिम्मेदार ही पलीता लगाने में जुटे हैं। जिले में सफाई कर्मियों के अटैचमेंट का बड़ा खेल चल रहा है। आलम यह है कि गांव को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी संभालने वाले अपना मूल कार्य छोड़ हाथों में कलम थामे हैं। वर्तमान में अटैच चल …
बरेली,अमृत विचार। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन को जिम्मेदार ही पलीता लगाने में जुटे हैं। जिले में सफाई कर्मियों के अटैचमेंट का बड़ा खेल चल रहा है। आलम यह है कि गांव को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी संभालने वाले अपना मूल कार्य छोड़ हाथों में कलम थामे हैं।
वर्तमान में अटैच चल रहे सफाई कर्मियों के मामले में भले ही अधिकारी खुलकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं लेकिन इतना जरूर है कि विकास भवन, कलेक्ट्रेट, तहसील आदि स्थानों पर अटैच कर्मियों को देखकर स्वत: अंदाजा लगाया जा सकता है जिम्मेदार किस तरह स्वच्छता की मुहिम को बट्टा लगाने का काम कर रहे हैं।
विभागीय आंकड़ों में जिले की 1193 ग्राम पंचायतों और 2053 राजस्व गांवों में 1943 सफाईकर्मी तैनात हैं। करीब दो महीने पूर्व शिकायतें लगातार सामने आने पर इनकी कुंडली खंगाली गई तो करीब 225 सफाई कर्मी अटैच मिले थे।
सूत्र बताते हैं कि अफसर इस मामले में खुलकर इसलिए सामने नहीं आ रहे हैं क्योंकि अटैचमेंट कागजों में नहीं सिर्फ मौखिक तौर पर चल रहा है। इसे लेकर कोई शासनादेश नहीं है। इधर, डीपीआरओ धर्मेंद्र कुमार की मानें तो कोविड-19 में जरूर कुछ सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई थी। इसके अलावा अगर कहीं से लिखित में मांग की जाती है तो सफाई कर्मी भेज दिए जाते हैं।
कोई चालक तो कोई अर्दली बनकर काट रहा मौज
पंचायती राज विभाग में कई सफाईकर्मियों को अधिकारियों का चालक बना दिया गया है। ये सफाईकर्मी लंबे समय से चालक का काम कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि अफसरों को इसकी जानकारी नहीं है लेकिन इस पर सभी चुप्पी साधे हैं। कुछ सफाई कर्मी तो ऐसे हैं जो ग्राम पंचायतों में न पहुंचने के कारण पूर्व में निलंबित भी हो चुके हैं। इसके अलावा अर्दली बने बैठे हैं।
पोल खुलने के डर से नहीं देते आंकड़ा
नाम नहीं छापने की शर्त पर एक विभागीय कर्मी ने बताया कि पोल खुलने के डर से अफसर आंकड़ा देने से बचते हैं। अधिकारियों की मांग पर ब्लाक व मुख्यालय पर बड़े पैमाने पर अटैचमेंट का खेल चल रहा है। अभिलेखों में इनकी तैनाती उसी गांव में दर्शाई है जहां मूल तैनाती है। ऐसे में यदि इनको अभिलखों में दर्शाया गया तो अफसरों को फजीहत झेलनी पड़ सकती है।
यह स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक
भुता, नवाबगंज केमैथी नवादा, केला डांडी, क्योलडिया, बहेड़ी, आलमपुर जाफराबाद समेत कई गांवों में सफाई कर्मचारियों के नहीं पहुंचने से गंदगी फैली है। इन गांवों को निरीक्षण किया जाए तो गांवों में व्याप्त गंदगी इन सफाईकर्मियों की पोल खोलने के लिए काफी है। सूत्र बताते हैं कि यह लंबे समय से सफाईकर्मी नहीं गए। कई ने तो अपनी जगह अन्य स्थानीय युवाओं का लगा रखा है।
