बरेली: मां की खातिर 72 घंटे हवालात में भी काट चुके हैं भुल्लू

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बरेली, अमृत विचार। जब मां लापता हुई तो भुल्लू सिंह बहुत परेशान हुए। उन्होंने सभी रिश्तेदारियों में मां की तलाश की लेकिन कोई पता नहीं चल सका। परिजन तो मान बैठे थे कि उनकी मां अब जिंदा नहीं होंगी लेकिन उनका मन नहीं मान रहा था। वह जब भी सुबह ऑफिस जाते तो मां को …

बरेली, अमृत विचार। जब मां लापता हुई तो भुल्लू सिंह बहुत परेशान हुए। उन्होंने सभी रिश्तेदारियों में मां की तलाश की लेकिन कोई पता नहीं चल सका। परिजन तो मान बैठे थे कि उनकी मां अब जिंदा नहीं होंगी लेकिन उनका मन नहीं मान रहा था। वह जब भी सुबह ऑफिस जाते तो मां को याद करते, खाना खाते, सोते, हर वक्त मां को याद करते थे। भगवान से यही कहते थे कि मां जहां हों, जैसी हों उन्हें मिल जाएं। उनकी मां से एक बार मुलाकात जरूर करा दें।

जब 5 दिसंबर को उनके पास मां के मिलने की खबर पहुंची तो एक बार तो उन्हें भरोसा नहीं हुआ लेकिन जब पुख्ता हो गए तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सरकारी नौकरी में होने की वजह से उन्होंने तुरंत इमरजेंसी छुट्टी ली और मां से मिलने के लिए रवाना हो गए। फोन पर भुल्लू ने ‘अमृत विचार’ को बताया कि वह मां की खातिर 72 घंटे की हवालात भी काट चुके हैं लेकिन उन्हें सच्चाई पर भरोसा था। मां से फोन पर बात हुई है और जल्द ही मां से मिलूंगा।

भुल्लू ने बताया कि वह पश्चिम बंगाल में कोलकाता स्थित बिजली विभाग में सीनियर लाइनमैन टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत हैं। उनके बड़े साले सुनील कुमार भी वहीं बिजली विभाग में तैनात हैं। उन्होंने बताया कि 7 जुलाई 1995 को पिता पाकू राम सरोज की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। इस खबर से उनकी मां की दिमागी हालत कुछ खराब हो गई थी। कुछ समय बाद दुर्घटना में बड़े भाई पप्पू राम सरोज भी चल बसे जिससे मां और परेशान हो गईं। वह भी अंदर तक टूट गए लेकिन उम्मीद नहीं छोड़ी।

उन्होंने प्रयागराज में मां का इलाज शुरू करा दिया। उन्हें 16 फरवरी 1996 को कोलकाता में नौकरी मिली तो वह मां को अपने साथ कोलकाता ले गए। यहां भी उनका इलाज कराया लेकिन एक दिन उन्होंने 2 महीने की दवा एक दिन में खा ली जिससे वह बीमार हो गईं। उनके शरीर में जहर होने की वजह से पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और 72 घंटे तक हवालात में रखा। जब उनकी मां को होश आया तो बयान के बाद उन्हें मां को साथ ले जाने दिया।

उनकी मां को इस बात की चिंता सताने लगी कि कहीं पुलिस उनके बेटे को जेल न भेज दे, जिसके चलते उन्होंने प्रयागराज स्थित घर में रहने की इच्छा जाहिर की। इस पर उन्होंने मां को परिजनों के साथ प्रयागराज में छोड़ दिया। यहां से मां अलग-अलग रिश्तेदारों के यहां रहने जाती थीं। एक बार मौसी के घर गई थीं लेकिन उसके बाद लापता हो गईं। उन्होंने सब जगह तलाशा लेकिन मां का पता नहीं चला।

एक सप्ताह पहले हो गया अहसास
भुल्लू ने बताया कि उन्होंने मां को ढूंढने के लिए बहुत परेशानियां झेलीं। तांत्रिकों के पास गए। जिसने जहां बताया वहां गए पर भगवान से बस यही कहते थे कि एक बार मां से मिला दे। वह कहते हैं, ‘एक-एक दिन गिनकर मां के आने की प्रतीक्षा करता रहा। इस दौरान मैंने ब्राह्मणों और महात्माओं को बुलाकर आध्यात्मिक कार्यक्रम कराया ताकि मेरी मां जहां भी हों उन्हें शांति मिले और शीघ्र ही घर लौट आएं। उनके लौटने की जितनी खुशी उन्हें है उसे केवल मां से बिछुड़ने वाले ही महसूस कर सकते हैं।’

उन्होंने बताया कि करीब 6 महीने पहले उनके परिजन मां के कागज नष्ट करने जा रहे थे लेकिन उनका मन नहीं माना तो उन्होंने कागज फिर से रख दिए। एक सप्ताह पहले उन्होंने मां के फोटो संभालकर रखने शुरू किए तो उन्हें लगा कि उनकी मां जल्द मिल जाएंगी और हुआ भी ऐसा।

गांव वालों ने भी खिलाया खाना
2 दिसंबर को शेरगढ़ के गांव बैरम नगर के जंगल में एक वृद्ध महिला भूखी प्यासी भटकती मिली। खेत पर गए किसान प्रमोद ने महिला से घर चलने को कहा लेकिन महिला तैयार नहीं हुई। उसकी भाषा भी समझ नहीं आ पा रही थी। प्रमोद ने अपने चाचा उग्रसेन के साथ जंगल में जाकर महिला को खाना खिलाया तथा दूसरे दिन महिला के जंगल में मिलने के बारे में ग्राम प्रधान को बताया। ग्राम प्रधान पति मो. सखी खां ने शेरगढ़ थाना पुलिस को सूचना दी।

थानाध्यक्ष अश्वनी कुमार पुलिस फोर्स के साथ गांव पहुंचे और महिला को जंगल से गांव में लाकर देखरेख के लिए गांव निवासी प्रमोद कुमार मौर्य के घर पर रख दिया गया। इस दौरान प्रमोद कुमार मौर्य ने भूखी-प्यासी वृद्ध महिला की काफी सेवा की। उनसे घर का पता पूछा लेकिन भाषा समझ में नहीं आने के कारण कुछ दिक्कत हुई। महिला ने अपने गांव का नाम जमखुरी बताया।

इंटरनेट पर सर्च कर लगाया पता
पुलिस ने इंटरनेट के माध्यम से जमखुरी सर्च किया तो पता चला कि यह प्रयागराज में है। किसी तरह से घर का पता मिलने के बाद पुलिस ने जमखुरी के ग्राम प्रधान ओम प्रकाश सरोज को महिला के मिलने की सूचना दी। ग्राम प्रधान ने महिला के परिजनों को इसकी सूचना दी। इस पर वृद्ध महिला की पुत्रवधू सुषमा सरोज, उसका भाई सुनील कुमार पासी तथा पप्पू राम सरोज थाना शेरगढ़ पहुंचे। जहां पुलिस ने परिजनों को महिला से मिलवाया। महिला से मिलकर परिजन लिपट कर रोने लगे। इसे देखकर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

दोगुनी हो गईं शादी की खुशियां
वृद्ध महिला के परिवार में एक बेटी की शादी 7 दिसंबर को थी। शादी के माहौल में सभी खुश थे लेकिन जब दस साल पहले लापता हुई वृद्ध महिला प्रयागराज स्थित अपने गांव पहुंचीं तो शादी की खुशियां दोगुनी हो गईं।

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