गोंडा: आंदोलन कर रहे किसानों के समर्थन में बिजली कर्मियों का विरोध प्रदर्शन
गोंडा। कृषि कानूनों और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल की वापसी की मांगों को लेकर पिछले 13 दिनों से संघर्षरत किसानों के समर्थन में मंगलवार को देश भर के लगभग 15 लाख बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और इंजीनियरों द्वारा विरोध प्रदर्शन के क्रम में जनपद मुख्यालय स्थित कार्यालय के बाहर विभागीय कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन कर बिल …
गोंडा। कृषि कानूनों और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल की वापसी की मांगों को लेकर पिछले 13 दिनों से संघर्षरत किसानों के समर्थन में मंगलवार को देश भर के लगभग 15 लाख बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और इंजीनियरों द्वारा विरोध प्रदर्शन के क्रम में जनपद मुख्यालय स्थित कार्यालय के बाहर विभागीय कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन कर बिल को वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान एक्स. ए. एन. रणवीर सिंह ने कहा कि, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल में इस बात का प्रावधान है कि किसानों को बिजली टैरिफ में मिल रही सब्सिडी समाप्त कर दी जाए और बिजली की लागत से कम मूल्य पर किसानों सहित किसी भी उपभोक्ता को बिजली न दी जाए।
उन्होंने कहा कि इससे किसानो के साथ आम लोगों को भारी भरकम बिल चुकाना पड़ेगा, जो किसी भी दशा में उनके लिये हितकारी नहीं होगा। उन्होंने बताया कि किसान संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर चल रहे आंदोलन में कृषि कानूनों की वापसी के साथ किसानों की यह एक प्रमुख मांग है कि, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 वापस लिया जाए। किसानों का मानना है की इस बिल के जरिए बिजली का निजीकरण करने की योजना है। जिससे बिजली निजी घरानों के पास चली जाएगी और निजी क्षेत्र मुनाफे के लिए काम करते हैं जिससे बिजली की दरें किसानों की पहुंच से दूर हो जाएंगी।
उन्होंने किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि किसानों की आशंका निराधार नहीं है। बिजली वितरण के निजीकरण के लिए जारी स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्युमेंट बिजली के निजीकरण के उद्देश्य से लाए गए हैं। ऐसे में सब्सिडी समाप्त हो जाने पर बिजली की दरें 10 से 12 रुपये प्रति यूनिट हो जाएगी और किसानों को 8 से 10 हजार रुपये प्रति माह का न्यूनतम भुगतान करना पड़ेगा।
