Urs-e-Razvi 2025 : मुसलमानों और मदरसों को देश भक्ति के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। उर्स-ए-रजवी के दूसरे दिन मंगलवार को इस्लामिया मैदान पर नामूस-ए-रिसालत,आपसी सौहार्द कॉन्फ्रेंस व मसलक ए आला हजरत कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। इसमें उलमा ने कहा कि मुसलमानों और मदरसों को देश भक्ति के लिए किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। वही उर्स के मंच से उलमा ने कहा कि आपसी सौहार्द के लिए देश में सेकुलर हिंदू मुस्लिम मिलकर एक गठजोड़ बनाया जाएगा। इसके लिए देशभर की खानकाह को आगे आना होगा।

उर्स ए रजवी में आला हजरत की मोहब्बत में हजारों जायरीन पहुंच चुके है। उर्स के दूसरे दिन मंगलवार सुबह 8 बजे इस्लामिया मैदान में अंतरराष्ट्रीय नामूस-ए-रिसालत, आपसी सौहार्द और मसलक-ए-आला हजरत कॉन्फ्रेंस का आयोजन दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हानी मियां व सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां की सदारत व सय्यद आसिफ मियां की देखरेख में किया गया। कॉन्फ्रेंस का आगाज मुफ्ती जईम रजा ने किया। कॉन्फ्रेंस को खिताब करते हुए मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां का पैगाम देते हुए कहा कि आपसी सौहार्द के लिए देश में सेकुलर हिंदू-मुस्लिम मिलकर एक गठजोड़ बनाएं। इसके लिए हिंदुस्तान की खानकाहों को आगे आना होगा। मदरसों को आज शक की निगाह से देखा जाता है। कभी ये जांच कभी वो जांच। इन लोगों को ये नहीं मालूम कि आजादी के मतवालों ने इन्हीं मदरसों से तालीम हासिल की है। फिर चाहे वो टीपू सुल्तान हो, बहादुर शाह जफर या फिर अल्लामा फजले हक खैराबादी। मुसलमानों और मदरसों को देशभक्ति के लिए किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं। उलमा ने कहा कि अमेरिका ने दुनिया के कितने देशों को बर्बाद कर दिया। आज इजराइल अमेरिका की मदद से फिलिस्तीन को बर्बाद कर रहा है।

मुसलमान के हर बच्चे को देश का संविधान समझना जरूरी
उर्स के मंच से उलमा ने तकरीर करते हुए कहा कि दुनिया के देशों के संविधान में सबसे खूबसूरत संविधान हमारे देश का है। मुसलमान के हर बच्चे को अपने देश का संविधान समझना जरूरी है। इस देश में सभी को अपने मजहबी कार्यक्रम आयोजित करने की पूरी आजादी है। राजनीतिक पार्टियों के झांसे में आए बिना अपने देश से सच्ची मोहब्बत रखते हुए देश की तरक्की और खुशहाली के लिए काम करें। राजनीतिक पार्टियों की हुकूमत आती है और चली जाती है। हमारे देश का इतिहास बहुत पुराना है। इस मिट्टी में सभी का लहू शामिल है। सभी इस मुल्क के निवासी है। राजनीतिक पार्टियों से लगाव अलग चीज है, मुल्क से वफादारी अलग। हम अपने बच्चों को शरीयत के कानून के साथ देश के कानून को भी पढ़ाएं।

पाकिस्तानी यू ट्यूबर उलमा से दीन न सीखें सुन्नी मुसलमान
उलमा ने कान्फ्रेंस में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तानी यू ट्यूबर उलमा से दीन न सीखें बल्कि सुन्नी उलमा की किताबों से दीन सीखें। अपनी बहुओं-बेटियों की हिफाजत करें। नमाजों की पाबंदी करते हुए मालदार मुसलमान अपनी जकात की रकम से समाज से गरीबी दूर करें। कारी सखावत मुरादाबादी ने देश भर से आये उलमा व मस्जिदों के इमामों से अपील करते हुए कहा कि वो लोग जुमे की नमाज में आपसी सौहार्द को बढ़ावा देने, नफरत मिटाने और शरई दायरे में रहकर आपसी भाईचारे को मजबूत करने पर जोर दें।

मुसलमानों के शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ेपन पर जताई चिंता
संभल से आए कारी युसुफ रजा ने सामाजिक बुराई जैसे महिलाओं के साथ होने वाली जुल्म ज़्यादती, बढ़ती दुष्कर्म की घटनाएं, आपसी लड़ाई झगड़े, सूद का कारोबार, शराब, नशाखोरी, शादियों में फुजूलखर्ची, डीजे ढोल बाजे, मुसलमानों के शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ेपन पर फिक्र जाहिर करते हुए लोगों से ऐसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने का आह्वान किया। मौलाना कमर रजा ने आला हजरत के वैज्ञानिक कारनामों पर रोशनी डाली। मौलाना जाहिद रजा और मुफ्ती बशीर उल कादरी ने कहा कि बरेली की पहचान दुनिया भर में आला हजरत की वजह से है। उन्होंने बरेली में आला हजरत कॉरिडोर बनाने की मांग की।

 

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