बरेली: एंटी फ्रांड यूनिट रोकेगी आयुष्मान में फर्जीवाड़ा
अमृत विचार, बरेली। आयुष्मान भारत बीमा योजना में हो रही धांधली पर लगाम कसने के लिए शासन ने एंटी फ्रांड यूनिट का गठन किया है। प्रदेश के कई जिलों में आयुष्मान योजना में हुए फर्जीवाड़े के मामले सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया है। अब बिलों में संदेह होने पर शासन की टीम …
अमृत विचार, बरेली। आयुष्मान भारत बीमा योजना में हो रही धांधली पर लगाम कसने के लिए शासन ने एंटी फ्रांड यूनिट का गठन किया है। प्रदेश के कई जिलों में आयुष्मान योजना में हुए फर्जीवाड़े के मामले सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया है। अब बिलों में संदेह होने पर शासन की टीम पड़ताल करेगी। टीम के सहमति पत्र देने के बाद ही भुगतान किया जाएगा। इस संबंध में शासन ने पत्र भेजकर गंभीरता बरतने के निर्देश दिए हैं।
गरीबों को बेहतर इलाज दिलाने के लिए प्रधानमंत्री की ओर से आयुष्मान भारत योजना शुरू की गई थी। इसके तहत पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज कराया जा सकता है। बीते कुछ समय में योजना में फर्जीवाड़े के मामले कई जनपदों में उजागर हुए। बरेली में भी ऐसा ही मामला सामने आया था। इसे शासन ने गंभीरता से लिया है।
अभी तक जिला स्तर पर डीआईओ टीम निगरानी करती थी मगर अब शासन से भी निगरानी होगी। यह निगरानी एंटी फ्रॉड यूनिट करेगी। निजी अस्पतालों से क्लेम के बिलों के पहुंचते ही अगर टीम को संदेह होगा तो वह जनपद में आकर जांच करेगी। जांच कमेटी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर ही नेशनल हेल्थ अथॉरिटी बिल मंजूर करेगी। इस यूनिट का मकसद निजी अस्पतालों की तरफ से भेजे जाने वाले फर्जी बिलों के क्लेम और फर्जी कार्ड के भुगतान को रोकना है।
शिकायत के लिए एनएचए ने जिला स्तर पर बनाए दो पोर्टल
नेशनल हेल्थ अथॉरिटी ने यूनिट को चलाने के लिए दो पोर्टल भी बनाए हैं जहां मरीज संबंधित अस्पताल के खिलाफ शिकायत भी दर्ज करवा सकते हैं। पोर्टल में शिकायत करने वाले मरीज का नाम गुप्त रखा जाएगा। आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज करने वाले निजी अस्पतालों की ओर से बिल सीधे बीमा कंपनी को भेजे जाते हैं। यूनिट बनने के बाद अगर बीमा कंपनी को किसी अस्पताल पर फर्जी बिल भेजने का संदेह लगता है तो उसकी जानकारी स्टेट यूनिट को दी जाएगी। जांच के दौरान अगर अस्पताल गलत पाया गया तो उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करने का प्रावधान किया गया है।
शासन से एंटी फ्रॉड यूनिट का गठन किया गया है। किसी क्लेम में संदेह होने पर यह टीम उसकी जांच करेगी और टीम के सहमति पत्र दिए जाने के बाद ही अस्पताल का भुगतान किया जाएगा।– डा. अशोक कुमार, एसीएमओ
