बरेली: स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर दागियों की निगाहें, नहीं छूट रहा पीछा
अमृत विचार, बरेली। नगर निगम का बजट हो या स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट दोनों में गोलमाल करने वालों की लंबी फेहरिस्त है। अपनों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी करने में परहेज नहीं करते है। करोड़ों का घोटाला करने वाले अफसरों ने मनमानी तरीके से अपनी जेब भरी है। इसके बाद समय नौकरी कर …
अमृत विचार, बरेली। नगर निगम का बजट हो या स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट दोनों में गोलमाल करने वालों की लंबी फेहरिस्त है। अपनों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी करने में परहेज नहीं करते है। करोड़ों का घोटाला करने वाले अफसरों ने मनमानी तरीके से अपनी जेब भरी है। इसके बाद समय नौकरी कर चलते गए। अब तो ऐसा लगता है कि स्मार्ट सिटी के भारी भरकम दो हजार करोड़ के बजट पर गोलमाल करने वालों के निगाहें गड़ी हुई हैं। मामला उजागर होने के बाद भी जांच के नाम पर फाइलों को अटका दिया जाता है। कुछ दिन बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। इसके कारण घोटाला करने के माहिर खिलाड़ियों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में फर्जी कागज के जरिए निविदा हासिल करने का मामला उजागर हुआ है। पर सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि आखिर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का दागियों से क्यों पीछा नहीं छूट रहा है। आखिर के किसके वजह से ऐसे लोग प्रोजेक्ट के पास धन के लालच में पहुंच जा रहे है। क्योंकि कुछ माह पहले स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के मिशन मैनेजर सतीश के दामन पर दाग होने के बाद भी उसे अहम पद पर नियुक्त किया गया था।
युमना एक्सप्रेस वे परियोजना में डीसी के पद रहते हुए सतीश ने जमीनों की खरीद फरोख्त में एक आईएएस अफसर के साथ मिल कर करोड़ों रुपये का घोटाला किया था। इसके बाद उसने अपने दाग को छुपाकर बरेली पहुंच गया था। निगम के एक अधिकारी से गहरे संबंध होने के कारण वह अपनी नियुक्ति करने में सफल हो गया। दागी अफसरों की कुंडली पर नजर डाली जाए तो सपा सरकार में ही एक नगर आयुक्त पर भी करोड़ों के गोलमाल का आरोप है। जिसकी जांच अभी चल रही है।
पोर्टेबल शाप के नाम पर एक अधिकारी के इशारे पर करोड़ों का खेल किया जा चुका है। एक केमिकल्स कंपनी की रसीद बुक के जरिए करोड़ों का खेल हो गया।इसी तरह 14 वें वित्त के धन का दुरुयोग का भी मामला उजागर हो चुका है। पूर्व में तैनात रहे एक नगर स्वास्थ्य अधिकारी कुछ लोगों के साथ मिलकर लाखों का घोटाला कर दूसरी जगह चले गये। इसकी भी जांच अभी चल रही है। इन सभी मामलों में जांच के नाम पर फाइल अटकी हुई है और दागी अफसर आराम से नौकरी कर रहे हैं।
पूर्व में तैनात एक अपर नगर आयुक्त पर 78 लाख के घोटाले का आरोप पूर्व में तैनाती स्थल पर लग चुका है, इसकी भी जांच शासन स्तर पर चल रही है। इतना ही नहीं नगर निगम में भी निविदा के समय जमा होने वाली एफडी में भी गोलमाल का खेल हो चुका है। इस तरह के मामले उजागर होने पर एफडी पर रोक लगाते शासन धरोहर राशि को ठेकेदार के बैंक खाते से आरटीजीएस के माध्यम से धरोहर राशि जमा करानी शुरू कर दी।
