बरेली: कोरोना काल में स्पेशल-12 की मुस्तैदी से गुम नहीं हुआ कोई बच्चा

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अमृत विचार, बरेली। महाराणा प्रताप जिला संयुक्त चिकित्सालय में कोरोना काल में किसी भी मरीज या तीमारदार ने जिला अस्पताल प्रशासन से बच्चा चोरी और गुम होने की शिकायत दर्ज नहीं कराई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार बीते वर्ष अस्पताल से लगातार बच्चों की चोरी को रोकने के लिए नेशनल एक्रीडिएशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल मैनेजमेंट की …

अमृत विचार, बरेली। महाराणा प्रताप जिला संयुक्त चिकित्सालय में कोरोना काल में किसी भी मरीज या तीमारदार ने जिला अस्पताल प्रशासन से बच्चा चोरी और गुम होने की शिकायत दर्ज नहीं कराई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार बीते वर्ष अस्पताल से लगातार बच्चों की चोरी को रोकने के लिए नेशनल एक्रीडिएशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल मैनेजमेंट की ओर से 12 स्टाफ की टीम बनाई गई थी। इन स्टाफ को बच्चा चोरों को पकड़ने और बच्चों की हिफाजत के लिए स्पेशल स्पेशल ट्रेनिंग दी गई है। यह टीम रोजाना वार्डों में भर्ती और आने-जाने बच्चों पर नजर मुस्तैदी से नजर रखती है। इसके साथ ही अस्पताल में घूम रहे संदिग्ध लोगों से अस्पताल परिसर में आने-जाने का कारण जानते हैं, जिससे ऐसी घटनाओं से अस्पताल में आने वाले मरीज-तीमादार सुरक्षित रहे।

कोड पिंक करता है मदद

एनएबीएच के सदस्यों ने ट्रेनिंग के दौरान स्टाफ को बताया कि अगर कोई व्यक्ति बच्चा चोरी कर रहा हो तो शोर न मचाएं, इससे चोर भाग सकता है। किसी व्यक्ति को बच्चा चोरी करते देखने पर तुरंत दूसरे स्टाफ को बताना होगा। जिसके बाद वार्ड इंचार्ज फोन पर अन्य प्रशिक्षित स्टाफ को बस इतना बोलना है कि कोड पिंक हो गया है। जिससे अन्य स्टाफ कर्मी उसकी घेराबंदी कर उसे तुरंत दबोच लेंगे। वही टीम के कुछ सदस्य अस्पताल गेट पर भी मौजूद रहकर नजर रखेंगे।

तीमारदारों का रखा जाएगा रिकॉर्ड

बच्चा चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए गठित की गई टीम बच्चा वार्ड और एनआरसी यानी पोषण पुर्नवास केंद्र में आने-जाने वाले बच्चों और उनके परिजनों का रिकॉर्ड लेगी। साथ ही वहां आने वाले मरीज और तीमारदार से संपर्क सूत्र स्थापित करेंगे। ऐसे में टीम के पास मौजूद दस्तावेजों होने से आपातकालीन स्थिति में पूरी जानकारी जुटाकर मदद उपलब्ध कराई जा सके।

पहले हो चुकी हैं घटनाएं

केस 1

करीब दो साल पहले भमौरा क्षेत्र के एक गांव के दंपति का बच्चा वार्ड से किसी महिला ने बच्चा चोरी कर लिया था। काफी दिन पूछताछ हुई लेकिन बच्चा नहीं मिला। जिस कारण बच्चे की मां की हालत भी गंभीर हो गई थी।

केस दो

पहले साल बच्चा वार्ड से एक नवजात को कोई व्यक्ति उठाकर ले गया था। देर रात घटना होने के कारण न बच्चे के परिजनों को इसकी भनक लगी और न ही ड्यूटी पर तैनात स्टाफ को। बहुत ढूढ़ने के बाद भी बच्चा नहीं मिला।

यह हुई घटनाएं

-18 बच्चे अभी तक गुम हुए जिला अस्पताल से
-10 बच्चे मिल गए थे
-8 बच्चों का आज तक नहीं चल सका पता

वर्तमान में सुरक्षा के यह इंतजाम

– जिला अस्पताल की ओपीडी में आते है रोजाना 1000-1500 लोग
– जिला अस्पताल में मौजूद है 24 वार्ड
– जिला अस्पताल परिसर में तैनात रहते हैं दो होमगार्ड
– एक भी वार्ड में नही लगे हैं सीसीटीवी कैमरे
– वार्डों में एक भी इंटरकॉम की व्यवस्था नहीं है मौजूद

एनएबीएच के अंतर्गत 12 लोगों को बच्चा चोरी रोकने और चोरों को पकड़ने का प्रशिक्षण दिया गया था। इस प्रयास के बाद काफी हद तक बच्चा चोरी की घटनाओं में अंकुश लगा है। -पूजा चौहान, जिला अस्पताल प्रबंधक

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