कानपुर: GSVM में पहली बार की गई ऑटोमेटिक रोबोट से मृत देह पर सर्जरी, चार कैडवर पर स्पाइन की जटिलताओं को दूर करने की विधि सीखाई गईं
कानपुर, अमृत विचार। रीढ़ की हड्डी यानी स्पाइन के टेढ़ेपन, नसों का ठीक से काम न करने, दुर्घटना में आई जटिलता व स्पाइन की आदि समस्या के निदान के लिए ऑटोमेटिक रोबोट काफी कारगर है। इससे इंफेक्शन का खतरा नहीं होता और ऑपरेशन के दौरान जटिलताएं काफी कम होती है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन ऑटोमेटिक रोबोट के संबंध में काफी प्रयास कर रहा है और सीएसआर फंड से अत्याधुनिक तकनीक से युक्त ऑटोमेटिक रोबोट के लिए कोशिश में है। ताकि मरीजों की जटिलताएं पूर्ण रूप से कम हो सके और वह जल्द स्वस्थ होकर घर जा सके।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के एनाटमी विभाग में शनिवार को रोबोटिक एवं नैविगेशन स्पाइन सर्जरी की वर्कशाप का आयोजन किया गया, जिसका शुरुआत विधायक नीलिमा कटियार, विधायक राहुल सोनकर, प्राचार्य डॉ. संजय काला, उप प्राचार्य डॉ.रिचा गिरी व न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ.मनीष सिंह ने की। दिल्ली स्थित मैक्स हॉस्पिटल से आए डॉ.जितेश मंगवानी ने चार कैडैवर पर रोबोटिक सर्जरी का प्रशिक्षण दिया।
बताया कि रोबोटिक सिस्टम सर्जन की भुजाओं का विस्तार करते हैं, जिससे वह मानव हाथ से प्राप्त करने योग्य सटीकता के स्तर से कहीं अधिक सटीकता प्राप्त कर सकते हैं। वेट लैब में कैडैवर पर अभ्यास करने से सर्जन को जोखिम के बिना यथार्थवादी अनुभव मिलता है, जिससे वह रोगी के परिणामों में सुधार कर सकते हैं। रोबोटिक सर्जरी छोटे चीरों के माध्यम से की जाती है, जिससे रोगी को कम आघात होता है और तेजी से रिकवरी होती है।
देश के भीतर ही रोबोटिक सर्जरी सीखने से विदेशों में महंगा प्रशिक्षण लेने की आवश्यकता कम होती है। बताया कैडैवर का उपयोग कर सर्जन वास्तविक मानव ऊतकों पर रोबोटिक प्लेटफॉर्म पर जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं का अभ्यास करते हैं। संवेदनशील तंत्रिकाओं और ऊतकों पर दबाव कम करते हुए सटीक और जटिल सर्जरी करने में मदद मिलती है, जिसके बाद मरीज में बेहतर परिणाम देखने को मिलते हैं।
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नार्थ इंडिया की यह पहली वर्कशाप
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला के मुताबिक यह रोबोटिक स्पाइन सर्जरी नार्थ इंडिया की प्रथम वर्कशाप थी, जिसका आयोजन न्यूरो सर्जरी विभाग किया गया, जिसके आर्गनाजिंग सेकैटरी डॉ.आंचल दत्ता व अध्यक्ष डॉ. मनीष सिंह थे, इसमे पूरे देश के 50 न्यूरो सर्जन ने रोबोटिक स्पाइन सर्जरी का प्रशिक्षण लिया। अध्यक्ष डॉ. मनीष सिंह के मुताबिक पूर्व में जो स्पाइन सर्जरी की जाती थी उसमे इम्पालांट डालने में करीब 15 से 30 प्रतिशत रोगियो में कम्पलीकेशन होने की संभावना रहती थी, लेकिन रोबोट के माध्यम से सर्जरी करने पर इसकी एक्युरेसी 99.9 प्रतिशत होती है। सर्जरी के दौरान जो पूर्व में रेडियेशन होने के कारण आपरेशन करने वाले चिकित्सक व स्टाफ को कैंसर आदि होने का खतरा होता था, वह रोबोटिक सर्जरी में नहीं होता है।
