Navratri 2025: सोमवार से नवरात्र शुरू, सज उठे मंदिर, जानिए घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर, अमृत विचार। शहर में नवरात्र का उत्साह सोमवार से मंदिरों में छाएगा। पहले दिन घरों में कलश स्थापना के साथ ही मंदिरों में पूजन के लिए भी भक्त उमड़ेंगे। भक्तों के उत्साह के चलते मंदिरों को भी रविवार रात से ही रौशनी से सजा दिया गया है। उधर नवरात्र की खरीदारी के लिए मंदिरों के आस-पास की बाजारों में भी भीड़ रही। सुबह से ही घरों में देवी पूजन के साथ ही कलश स्थापना की जाएगी। 

इस बार भक्तों को कलश स्थापना के दो मुहूर्त मिल रहे हैं। इनमें एक सुबह व दूसरा मुहूर्त दोपहर को हासिल हो रहा है। उधर नवरात्र को लेकर शहर के देवी मंदिरों में भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। बाराजदेवी मंदिर, तपेश्वरी देवी मंदिर, जंगली देवी मंदिर, अशोक नगर दुर्गा मंदिर, चंद्रिका देवी मंदिर में भक्तों पर सीसीटीवी के जरिए नजर रखी जाएगी। भक्तों की भीड़ के चलते बैरियर भी लगाए जाएंगे। 

कई मंदिरों में भक्तों को मेटल डिटेक्टर से होकर भी गुजरना होगा। रविवार शाम तक मंदिरों में सुरखा जांच होती रही। उधर शाम को शहर के देवी मंदिरों को रौशनी से सजाया गया। बारादेवी मंदिर, अशोक नगर दुर्गा मंदिर, गोविंद नगर दुर्गा मंदिर व जंगली देवी में विशेष रौशनी की गई। नवरात्र के दौरान देवी मंदिरों में कई धार्मिक आयोजन भी किए जाएंगे। उधर नवरात्र के पहले दिन देवी मंदिरों में शाम को भक्तों की भीड़ अधिक होने की संभावना जताई जा रही है। 

बाजारों में हुई खरीदारी

नवरात्र को लेकर रविवार को मंदिरों के आस-पास लगी दुकानों से लोगों ने खरीदारी की। सुबह घरों में होने वाले पूजन के लिए भक्तों ने फूल व मालाएं खरीदी। इसी तरह चुनरी व प्रसाद की सामग्रियां भी खरीदी गई। 

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 

नवरात्र की शुरुआत घटस्थापना के साथ होता है। जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है। घटस्थापना सोमवार, 22 सितंबर को की जाएगी। 

घटस्थापना मुहूर्त - सुबह 5:58 बजे से 7:52 बजे तक

घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:37 बजे से 12:25 बजे तक

कलश स्थापना की विधि

कलश स्थापित करने के लिए सवेरे उठकर स्नान करके साफ  लाल रंग के कपड़े धारण करना चाहिए| मंदिर की साफ-सफाई करके चौकी पर लाल कपड़ा बिछाना चाहिए| इसके बाद उसके ऊपर एक चावल की ढेरी बनाएं. एक मिट्टी के बर्तन में थोड़े से जौ बोएं और इसके ऊपर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करना चाहिए। कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाकर के बाद कलावा बांधना चाहिए। एक नारियल लेकर उसके ऊपर चुन्नी लपेटें और कलावे से बांधकर कलश के ऊपर स्थापित करें। 

कलश के अंदर एक साबूत सुपारी, अक्षत और सिक्का डालें। अशोक और आम के पत्ते कलश के ऊपर रखकर नारियल रख दें। नारियल रखते हुए मां दुर्गा का आवाह्न करना न भूलें। अब दीप जलाकर कलश की पूजा करें, स्थापना के समय आप सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी किसी भी कलश का इस्तेमाल कर सकते हैं |

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