UP : संभल दंगों पर बनने वाली फिल्म का क्या है कश्मीर कनेक्शन, उदयपुर फाइल्स वाले डायरेक्टर का बड़ा खुलासा
संभल, अमृत विचार। उदयपुर फाइल्स के निर्माता अमित जानी ने संभल के साम्प्रदायिक दंगों को लेकर बनने वाली फिल्म का नाम ''''रलिव गलिव चलिव'''' तय किया है। यह नारा कत्लेआम के समय कश्मीर में दिया गया था। इस नारे का मतलब था-इस्लाम कबूलो या कश्मीर छोड़ो या मर जाओ।
अमित जानी दूसरे दिन अपनी टीम के कुछ लोगों के साथ ठिलूपुरा गांव में 1978 के दंगा पीड़ित परिवारों से मिले और उनसे उन हालातों के बारे में जानकारी ली। इस परिवार के एक व्यक्ति व उसकी पत्नी को मुरारी लाल की फड़ में जिंदा जला दिया गया था। अमित जानी ने बताया कि फिल्म में 1973, 1976 और 1978 के दौरान संभल में घटित दंगों तथा उनके सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों को उठारया जाएगा।
उन्होंने कहा कि दुर्घटनाए मामूली नहीं थीं। इसमें स्थानीय सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तनों और जनसंख्या के बदलते स्वरूप को भी फिल्म का विषय बनाया जाएगा। निर्माता ने कहा कि फिल्म में उन घटनाओं, आरोपों और अनुभवों को दिखाने का प्रयत्न होगा जिनका आज तक सार्वजनिक रिकॉर्ड सीमित रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म में कल्कि धाम पीठ के संघर्ष और स्थानीय घटनाओं के बाद आये प्रशासनिक और राजनीतिक परिवर्तनों को भी दिखाया जाएगा। उदयपुर फाइल्स जैसी पिछली परियोजनाओं का हवाला देते हुए अमित जानी ने कहा कि वह संवेदनशील विषयों को सिनेमा के माध्यम से दिखाने की कोशिश करते रहे हैं। पत्रकारों के सवालों के जवाब में जानी ने कहा कि फिल्म का दृष्टिकोण घटनाक्रमों का प्रस्तुतीकरण होगा और किसी व्यक्तिगत या समुदाय विशेष के प्रति उकसाने वाले बयानों से परहेज किया जाएगा। फिल्म का लक्ष्य इतिहास व घटनाओं की पड़ताल कर के दर्शकों के सामने सवाल रखना है। निर्माता ने कहा कि फिल्म की तैयारी और शोध जारी ।
समाज को बांटने वाली फिल्मों का करते रहेंगे विरोध: बर्क
संभल,अमृत विचार: संभल के साम्प्रदायिक दंगों को लेकर निर्माता अमित जानी द्वारा फिल्म बनाने का एलान किये जाने पर सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि वह पहले भी समाज को भड़काने वाली फिल्मों का विरोध करते रहे हैं और आगे भी करेंगे। सांसद ने कहा कि किसी भी फिल्म से अगर देश या समाज में बवाल खड़ा होता है तो उस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि ऐसी फिल्मों का निर्माण ही न हो, जो समाज को बांटने का काम करती हों। उन्होंने सुझाव दिया कि फिल्म निर्माताओं को देश के विकास और संभल की सच्चाई जैसे मुद्दों पर फिल्में बनानी चाहिए। कहा कि अगर दम है तो सच्चाई पर फिल्म बनाओ। ऐसी फिल्में बनाओ जो देश और समाज को जोड़ें न कि बांटें।
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