नवरात्र पर मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़.. लखनऊ के अलग अलग मंदिरों में भक्त कर रहे दर्शन पूजन 

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
On

लखनऊ, अमृत विचारः शारदीय नवरात्र के चौथे दिन राजधानी के प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस दिन मां दुर्गा के चतुर्थ रूप मां कुष्मांडा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। शहर के बड़ी काली जी मंदिर, कालीबाड़ी मंदिर, संदोहन मंदिर, मरी माता मंदिर, भुइय्यन देवी मंदिर और दुर्गा मंदिर समेत अन्य प्रमुख देवी मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। मंगल आरती के साथ ही मंदिरों का वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया। देर रात तक श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए मंदिरों में जुटे रहे।

श्रद्धालुओं का मानना है कि मां कुष्मांडा के दर्शन मात्र से जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं और घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि मंदिर में आकर उन्हें आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति हुई। हालांकि नवरात्रि की तिथि गणना के अनुसार मां चंद्रघंटा का दिन दो बार आने के कारण गुरुवार को भी कई घरों में मां चंद्रघंटा की पूजा की गई। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी और उन्होंने पूरे श्रद्धा भाव से मां कुष्मांडा की आराधना की। मंदिर प्रबंधन ने दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए थे। सुरक्षा के लिहाज से भी पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

नवरात्रि के चौथे दिन होती है मां कुष्मांडा की पूजा

नवरात्रि के नौ दिवसीय महापर्व में चौथे दिन मां दुर्गा के कुष्मांडा रूप की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस बार मां चन्द्रघंटा का पूजन दो दिन होने की वजह से कुष्मांडा देवी की पूजा शुक्रवार को होगी। कुष्मांडा मां के इस स्वरूप को सृष्टि की आदि शक्ति और ब्रह्मांड की रचयिता कहा गया है। कुष्मांड शब्द का अर्थ है कुम्हड़े (कुष्मांड) से ब्रह्मांड की उत्पत्ति करने वाली शक्ति। यही कारण है कि मां कुष्मांडा को आदिशक्ति का स्वरूप माना जाता है।

आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब सृष्टि नहीं थी, चारों ओर अंधकार ही अंधकार था, तब मां कुष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। ऐसा कहा जाता है कि उनकी उपासना से आयु, यश, बल और आरोग्य की प्राप्ति होती है और सभी प्रकार के रोग और मानसिक-शारीरिक कष्ट समाप्त हो जाते हैं।

मां कुष्मांडा अष्टभुजा वाली देवी हैं। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृत कलश, चक्र, गदा और सिद्धियों को देने वाली जपमाला होती है। नवरात्रि के इस दिन बीज मंत्रों का 108 बार जाप करने से साधक को विशेष फल की प्राप्ति होती है।

या देवी सर्वभूतेषु कुष्मांडा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

मान्यता है कि मां कुष्मांडा थोड़ी सी भक्ति से ही प्रसन्न हो जाती हैं और अपने भक्तों को यश, बल और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। नवरात्रि के चौथे दिन मालपुआ और पेठे का भोग विशेष रूप से मां को अर्पित किया जाता है, यह उन्हें अति प्रिय हैं।

ये भी पढ़े : फिल्मी सितारों की रामलीला...पिता के वचनों को पूरा करने सीता के संग वन को चले श्रीराम

 

संबंधित समाचार