बरेली: हड़ताल पर रहे 350 अस्पतालों के 1000 चिकित्सक
बरेली, अमृत विचार। भारत सरकार द्वारा आयुष चिकित्सकों को ऑपरेशन की मंजूरी देने के खिलाफ शुक्रवार को निजी चिकित्सक आईएमए के बैनर तले हड़ताल पर रहे। डॉक्टरों ने ओपीडी को बंद रखा। शहर के करीब 1000 चिकित्सक और 350 अस्पताल इस विरोध प्रदर्शन में शामिल रहे। सभी चिकित्सकों ने आईएमए के बैनर तले एकजुटता का …
बरेली, अमृत विचार। भारत सरकार द्वारा आयुष चिकित्सकों को ऑपरेशन की मंजूरी देने के खिलाफ शुक्रवार को निजी चिकित्सक आईएमए के बैनर तले हड़ताल पर रहे। डॉक्टरों ने ओपीडी को बंद रखा। शहर के करीब 1000 चिकित्सक और 350 अस्पताल इस विरोध प्रदर्शन में शामिल रहे। सभी चिकित्सकों ने आईएमए के बैनर तले एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए जुलूस निकाला।
चिकित्सक सरकार से अपना फैसला बदलने की मांग कर रहे थे। चिकित्सकों के मुताबिक यह खिचड़ी व्यवस्था चिकित्सा क्षेत्र को न सिर्फ बर्बाद कर देगी बल्कि लोग बेहतर चिकित्सा सुविधा से भी वंचित हो जाएंगे। जुलूस से पहले आईएमए सभागार में चिकित्सकों ने नए प्रावधान पर अपनी आपत्तियों को भी सामने रखा।
सरकार के खिलाफ शुक्रवार को चिकित्सकों ने ओपीडी में मरीजों को नहीं देखा। शहर के 350 निजी अस्पतालों में मरीजों को नहीं देखा गया, केवल इमरजेंसी और कोविड मरीजों का ही उपचार किया गया। किसी भी अस्पताल में एक भी चिकित्सक मौजूद नहीं रहा।
चिकित्सकों के मुताबिक, देश में 50 प्रतिशत आधुनिक चिकित्सा पद्धति से उपचार होता है। सभी चिकित्सा पद्धतियों का अपना-अपना महत्व होता है। सभी चिकित्सा पद्धतियों को स्वतंत्र रूप से पूर्ण वैज्ञानिक तरीके से विकसित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) मिक्सोपैथी के सख्त खिलाफ है। मिक्सोपैथी के कारण हमारे देश में चिकित्सा की गुणवत्ता काफी कम हो जाएगी और चिकित्सा के स्तर में गिरावट आएगी। इससे वैश्विक स्तर पर भारतीय चिकित्सा की साख गिर जाएगी।
बैठक के बाद मिक्सोपैथी चिकित्सा वापस करने की मांग को लेकर आईएमए हॉल से जुलूस निकाला गया। हाथों में बैनर, हैंडबिल और तख्तियां लिए डॉक्टर नारेबाजी करते हुए चौकी चौराहे तक गए। वहां से वापस आकर आईएमए भवन में जुलूस समाप्त हुआ।
मरीजों को झेलनी पड़ीं दिक्कतें
चिकित्सकों की हड़ताल का सीधा असर आम व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पड़ा। शुक्रवार को मरीज और तीमारदार उपचार के लिए इधर से उधर भटकने को मजबूर हुए। अधिकांश अस्पतालों में दूर-दराज से आने वाले मरीजों को बिन उपचार के ही मायूस होकर लौटना पड़ा।
“सभी चिकित्सकों ने पहले ही नोटिस लगा दिया था। शुक्रवार को केवल इमजरेंसी और कोविड मरीज ही देखे गए हैं। सुबह सभी सदस्य आईएमए प्रांगण में एकत्रित हुए जहां से एक विरोध जुलूस भी निकाला गया।” -डा. मनोज कुमार अग्रवाल, अध्यक्ष आईएमए

“सरकार ने आयुष चिकित्सकों को भी 58 तरीके की सर्जरी करने की छूट दे रखी है। इससे इलाज में खिचड़ी व्यवस्था लागू हो जाएगी। माडर्न मेडिसिन बिना पढ़े ही मरीजों पर माडर्न मेडिसिन की प्रैक्टिस शुरू हो जाएगी जो समाज के लिए काफी खतरनाक सिद्ध होगा।” -डा. राजीव गोयल, उपाध्यक्ष आईएमए

“दोनों पद्धतियां अलग-अलग हैं। सरकार को चिकित्सा की जितनी भी पद्धतियां हैं उनको बढ़ाने, उनके विकास पर बल देना चाहिए। आयुर्वेद सबसे प्राचीन पद्धति है। सरकार को इस पर शोध कर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।” -डा. सुदीप सरन, आईएमए सदस्य

“इस खिचड़ी चिकित्सा पद्धति से भारतीय चिकित्सा की साख गिरने के साथ ही आमजन को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। ऐसे में सरकार को चाहिए कि अगर आयुर्वेद के डॉक्टरों को एलोपैथी की तरह प्रशिक्षण देने के बाद ऑपरेशन करने की अनुमति दी जाए।” -डा. आईएस तोमर, पूर्व आईएमए अध्यक्ष

