ताम्रपत्र पर उकेरते तस्वीर, अब पद्मश्री के लिए प्रस्तावित किया नाम
हाथों से ताम्रपत्र पर तस्वीर उकेरने वाले शिवाला निवासी रणजीत सिंह का नाम जिलाधिकारी ने पद्मश्री सम्मान के लिए भेजा है। रणजीत सिंह अकेले शख्स हैं जो ताम्रपत्र पर हाथों से तस्वीर उकेरते हैं। हस्तशिल्पकारी उनको विरासत में मिली है। तांबा और जस्ता पर तस्वीर उकेरने का कार्य करने के शौकीन रणजीत सिंह के परिवार में पीढ़ियों से यह कार्य हो रहा है। उन्हें उम्मीद है कि पद्श्री सम्मान उन्हें जरूर मिलेगा। जब पता चला कि प्रशासन ने उनका नाम इस अवार्ड के लिए भेजा है तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। समाचार मिलते ही आंखें नम हो गई। उनका सपना है कि ताम्रपत्र की कला जिंदा रहे। इसके लिए वे निरंतर प्रयास भी कर रहे हैं। इसीलिए वह 82 साल की उम्र में भी युवाओं को हाथों से बनाई जाने वाली इस कला को सिखाते हैं।
कई ऐतिहासिक इमारतों की तस्वीर भी बनाई
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रणजीत सिंह बचपन में परिवार में आभूषण बनाने का कार्य देखते थे तो उन्हें भी तांबा, जस्ता पर तस्वीर बनाने की जिज्ञासा हुई। इस सपने को साकार करने में वे जुट गए और हाथों से तांबा और जस्ता पर तस्वीर उकेरने का काम सीखने में जुट गए। धीरे- धीरे वह इस कला में पारंगत हो गए। रणजीत सिंह को हिंदी के साथ पंजाबी, राजस्थानी व अंग्रेजी भाषा का भी ज्ञान है। शौक में ही अपनी कला को जीवित रखने के लिए वह तांबे और जस्ता पर अपने हाथों से कई ऐतिहासिक तस्वीरें वे उकेर चुके हैं। रणजीत सिंह ने ताम्रपत्र पर 1857 के स्वतंत्रता संग्राम , लखनऊ स्थित रूमी दरवाजा, उत्तर प्रदेश विधानसभा भवन, संसद भवन, आगरा के ताजमहल, कानपुर की ऐतिहासिक लाल इमली, बिठूर के ऐतिहासिक घाटों की तस्वीर भी बना चुके हैं। ग्रीन पार्क स्टेडियम में बनाई गई विजिटर गैलरी में लगी 24 क्रिकेटरों की तस्वीर, राष्ट्रपति महात्मा गांधी की दांडी यात्रा से जुड़ी तस्वीर भी ताम्रपत्र पर उकेर चुके हैं।
पूर्व प्रधानमंत्रियों को भेंट कर चुके तस्वीर
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वे तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई, मनमोहन सिंह और एचडी देवगौड़ा की तस्वीर बनाने के साथ ही उन्हें भेंट भी कर चुके हैं। तत्कालीन रामनाथ कोविंद व प्रतिभा पाटिल को भी उनकी तस्वीरें भेंट कर चुके हैं। महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर समेत कई खिलाड़ियों की तस्वीरें बनाई और उनसे मिलकर उन्हें दिया भी। इस कार्य के लिए उन्हें कई बड़े पुरस्कार भी मिल चुके हैं। वे चाहते हैं कि उनके द्वारा ताम्रपत्र पर बनाई गई श्रीराम मंदिर की तस्वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद ही भेंट करें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को वे कानपुर में आयोजित एक सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर भेंट कर चुके हैं। वह मांग के अनुसार विभिन्न खेलों में विजेता के लिए मेडल भी बनाते हैं। मर्चेंट्स चैंबर, जीएसवीएम मेडिकल कालेज के स्वर्ण जयंती पर भी उन्होंने मेडल तैयार किए। आइआइटी कानपुर के दीक्षांत समारोह के लिए भी मेडल बना चुके हैं।
आसान नहीं चित्र बनाना
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रणजीत सिंह का कहना है कि यह कार्य बहुत आसान नहीं है। चित्र तैयार करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। मेहनत के साथ दिमाग भी लगाना पड़ता है। केमिकल की एक भी बूंद कम अथवा ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अगर इसका संतुलन बिगउ़ा तो पूरा ताम्रपत्र खराब हो जाएगा। एक तस्वीर बनाने में सात से आठ दिन का वक्त लगता है और 15000 हजार रुपये खर्च होता है। आगरा में रानी एलिजाबेथ उनके पिता स्व.बालकृष्ण ने उन्हें 3 इंच लंबा, 2.5 इंच चौड़ा शीशा दिया था। इस पर मीना कारीगरी की गई थी।. शीशे के चारों ओर किनारे खुदाई करके उसमें हीरे लगाए गए थे।
ये सम्मान उन्हें मिल चुके हैं
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने उन्हें हिन्दी साहित्य सम्मेलन में सम्मानित किया।
उप्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन की ओर से तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल वोरा ने उन्हें सम्मानित किया।
अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग 1989 धरशास्त्री ने सम्मान दिया।
हिन्दी सेवा निधि के कार्यक्रम में सम्मानित किए जा चुके हैं।
2003 में यूपी कॉन रजत जयन्ती वर्ष पर उन्हें सेवा सम्मान दिया गया था।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष केसरीनाथ त्रिपाठी ने उन्हें 2005 राष्ट्रीय भाषा हिन्दी सेवा सम्मान दिया।
