कानपुर : दुख-चिंता में युवक ने दी जान, शादी की चल रही थी बात, बोला पिता- चला गया सहारा
कानपुर, अमृत विचार। एक माह पहले ही मां के छोड़ जाने का दुख और प्रेमिका से शादी की चिंता। उस पर दोस्त भी बार-बार फोन करके 10 हजार रुपयों का तगादा करने लगा। इसी तनाव में सेन पश्चिमपारा में युवक ने गलत कदम उठा लिया। घर पर खुद को अकेला पाकर फंदे से लटक गया। मिलने पहुंची प्रेमिला ने फंदा काटकर उसके वृद्ध पिता को सूचना दी। परिजनों में कोहराम मच गया। हालांकि युवक ने पहले भी आत्महत्या का प्रयास किया था। डेढ़ साल पहले डाई पीने का पता चलने पर परिजनों ने बचा लिया था।
यशोदानगर निवासी 20 वर्षीय युवक कृष्णा शुक्ला ने स्टॉल से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पिता सुरेश चंद्र शुक्ला ने बताया कि उनके कोई संतान नहीं थी, इसलिए रावतपुर गांव में रहने वाली साली प्रतिभा उर्फ बबली से उनका सबसे छोटा बेटा कृष्णा को गोद लिया था। जब वह एक साल का था। कृष्णा के पिता स्व. रमाशंकर दीक्षित की मौत हो चुकी थी। उनके पहले से चार संतान सूरज, कोमल, श्याम व मानसी थे।
उन्होंने बताया कि कृष्णा की पढ़ाई दसवीं तक ही थी, लेकिन कंप्यूटर का अच्छा जानकार था। मौजूदा समय में वह उनके साथ ही कृष्णापुरम स्थित एक आटो मोबाइल शोरूम में बीमा क्लेम का काम कर रहा था। गुरुवार वह ड्यूटी पर थे, जबकि बेटा घर पर अकेला था। शाम को उसने कमरे में फांसी लगा ली। इसी बीच उसकी प्रेमिका घर पहुंची और बेटे को फंदे से पर लटका देख लिया। उसने फंदा काटकर नीचे उतारा और उन्हें खबर दी। वह जब तब पहुंचे अस्पताल में डॉक्टर ने बेटे को मृत घोषित कर दिया।
पिता ने बताया कि अभी 28 अगस्त को ही उनकी पत्नी पुष्पा शुक्ला की हार्ट अटैक से मौत हुई थी। जिससे बेटा दुखी था। प्रेमिका से ही शादी करने की जिद को लेकर भी तनाव में था। इसी बीच मां के अंतिम संस्कार में कर्ज लिया रुपया भी उसका दोस्त बार-बार तगादा करने लगा। इसी तनाव में बेटे यह कदम उठा लिया, जबकि छह अक्टूबर को पैसा लौटाने व उसकी शादी प्रेमिका से ही कराने की बात कही थी। उसकी प्रेमिका के परिजनों को शादी की बातचीत के लिए बुलाया था।

पिता के अनुसार कृष्णा डेढ़ वाल पहले बैंगलौर में नौकरी करता था। वहीं उसकी प्रेमिका से मुलाकात हुई। लेकिन वह लड़की नौकरी छोड़कर अपने घर बर्रा चली आई थी। इसका पता चलने पर कृष्णा ने डाई पी ली थी। तब किसी तरह उसकी जान बचाई गई। एक माह पहले पत्नी फिर गोद लिए बेटे का शव देखकर सुरेश चंद्र फफक पड़े। परिजनों ने किसी तरह उन्हें संभाला।
अलग-अलग कारणों से तीन ने की आत्महत्या
पनकी, नौबस्त और स्वरूपनगर में तीन युवकों ने भी फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। सूचना पर पुलिस ने जांच-पड़ताल की और शवों को मोर्चरी भेजा। पनकी के गंभीरपुर निवासी 35 वर्षीय राजमिस्त्री पप्पू पासवान ने फांसी लगा ली। बड़े भाई कल्लू ने बताया कि बुधवार रात परिवार के सभी लोगों खाना खाकर सो गए थे, तभी देर रात पप्पू ने पंखे के कुंडे से फांसी लगा ली। पत्नी शिववती ने बताया कि गुरुवार सुबह सोकर उठने के बाद बच्चे अंशिका, जेयस व कशिक को उठाने के बाद पति का शव फंदे से लटका देखा। चीख-पुकार मचने पर पड़ोसी भी आ गए। घटना की जानकारी पनकी पुलिस को दी गई। थाना प्रभारी मनोज सिंह भदौरिया ने बताया कि आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं है। जांच की जा रही है।
दूसरी घटना नौबस्ता के आवास विकास हंसपुरम में हुई। मूलरूप से फतेहपुर जहानाबाद के बिसई गांव निवासी 45 वर्षीय ललित नारायण उर्फ अशोक खेती करते थे। परिवार में पत्नी निशा, बेटा हर्ष व बेटी खुशी हैं। हर्ष ने बताया कि बुधवार को पिता गांव गए थे। वहां से लौटने के बाद देर रात कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। कारण का पता नहीं है।
इसी तरह स्वरूपनगर में जीटी रोड स्थित मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल के पुराने साइकिल स्टैंड की पार्किंग में शुक्रवार सुबह 35 वर्षीय रिक्शा चालक मुकेश का शव टीनशेड के एंगल से कपड़े की रस्सी से लटका मिला। आसपास के लोगों ने बताया कि पहले वह अस्पताल के कर्मचारी पप्पू का ई-रिक्शा चलाता था। वह मूलरूप से हरदोई का रहने वाला है। उसने फांसी क्यों लगाई वजह स्पष्ट नहीं है। पुलिस ने उसके परिजनों को सूचना दी है।
