सुलतानपुर : साधु-संतों व सनातन पर अभद्र टिप्पणी करने वाले शिक्षक पर केस दर्ज
करौंदीकला/सुलतानपुर, अमृत विचार। थाना करौंदीकला क्षेत्र के अमरेमऊ गांव स्थित बौद्ध विहार आश्रम में आयोजित एक गोष्ठी के दौरान दिए विवादित भाषण से पूरे जिले में तनाव का माहौल बन गया है। आरोप है कि रायबीगो निवासी एवं शहर के प्रतिष्ठित एमजीएस इंटर कॉलेज के सहायक अध्यापक श्यामलाल निषाद ने अपने उद्बोधन के दौरान हिंदू साधु-संतों व सनातन धर्म के प्रति अमर्यादित एवं आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया, जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं गहराई से आहत हुई हैं। मामले में आरोपित शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। साथ ही विद्यालय प्रबंध कमेटी ने भी नोटिस जारी करते हुए जांच बैठाई है।
हिंदू संगठनों से जुड़े मनोज कुमार तिवारी, आलोक सिंह, कमलेश, लाल जी पांडेय, संजय सिंह, राजेंद्र प्रसाद पांडेय, मनोज कुमार सिंह, दीपक, चंद्रभान उपाध्याय, राकेश उपाध्याय, अशोक उपाध्याय, दयाराम उपाध्याय, सुनील उपाध्याय, दयाशंकर यादव, प्रेमचंद्र गुप्ता, सत्य प्रकाश निषाद समेत कई लोगों ने थानाध्यक्ष करौंदीकला को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि आरोपी ने गोष्ठी के मंच से भगवाधारी... जैसी अभद्र टिप्पणी की, जो न केवल साधु-संतों का अपमान है, बल्कि समाज में वैमनस्य फैलाने का प्रयास भी है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी शिक्षक श्यामलाल निषाद के खिलाफ वीएनएस की धारा 353(2) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। एसओ करौंदीकला चंद्रभान ने बताया कि मामला गंभीर प्रकृति का है और इसकी जांच की जा रही है।
विद्यालय प्रबंधन ने जारी की नोटिस
शहर के प्रतिष्ठित महात्मा गांधी स्मारक इंटर कॉलेज (अशासकीय माध्यमिक विद्यालय) के प्रधानाचार्य महेश सिंह ने बताया कि मामले से प्रबंध कमेटी को अवगत कराया गया है। साथ ही आरोपित सहायक अध्यापक श्यामलाल निषाद को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण जारी किया गया है। वहीं, कॉलेज प्रबंधक व शिक्षा चयन आयोग के सदस्य विनोद सिंह ने बताया कि सूचनाएं मिली है। विधिक एक्शन लिया जाएगा। सारी रिपोर्ट आ रही है।

अधिवक्ताओं ने राज्यपाल को भेजा ज्ञापन
कादीपुरः अमरेमऊ बौद्ध विहार में शिक्षक श्यामलाल निषाद द्वारा साधु-संतों, सनातन धर्म और भगवा पर की गई अभद्र टिप्पणी के विरोध में कादीपुर बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं में आक्रोश है। सोमवार को अधिवक्ताओं ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन एसडीएम उत्तम कुमार तिवारी को सौंपा। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि शिक्षक रहते हुए श्यामलाल ने सेवा नियमावली का उल्लंघन किया है। उन्होंने आरोपी पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी और सेवा से बर्खास्तगी की मांग की। ज्ञापन देने वालों में बार अध्यक्ष बद्री प्रसाद सिंह, सचिव मंगला प्रसाद तिवारी समेत कई अधिवक्ता शामिल रहे।
विधायक राजेश गौतम का अधिवक्ताओं ने किया सम्मान
कादीपुरः अमरेमऊ बौद्ध विहार प्रकरण में सनातन धर्म और भगवा पर हुई अभद्र टिप्पणी का मंच से विरोध करने वाले विधायक राजेश गौतम का सोमवार को तहसील परिसर में अधिवक्ताओं ने भव्य सम्मान किया। इस दौरान अधिवक्ता भुवनेश्वरी दत्त त्रिपाठी, के.के. तिवारी, दिवाकर सिंह, विजय शंकर पांडे सहित अनेक लोगों ने विधायक के साहसिक कदम की सराहना की। विधायक ने कहा कि हम दलित, पिछड़े या अगड़े होने से पहले हिंदू हैं, सनातन धर्म हमारी पहचान है। हमारे धर्म और साधु-संतों का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समारोह में अधिवक्ता, नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष विजय भान सिंह मुन्ना व अन्य गणमान्य मौजूद रहे।
आरोपित शिक्षक को बचाने की पेशबंदी शुरू, पक्ष में प्रदर्शन
आरोपित शिक्षक श्यामलाल निषाद पर केस दर्ज होने के बाद एक वर्ग विशेष के लोगों ने पेशबंदी शुरू कर दी है। शिक्षक की संस्था मोस्ट कल्याण संस्थान सुलतानपुर के जिला संयोजक राकेश निषाद के नेतृत्व में दर्जनों लोगों ने सोमवार को प्रदर्शन करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट प्रीति जैन को ज्ञापन सौंपा है। आरोप है कि कादीपुर के भाजपा विधायक राजेश गौतम ने पद का दुरुपयोग कर शिक्षक श्यामलाल निषाद पर मुकदमा दर्ज कराया है।
बीते दो अक्टूबर को सम्राट अशोक के बौद्ध धम्म विजय कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में श्यामलाल निषाद ने समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण शिक्षा जागरूकता की अलख जगाई थी। साथ ही साधु संत के वेश में आरक्षण का विरोध, संवैधानिक व्यवस्था के विरोध, बाबा साहब पर अभद्र टिप्पणी करने वाले व बच्चियों का यौन शोषण करने वालों से सावधान रहने की अपील की थी।
लेकिन कादीपुर विधायक ने माइक छीन उन्हें अपमानित करने के साथ धार्मिक भावनाओं को भड़काकर राजनीतिक लाभ लेने के लिए मुकदमा दर्ज कराया गया है। वहीं, संस्था के निदेशक शिक्षक श्यामलाल निषाद ने कहा कि भाजपा विधायक द्वारा पद का दुरुपयोग करते हुए किया गया मूल अधिकार पर हमला। हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति या दल के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज में शिक्षा जागरूकता, समानता और सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए है।
