कानपुर में गृहकर पर पक्ष-विपक्ष आये साथ ... बिलों की आपत्तियों को दूर करने को बनेगी कमेटी, सदन में हंगामा

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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कानपुर, अमृत विचार। मनमाने गृहकर और बढ़े हुए ब्याज के विरोध में एकजुट हुए पक्ष-विपक्ष के पार्षदों को बुधवार को हुई सदन की बैठक में भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी का भी साथ मिल गया। पहली बार बैठक में शामिल हुए मैथानी ने कहा कि कानून और लोकतंत्र की अवहेलना कर लगाए गए गृहकर से शहर की जनता प्रताड़ित है। पीछे की तारीख से ब्याज सहित वसूली करना अन्याय है। यह तानाशाही नहीं चलेगी। उन्होंने अनियमितताओं का हवाला दिया तो महापौर ने भी कहा कि जिनका 2024-25 तक गृहकर जमा है उनसे ब्याज सहित बढ़ा गृहकर नहीं लिया जाए। उन्होंने नगर आयुक्त सुधीर कुमार से ऐसे बिल जिनका संशोधन किया गया उसकी सूची तलब की। इसके साथ ही कमेटी बनाकर बिलों में मिल रहीं अनियमितताओं को दूर करने के आदेश दिए।

पूर्व में स्थगित सदन को महापौर ने बुधवार को बुलाया था। सदन की शुरुआत में जीएसटी रिफॉर्म को लेकर सदन में सर्वसम्मति से पीएम मोदी को धन्यवाद प्रस्ताव पास किया गया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा विकसित 2047 उप्र. के प्रस्ताव को पेश किया गया। सदन की बैठक में पहुंचे विधायक सुरेंद्र मैथानी सबसे पहले बोलना शुरू किया। उन्होंने शास्त्री नगर लेबर कॉलोनी की समस्याओं का मुद्दा उठाया, और कहा कि नगर निगम को लेबर कॉलोनियों की बेहतरी के लिए और प्रयास करने चाहिए। इसके बाद उन्होंने कहा कि गृहकर का मुद्दा गंभीर है। कर निर्धारण करना और उसको लगाना सिर्फ सदन का अधिकारी है। 

नगर आयुक्त, प्रशासन को इसकी अनुमति नगर निगम अधिनियम नहीं देता है। जनता इस अन्याय को और सहन करने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने कहा कि पीछे की तारीख से ब्याज सहित वसूली करना गलत है। यह प्रकृति के सिद्धांत में नहीं है। कहा कि जनता से वर्तमान तिथि से गृहकर बढ़ा हुआ लिया जाए। पीछे की तारीख से ब्याज सहित वसूली अनुचित है। 

मैथानी ने कहा कि यदि जनता को पता होता कि आप कर बढ़ाएंगे तो वह अपने घरों का निर्माण ही क्यों करती, उनकी क्षमता में होता तो घर बड़ा बनाते नहीं तो दो कमरें में ही गुजारा करते। मैथानी ने कहा कि वर्तमान में सम्पत्ति पर अतिरिक्त नामांतरण शुल्क लिया जा रहा है। यह शुल्क जबरन जनता पर आर्थिक बोझ है। राज्य सरकार द्वारा लगाए गए नियम का पालन किया जाए। इसपर महापौर प्रमिला पांडेय ने कहा कि 1 फीसदी शुल्क का मामला कोर्ट में है। हम कमेटी बनाकर अगली कार्यकारिणी की बैठक में इसे समाप्त करेंगे। 

शुल्क नहीं बढ़ा सिर्फ एआरवी ठीक हुआ – नगर आयुक्त

नगर आयुक्त ने विधायक मैथानी और महापौर प्रमिला पांडेय को बताया कि आखिरी बार 2016 में शुल्क बढ़ा था। इसके बाद टैक्स रेट रिवाइज नहीं हुआ। जीआईएस सर्वे के बाद सिर्फ वार्षिक किराया मूल्यांकन (एआरवी) ठीक हुआ है। जिसकी वजह से शुल्क बढ़ा हुआ आया है। आवासीय और व्यवसायिक भवनों के आधार पर नया बिल जेनरेट हुआ। उन्होंने कहा कि यह कार्य तकनीक से हुआ जिसमें विसंगतियां मिली हैं। जिसे हम कैंप के माध्यम से लगातार ठीक करा रहे हैं। नगर आयुक्त ने बताया कि उप्र. शासन के अनुसार 2022 से रिवाइज एआरवी लागू करने का प्रावधान है। इसपर महापौर ने कहा कि व्यापारियों का कहना है कि जब 2024-25 तक शुल्क जमा है तो नए बिल में पुराना बकाया व ब्याज क्यों दिया जा रहा है। महापौर ने इसे खत्म करने की बात कही।

10 वर्ष से रंगाई-पुताई नहीं, टैक्स बढ़ गया 

कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद हाजी सुहेल अहमद ने कहा कि जीआईएस सर्वे के बाद 4.5 लाख गृहकरदाता परेशान हैं। उन्होंने कहा कि मई 2023 में पार्षदों को चुनाव हुआ। उसमें सभी ने नोड्यूज दिया। इसके बाद नगर निगम कह रहा वार्डों में 2022 से गृहकर नहीं जमा। यह कैसे संभव है। इस आधार पर तो हमारा चुनाव निरस्त हो जाना चाहिए। कहा कि बड़े डिमांड बिल तत्काल निरस्त किया जाए। भाजपा पार्षद दल के नेता ने कहा कि श्रमिक कॉलोनियों और बस्तियों पर भी टैक्स लगा दिया। जीआईएस सर्वे के नाम पर प्राइवेट कर्मचारियों ने जनता से लूट की। बिल कम लगाने के नाम पर उगाही की गई। जिस घर में 10 वर्ष से रंगाई-पुताई नहीं हुई वहां भी टैक्स बढ़ गया। उन्होंने बिलों की जांच की मांग की। 

यह बिल ‘जबरा मारे और रोने न दे’ जैसा

पार्षद आकर्ष बाजपेई ने कहा कि गृहकर बिलों में लगा एआरवी किस पैरामीटर से लगाया गया हम लोगों को बताया जाए। पार्षद रजत कौशिक बाजपेई ने गलत बिलों की प्रतियां सदन में दिखाईं, और जवाब मांगा। वरिष्ठ पार्षद यशपाल सिंह ने कहा कि 2016 से टैक्स बढ़ा रहे यह बिल वही कहावत जैसा है कि जबरा मारे और रोने न दे। आप गुंडई से टैक्स नहीं वसूल सकते। धीरेंद्र त्रिपाठी धीरू ने कहा लोकतंत्र है शहर की जनता की समस्या का निस्तारण होना चाहिए।

बजट नहीं हो सका पास, खामियों पर होगी बैठक

वित्तीय वर्ष 2025-26 के नगर निगम व जलकल के बजट पर बुधवार को भी चर्चा नहीं हुई और न ही बजट पास हो सका। महापौर प्रमिला पांडेय ने बताया कि बजट में कुछ खामियां सामने आईं हैं इसको लेकर मुख्य लेखाधिकारी और अधिकारियों के साथ बैठक होगी इसके बाद सदन बुलाकर बजट पास किया जाएगा। नगर निगम ने इस वर्ष 28.35 अरब का बजट पेश किया है। इसको 23 सितंबर को सदन के पटल पर रखा गया, लेकिन अभी चर्चा नहीं हो सकी है। इसी तरह जलकल ने नये वित्तीय वर्ष में 4.32 अरब रुपये प्रस्तावित किए हैं, यह बजट अभी सदन में रखा नहीं गया है।

कई दूसरे नगर निगमों में भी यह समस्या है। हम जनता के लिए हैं अधिकारियों के लिए नहीं हैं। नगर आयुक्त अपने अधिकारियों को संभालें। मैंने कमेटी बनाने के आदेश दिए हैं। इसमें अधिकारियों के साथ हमारे पार्षद भी होंगे। नगर आयुक्त से कहा है कि 2022 से अनियमितता वाले बिलों के सुधार की पूरी सूची मांगी है। कुछ फाइलों में ही हकीकत सामने दिख जाएगी। जिन लोगों ने बिलों का पैसा दे दिया है उनसे पुराना बढ़ाकर व ब्याज नहीं लिया जाएगा। - प्रमिला पांडेय, महापौर कानपुर नगर निगम

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