एनेस्थीसियोलॉजिस्ट केवल ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं : डॉ. प्रेमराज
लखनऊ, अमृत विचार : विश्व एनेस्थीसिया दिवस (World Anaesthesia Day) हर वर्ष 16 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1846 में डब्ल्यू. टी. जी. मॉर्टन ने पहली बार सर्जरी में ईथर एनेस्थीसिया का इस्तेमाल किया, जिसने आधुनिक शल्य चिकित्सा में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया। एनेस्थीसियोलॉजिस्ट केवल ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हर आपात स्थिति में जीवन बचाने वाले मौन नायक हैं। AI जैसी आधुनिक तकनीकें इस सेवा को और अधिक सक्षम एवं सुरक्षित बना रही हैं। यह कहना है केजीएमयू के ट्रमा प्रभारी और इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स (आईएसए) के सचिव डॉ. प्रेम राज सिंह का। वह विश्व एनेस्थीसिया दिवस पर गोमती नगर स्थित एक निजी होटल में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. प्रेम राज सिंह कहा कि AI से मरीजों की निगरानी पहले के मुकाबले बेहतर हुई है, साथ ही दवा की खुराक का निर्धारण भी आसान हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 के विश्व एनेस्थीसिया दिवस का विषय “स्वास्थ्य देखभाल आपात स्थितियों में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट” है। उन्होंने कहा कि एनेस्थिसियोलॉजिस्ट की बहुमुखी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इमरजेंसी के समय हर प्रकार की परिस्थिति में वह काम करने को तैयार रहता है,आपदाओं के समय एनेस्थिसियोलॉजिस्ट केवल ओटी तक ही सीमित नहीं रहते बल्कि आपदा स्थल, आपातकालीन कक्ष और आईसीयू में भी सेवाएं प्रदान कर सकते हैं।
कार्यक्रम का समन्वय आईएसए लखनऊ के अध्यक्ष डॉ. एस.एस.नाथ और कोषाध्यक्ष डॉ. मनीष कुमार सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर लखनऊ के विभिन्न संस्थानों के 100 से अधिक प्रतिष्ठित एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स उपस्थित रहे।
इन्हें मिला पुरस्कार
कार्यक्रम में सर्वश्रेष्ठ पीजी पेपर प्रस्तुति करने के लिए डॉ. कौशल (केजीएमयू), डॉ. बिकाश कुमार नोइल (एरा मेडिकल कॉलेज) और डॉ. त्वरीता सिंह (एसजीपीजीआईएमएस) को गोल्डन लैरिंजोस्कोप पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया है। वहीं कर्नल आर. के. त्रिपाठी यंग अचीवर अवार्ड से डॉ. शेफाली गौतम (केजीएमयू) को सम्मानित किया गया, जबकि लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड डॉ. दिनेश सिंह (पूर्व प्रोफेसर, केजीएमयू) और डॉ. संजय कुमार दोहरे (वरिष्ठ परामर्शदाता, विरांगना अवंतिबाई महिला अस्पताल, लखनऊ) को प्रदान किए गए।
