Shocking: पूर्वी यूपी विकास की दौड़ में सबसे पीछे, लखनऊ विश्वविद्यालय के अध्ययन में हुआ खुलासा
19 विभिन्न मानकों पर पूर्वी यूपी के 28 जिलों का किया गया अध्ययन
लखनऊ, अमृत विचार: विकास के क्षेत्रीय असंतुलन से देश के कई हिस्सें प्रभावित हैं। आधारभूत संरचना का असमान वितरण इसका सबसे बड़ा कारण रहा है। जिसे दूर करने के वादे-इरादे के साथ कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन हालात बदलने का नाम नहीं ले रहे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस तथ्य को उजागर किया है कि उत्तर प्रदेश का पूर्वी हिस्सा आज भी मध्य उत्तर प्रदेश और पश्चिम उत्तर प्रदेश की तुलना में काफी पिछड़ा है। विश्वविद्यालय के डॉ. नागेंद्र कुमार मौर्य और प्रो. रोली मिश्रा ने अपने शोध में यह दावा किया है।
विश्वविद्यालय के दोनों शोधकर्ताओं ने 19 सामाजिक और आर्थिक संकेतकों जैसे कि आय, शिक्षा, कृषि, रोजगार, बुनियादी ढांचा के आधार पर 28 जिलों का समग्र विकास सूचकांक तैयार किया है। भारतीय अर्थशास्त्र एवं विकास पत्रिका में प्रकाशित एक ताजा शोध में यह सामने आया है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिले बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती और सिद्धार्थनगर आज भी राज्य के अति पिछड़े जिलों में गिने जाते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि बेहतर सड़कें, स्कूल, अस्पताल और बिजली की पहुंच जीवन स्तर उठाने की कुंजी हैं।
व्रोकला टैक्सोनोमिक विधि का किया प्रयोग
अध्ययन में व्रोकला टैक्सोनोमिक विधि का इस्तेमाल कर हर जिले को विकास स्कोर दिया गया है। शोध में यह भी जांचा गया कि किन क्षेत्रों का समग्र विकास में सबसे ज्यादा योगदान है। शोध में पाया गया कि औद्योगिक विकास का असर सबसे कम है, क्योंकि क्षेत्र में निवेश और कारखानों की भारी कमी है।
शोध अध्ययन की खास बातें
-श्रावस्ती, बलरामपुर और बहराइच अति पिछड़े ज़िले पाए गए।
-सिद्धार्थनगर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।
-सभी जिलों में बुनियादी ढांचागत विकास और औद्योगिक विकास बेहद कमजोर है।
-कृषि और रोजगार के स्कोर सबसे कम हैं।
-ग्रामीण अर्थव्यवस्था मानसून पर पूरी तरह निर्भर है।
क्या है उपाय
शोध का समाधानपरक निष्कर्ष है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योगों में बड़े सार्वजनिक निवेश की तत्काल जरूरत है, ताकि क्षेत्र को “निम्न-संतुलन जाल” से बाहर निकाला जा सके। “एक जिला एक उद्योग” जैसी योजनाओं का विस्तार किया जाए, ताकि हर जिला किसी उत्पादक क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल कर सके, रोजगार बढ़े और निवेश आकर्षित हो। बुनियादी ढांचे, कृषि और उद्योग में समन्वित व संतुलित विकास ही एकमात्र रास्ता है, जिससे पूर्वी उत्तर प्रदेश के पिछड़ेपन को दूर किया जा सकता है।
