पीलीभीत: ये कैसी धान खरीद! क्रय केंद्र से बैनर गायब, कमरे में रखा तराजू...लौटाए किसान 

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Edited By Amrit Vichar
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पीलीभीत, अमृत विचार। एक माह पूरा होने को है, और अब सरकारी धान खरीद में दिवाली बाद उछाल आया है। मंडी में भारी मात्रा में धान की आवक हो रही है। क्रय केंद्र के बाहर भी धान लदी ट्रैक्टर ट्रॉलियों की भरमार है। मगर, किसान की परेशानियां कम नहीं हो रही है। क्रय केंद्रों पर मनमानी हावी है। अभी एक दिन पहले ही इसकी हकीकत शासन स्तर से कराई गई औंचक चेकिंग में भी उजागर हो गई थी। इसके बाद भी हालात पूरी तरह से सुधर नहीं सके हैं। अभी भी कई क्रय केंद्रों पर हालात बद से बदतर बने हुए हैं।

तीन अक्टूबर से जनपद में 132 क्रय केंद्र स्थापित कर धान खरीद शुरू कराई गई। 22 दिन पूरे हो चुके हैं। इस अंतराल में कई बार विवाद और लापरवाही दोनों ही सामने आ चुके हैं। पूरनपुर में तो एक किसान नेता पर गोली भी चला दी गई थी, जिसमें राइस मिलर्स समेत दो लोग आरोपी बनाए गए। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने डीएम-एसपी से मुलाकात कर कई बिंदुओं को रखा। जिसमें पाारदर्शिता लाने के लिए कई बिंदुओं पर हामी भरी जाती रही और फिर नतीजा अभी भी धरातल पर नहीं दिख सका है। 

छह दिन बाद शुक्रवार से धान क्रय केंद्र दोबारा खोले गए। एक तरफ मंडियों में धान का अंबार लगा हुआ है। वहीं, ग्रामीण अंचल के क्रय केंद्रों की स्थिति बेहद बदतर बनी हुई है।  शनिवार दोपहर करीब 12 बजे के बाद तक गजरौलाकलां समिति में संचालित पीसीयू के धान क्रय केंद्र का हाल ही बेहाल दिखा। यहां पर डस्टर रखा हुआ था, जिससे ये प्रतीत हो रहा था कि ये धान क्रय केंद्र हैं। इसके अलावा कहीं कोई बैनर नहीं लगा था। भीतर जाकर देखा तो क्रय केंद्र के प्रभारी बैठे लिखापढ़ी कर रहे थे।

उनसे जब बैनर न लगा होने को लेकर पूछा गया तो उन्होंने बंदरों द्वारा फाड़ जाने की बात कह डाली। दूसरा बैनर भी एक रखा था, उसे भी नहीं लगाया गया था।  तराजू भी कमरे में ही रखे हुए थे। जैसे उन्हें पता है कि किसान धान लेकर आएगा ही नहीं।  फिर यह तर्क दे दिया गया कि कुछ समय बाद दीवार पर रंगाई पुताई करा दी जाएगी, उसी में क्रय केंद्र से जुड़ी जानकारी लिखवा देंगे। इधर, सराय सुंदरपुर गांव में भी क्रय केंद्र समिति परिसर में संचालित हो रहा था। 

यहां एक ट्रॉली का धान उतारकर सीधे बोरियों में भरा जा रहा था। डस्टर एक कोने में बाइकों के झुंड के बीच रखा हुआ था।  किसानों की लाइन एक कक्ष के बाहर लगी हुई थी, लेकिन वह धान की न होकर खाद से जुड़ी थी। धान को ट्रैक्टर ट्रॉली से उतारकर बोरियों में श्रमिक सीधे भर रहे थे। बोरियों पर भी कोई मुहर आदि न होने पर सवाल उठ रहे थे। कुछ श्रमिकों ने ये तर्क दे दिया कि बोरियां उल्टी हैं। खैर, क्रय केंद्र के प्रभारी की मौजूदगी को लेकर भी असमंजय  की स्थिति बनी रही। एक व्यक्ति ने खुद को केंद्र प्रभारी बताया। कुछ समय बाद दूसरे ने खाद बांट रहे दूसरे व्यक्ति को केंद्र प्रभारी बता दिया। हर कोई गोलमोल जवाब देकर साख बचाता दिखाई दिया।  यहां भी धान खरीद को लेकर औपचारिकता प्रतीत हुई।  मगर, जिम्मेदार इससे बेसुध रहे।

खरीदकर रखें कहां धान....गोदाम में भरी खाद 
गजरौला कलां में स्थित धान क्रय केंद्र के प्रभारी मेघनाथ सिंह का अपना तर्क था। उनका कहना था कि उन्हें धान खरीद के लिए एक गोदाम दिया गया है। परिसर में कुल तीन गोदाम हैं। दो में खाद भरी हुई है और धान खरीद वाले गोदाम में भी आधा खाद से भरा है।  ऐसे में धान कहां रखेंगे। किसानों के धान लेकर पहुंचने के बारे में सवाल किए तो उनका जवाब था कि कुछ खरीद की भी गई है। शनिवार को भी कुछ किसान आए तो थे, लेकिन उनसे ये कहकर वापस कर दिया है कि दो दिन बाद आएं। तब तक गोदाम से खाद भी कम हो जाएगी, तभी धान खरीद लिया जाएगा। ये भी बताया कि वह तो क्रय केंद्र को शिफ्ट करने के लिए भी पत्राचार बीते शुक्रवार को कर चुके हैं।

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