गजब : बेसिक शिक्षा विभाग में उल्टी गंगा, धनौली में निलंबित किया, बहाली में थमा दिया बरौली

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Edited By Amrit Vichar
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कंपोजिट विद्यालय बरौली में पहले से है प्रधानाध्यापक की तैनाती, पोर्टल में अपडेट नहीं है जिले के शिक्षकों का डाटा अयोध्या कार्यालय

अयोध्या, अमृत विचार। बेसिक शिक्षा विभाग में एक गजब मामला सामने आया है। लघु आरोपों में जिस प्रधानाध्यापक को जुलाई में निलंबित किया गया उसे अक्टूबर में बहाली के बाद दूसरे स्कूल में तैनाती दे दी गई। बेसिक शिक्षा विभाग में बह रही इस उल्टी गंगा का शिकार शिक्षक 14 दिन से परेशान है।

इतना ही नहीं तैनाती वहां दी जहां पहले से ही प्रधानाध्यापक कार्यरत हैं। अब ऐसे में बहाल प्रधानाध्यापक बेसिक शिक्षा विभाग से लेकर खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय का चक्कर काट रहा है। बड़ा सवाल यह है कि विभाग ने मानव संसाधन पोर्टल पर डाटा ही अपडेट नहीं किया है कि कहां तैनाती है कहां-कहां पद रिक्त हैं।

ब्लॉक मवई क्षेत्र के प्रधानाध्यापक वीरेंद्र कुमार को उच्च प्राथमिक विद्यालय धनौली में से 18 जुलाई को विभिन्न लापरवाही के मामले में निलम्बित किया गया था। चार माह तक बहाली के लिए विभाग में खेल होता रहा। बताया जाता है कि धनौली में एक शिक्षिका की लापरवाही मिली थी, लेकिन लखनऊ से आए फोन के बाद निलम्बन की गाज प्रधानाध्यापक वीरेंद्र कुमार पर गिरी।

बड़ी मशक्कत के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा 14 अक्टूबर को प्रधानाध्यापक को बहाल करते हुए कंपोजिट विद्यालय बरौली, मवई में पदस्थापित किया गया। आश्चर्यजनक रूप से आज तक उन्हें कार्यभार ग्रहण नहीं कराया गया। जबकि बहाल प्रधानाध्यापक ने विभागीय आदेश प्राप्त होते ही खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में उपस्थित होकर कार्यभार ग्रहण करने के लिए औपचारिक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था।

विभागीय स्तर पर अनदेखी व उदासीनता के कारण उन्हें आज तक विद्यालय में कार्यभार ग्रहण नहीं कराया गया। गंभीर बात यह है कि जिस विद्यालय में उन्हें पदस्थापित किया गया है, वहां पहले से एक अन्य प्रधानाध्यापक कार्यरत हैं। इस स्थिति में आदेश जारी होने के बावजूद द्वैध कार्यभार की स्थिति बन गई है।

इसे लेकर विभाग से जानकारी की गई तो बताया गया सब मानव संसाधन पोर्टल से होता है, अब सवाल ये है कि पोर्टल पर डाटा अपडेट होता तो तैनाती वाले स्कूल में कैसे पद स्थापित किया जाता। प्रधानाध्यापक का कहना है कि मुझे बहाल कर दिया गया, जब कार्यभार ही ग्रहण नहीं कराया जा रहा तो यह कैसी न्यायिक बहाली है। बताया जाता है कि वसूली के चक्कर में सारा खेल खेला जा रहा है।
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यदि कोई अधिकारी निलंबन या दंड के मामले में त्वरित कार्रवाई कर सकता है तो बहाली के बाद उसी गति से कार्यभार क्यों नहीं दिलाया जा सकता? क्या यह मानवीय और प्रशासनिक न्याय के विरुद्ध नहीं है। यदि शीघ्र ही बहाली नहीं की गई तो बीएसए कार्यालय पर धरना होगा।
डॉ संजय सिंह , जिला अध्यक्ष, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ

पोर्टल में तकनीकी खराबी आने की वजह से तैनाती नहीं मिल पाई है। कहां से तकनीकी खराबी है इसे पता लगाया जा रहा है। जल्द ही वीरेंद्र कुमार को नवीन तैनाती दे दी जाएगी... रमाकांत राम, खंड शिक्षा अधिकारी, मवई।

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