देश में लगभग 38 फीसदी वयस्क फैटी लिवर से प्रभावित... पीजीआई में जल्द खुलेगा फैटी लिवर और मोटापा क्लीनिक

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
On

लखनऊ/पीजीआई, अमृत विचार: संजय गांधी पीजीआई संस्थान अब फैटी लिवर और मोटापे से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीद बनने जा रहा है। संस्थान के हेपेटोलॉजी विभाग में जल्द ही फैटी लिवर और मोटापा क्लीनिक की शुरुआत होगी। विभागाध्यक्ष प्रो. अमित गोयल ने इसकी घोषणा संस्थान में आयोजित हुए दो दिवसीय सम्मेलन करेंट पर्सपेक्टिव्स इन लिवर डिजीज (सीपीएलडी-2025) में की। उन्होंने बताया कि यह क्लीनिक नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) और मोटापे से ग्रस्त रोगियों को एक ही स्थान पर जांच, परामर्श और उपचार की सुविधा देगा।
सम्मेलन में देशभर के प्रमुख हेपेटोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेषज्ञों ने शिरकत की। इनमें पीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमन, गैस्ट्रो विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश अग्रवाल, आईएलबीएस दिल्ली के प्रो. अनूप सराया, पीजीआई चंडीगढ़ के प्रो. अजय दुसेजा और केआईएमएस भुवनेश्वर के प्रो. एसी आनंद शामिल रहे। विशेषज्ञों ने उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे एनएएफएलडी के मामलों को चिंता का विषय बताया। एनएचएम की एनएएफएलडी प्रभारी डॉ. अलका शर्मा ने बताया कि राज्य में रोग की रोकथाम के लिए सर्वे और प्रशिक्षण कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में लगभग 38 फीसदी वयस्क आबादी फैटी लिवर से प्रभावित है। यह बीमारी अधिकतर गलत खानपान, मोटापे और शारीरिक निष्क्रियता के कारण बढ़ रही है।

फैटी लीवर होता है साइलेंट डिजीज

फैटी लिवर को साइलेंट डिजीज कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण नहीं दिखते। समय पर इलाज न मिलने पर यह फाइब्रोसिस और सिरोसिस में बदलकर लीवर फेलियर या कैंसर का रूप ले सकता है। सम्मेलन में करीब 400 प्रतिनिधि शामिल हुए। विशेषज्ञों ने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित भोजन और नियमित व्यायाम इस बीमारी से बचाव की सबसे कारगर ढाल हैं। पीजीआई की यह पहल प्रदेश में जनस्वास्थ्य सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

 

संबंधित समाचार