Bareilly : जरी-जरदोजी और बांस उत्पादों को नहीं मिली आत्मनिर्भर मंच पर जगह

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। हजारों युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बरेली के बांस के उत्पाद और जरी जरदोजी राज्य सरकार की कसौटी पर खरे नहीं उतर पाए। यही वजह है कि एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) में शामिल होने के बाद भी बांस के उत्पाद और जरी जरदोजी को राज्य सरकार के आत्मनिर्भर मंच पर जगह नहीं मिल सकी।

हाल ही में राज्य सरकार की ओर से वैश्विक बाजार में ''आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश'' की सशक्त दस्तक के नाम से ओडीओपी रत्नों को लेकर विज्ञापन निकलवाया गया था। उसमें पीलीभीत की बांसुरी शामिल की गई, लेकिन बरेली के दोनों उत्पादों में से एक भी स्थान नहीं मिल सका। इस विज्ञापन में जिन जिलों के उत्पादों को शामिल किया गया, वे जिले वैश्विक बाजार में छा गए हैं। उसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से नए भारत के नए उत्तर प्रदेश में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के माध्यम से प्रदेश के स्थानीय एवं पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान प्राप्त होने का संदेश लिखा है।

विज्ञापन में पीलीभीत, मुरादाबाद सहित 32 जिलों के ओडीओपी में शामिल उत्पादों के नाम और उनकी खूबियां फोटो सहित दर्शायी गयी हैं। सरकार के महत्वपूर्ण मंच पर बरेली के दोनों उत्पादों को जगह नहीं मिलने से उन कारीगरों को झटका लगा है, जो कई सालों से बांस के विभिन्न उत्पाद, जरी जरदोजी का कार्य कर आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में सहयोग कर रहे हैं। इधर, जरी कारोबारी लईक का कहना है कि सरकार के आत्मनिर्भर मंच पर जरी जरदोजी को भी जगह मिलनी चाहिए। जरी ने लाखों लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया है। इस ओर राज्य सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। वहीं, फर्नीचर से जुड़े कई कारोबारियों ने कहा, बांस के उत्पाद को आत्मनिर्भर मंच पर जगह मिलनी चाहिए, इससे वैश्विक बाजार में बरेली के ओडीओपी उत्पादों को नया नाम मिलता।

जरी-जरदोजी से जुड़े हैं दो लाख से ज्यादा लोग
जरी जरदोजी का इतिहास देश को आजादी मिलने से भी पहले का है। जरी का काम मुख्यतः तीन प्रकार के धागों से किया जाता है। इसमें सोना, चांदी और रेशम शामिल है। जनपद में जरी-जरदोजी के काम में हजारों छोटी इकाइयां जुड़ी हैं। बरेली में करीब 2 लाख लोग इस कार्य से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। जरी-जरदोज़ी से सुसज्जित बहुत से सामान में वस्त्र, हैंड बैग्स, जाॅकेट्स, साड़ियां, लहंगे इत्यादि उपलब्ध हैं। वहीं, यहां पर बांस की काफी बड़ी मंडी होने के कारण बरेली की बांस बरेली के नाम से भी पहचान है। बांस से बने फर्नीचर भी उपलब्ध हैं जो बाहरी राज्यों तक पहुंचते हैं। सैकड़ों कारोबारी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हुए हैं।

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