लखीमपुर खीरी: बसारा गौशाला में भूख-प्यास से तड़प रहे गौवंश, वायरल वीडियो ने मचाया हड़कंप

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Edited By Amrit Vichar
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बेहजम, अमृत विचार। विकासखंड बेहजम क्षेत्र के ग्राम पंचायत बसारा स्थित गौ आश्रय केंद्र में लापरवाही और बदइंतजामी के हालात चरम पर हैं। मंगलवार को गौशाला में कई गौवंश मृत पाए गए, जबकि बाकी पशु भूख और प्यास से तड़पते दिखे। मृत पशुओं के बीच बाकी बचे जानवरों की हालत भी बेहद दयनीय बताई जा रही है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।
 
ग्राम पंचायत बसारा स्थित गौशाला में जो दृश्य देखने को मिला वह जिम्मेदारों की लापरवाही उजागर करता हैं। गौशाला में बेजुबान गायें भूख और प्यास से तड़प कर दम तोड़ रही हैं। मरी हुई गायों को कुत्ते नोच खा रहे हैं। अन्य जीवित पशु भी भूख प्यास से तड़प रहे हैं। गौशाला की स्थिति इतनी खराब है कि दुर्गन्द से सांस लेना मुश्किल है। गौशाला की दुर्दशा का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। अफसर अपनी नाकामी और लापरवाही को छुपाने के लिए तमाम हथकंडे अपना रहे हैं। वीडियो प्रसारित होते ही मृत पशुओं को आनन फानन में गौशाला से हटाया गया। गौशाला पहुंचे पशु चिकित्सा अधिकारी ने बीमार पशुओं का उपचार किया। 

पशु चिकित्सा अधिकारी अनिरुद्ध कुमार ने बताया गौशाला में 361 पशुओं की संख्या दर्ज है। समय-समय पर टीम व स्वयं जाकर पशुओं के उपचार करते रहते हैं, जब पशुओं को भरपेट चारा पानी मिलेगा तभी वह स्वस्थ होंगे। वहीं सूत्र बताते हैं कि गौशाला में वर्तमान समय में करीब दो सौ गौवंश ही मौजूद हैं, जबकि सरकारी अभिलेखों में 361 पशुओं की संख्या अंकित है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिरकार अन्य गोवंश कहां चले गए। उन्हें धरती खा गई या फिर आसमान निगल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद न तो चारा-पानी की व्यवस्था सुधारी जा रही है, न ही मृत पशुओं को समय से हटाया जाता है। गांव के एक बुजुर्ग ने कहा कि अगर यही हाल रहा तो जल्द ही पूरा गौ आश्रय श्मशान बन जाएगा।

एनजीओ की देखरेख में चल रही गौशाला 
ग्राम पंचायत अधिकारी अमीर चंद राणा ने बताया कि पशुओं का समय से उपचार हो जाए तो मौत की संख्या कम हो सकती है, लेकिन गौशाला में पशुओं को सही उपचार नहीं हो पा रहा है, जिस कारण गौशाला में पशुओं के मरने की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। करीब चार-पांच दिन से गौशाला नहीं पहुंच पाया हूं। कितने गोवंश पशु वहां पर दर्ज हैं और कितने मौजूद हैं कितने की मौत हुई है यह बताने में असमर्थ हूं। ग्राम प्रधान ने गौशाला चलाने में असमर्थता जाहिर की थी। इस पर सीडीओ ने एनजीओ के माध्यम गौशाला चलाने के निर्देश दिए थे। 27 अक्टूबर से गो पर्यावरण संरक्षण नामक संस्था गोशाला का संचालन कर रही है। 

ग्राम प्रधान किरण देवी वर्मा ने बताया कि गौशाला से उनका कोई लेना-देना नहीं है। हमने अधिकारियों को लिखकर दे दिया है। सरकार की मंशा के अनुरूप गौशाला संचालन में ग्राम पंचायत अधिकारी का सहयोग नहीं मिल पा रहा था। इसलिए मुझे  विभागीय अधिकारियों को लिखकर देना पड़ा था कि ग्राम पंचायत गोशाला का संचालन करने में असमर्थ हैं।

एडीओ पंचायत शिवाशीष श्रीवास्तव ने बताया कि बसारा गो सेवा केंद्र ग्राम पंचायत को आवंटित है, जिसकी जिम्मेदार ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी की है, यह किसके माध्यम व्यवस्था को संचालित करवाते हैं, यह वही बता सकते हैं। हम कई दिनों से गोसेवा केंद्र नहीं पहुंच सके हैं। स्थित की जानकारी कर उच्च अधिकारियों को सूचित करेंगे। 

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