लखनऊ : लविवि में बूस्ट पुरस्कारों की घोषणा, शिक्षक और शोधार्थी होंगे सम्मानित

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Edited By Amrit Vichar
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कार्यालय संवाददाता, लखनऊ, अमृत विचार : लखनऊ विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2023-24 के लिए अपनी महत्वाकांक्षी योजना बूस्ट (बिल्डिंग अपार्चुनिटी फार आउटस्टेंडिंग स्कॉल्ररशिप एंड टीचिंग) के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कारों की घोषणा की गई है। इसके अंर्तगत उत्कृष्ट शोधार्थियों और शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। उद्दीपन, प्रोत्साहन और एक्लेम श्रेणियों में कुल सौ से अधिक शिक्षकों और शोधार्थियों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित होंगे।

उद्दीपन पुरस्कार 2023-24

इस वर्ष 50 वरिष्ठ शिक्षकों को उद्दीपन पुरस्कार के लिए चुना गया है। इन सभी ने अपने-अपने क्षेत्रों में अनुसंधान और शिक्षण के माध्यम से विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया है। शोधार्थियों की श्रेणी में भी 60 नामों को उद्दीपन पुरस्कार से नवाज़ा जाएगा। जिन्होंने विज्ञान, शिक्षा और सामाजिक अध्ययन के क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता का कार्य प्रस्तुत किया है। उद्दीपन पुरस्कार में विजेताओं को 1100 रुपये एवं प्रमाण पत्र दिए जाते हैं।

प्रोत्साहन पुरस्कार 2023-24

प्रोत्साहन पुरस्कार के अंतर्गत उन शिक्षकों को चुना गया है जो नवाचारपरक अनुसंधान परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। प्रोत्साहन पुरस्कार में विजेता को 20 हजार रुपये की धनराशि शोध कार्यों के लिए मिलती है। इसके अंतर्गत सात फैकल्टी सदस्यों को चुना गया है, जिनमें बॉटनी विभाग के डॉ. अजय सिंह, डॉ. आशा, डॉ. नेहा साहू और डॉ. सुषमा मिश्रा शामिल हैं। इनके शोध कार्यों में नैनोपार्टिकल्स के माध्यम से मिट्टी की गुणवत्ता सुधार, औषधीय पौधों की जैव सक्रियता का मूल्यांकन, और फ्लावोनॉइड्स की संवर्धन जैसी विषयवस्तुएं शामिल हैं। केमिस्ट्री विभाग से डॉ. भरत कुमार और डॉ. रमेश चंद्रा को ऊर्जा भंडारण और जल शोधन पर आधारित परियोजनाओं के लिए चुना गया है, जबकि जूलॉजी विभाग की डॉ. निधि मिश्रा को वायु प्रदूषण के जैव प्रभावों पर उनके अध्ययन के लिए सम्मानित किया जाएगा।

अक्लेम पुरस्कार 2023-24

अक्लेम पुरस्कार के अंतर्गत इस वर्ष डॉ. फाज़िल अहसन हाशमी (उर्दू विभाग) को उनके साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया है। उन्हें पश्चिम बंगाल उर्दू अकादमी द्वारा “शाह मकबूल अहमद अवॉर्ड” से नवाज़ा गया था, जो उनकी पुस्तक ‘केतु विश्वनाथ रेड्डी की कहानियां’ पर आधारित है। इसमे 5 हजार रुपए नगद ओर प्रशंसा पत्र व सम्मान प्रमाणपत्र दिया जाएगा।

यह पहल विश्वविद्यालय की उस प्रतिबद्धता का हिस्सा है जो शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार को उच्च स्तर तक ले जाने के लिए की जा रही है। पुरस्कार केवल सम्मान नहीं हैं, बल्कि यह हमारे शिक्षकों और शोधार्थियों की अकादमिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहन देने का माध्यम हैं।
प्रो. मनुका खन्ना, कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय

 

 

 

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