पीलीभीत: सुगबुगाहट पर आढ़तियों ने खींचे थे हाथ, फिर भी फंसे 75 लाख, किसानों से हुई ठगी पर जांच कराने की मांग
पीलीभीत, अमृत विचार। किसानों से ली गई फसल की कीमत चुकाए बिना करोड़ों की धोखाधड़ी कर आढ़ती के परिवार समेत भागने के मामले में शिकायत के बाद जांच चल रही है, लेकिन घटनाक्रम के पीछे दबे रहस्य अभी खुल नहीं सके हैं। उसकी आढ़त का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। मगर, ये सब किस तरह से और किसकी मदद से किया गया। इस बारे में अभी कोई जवाब नहीं मिल सका है। ठगी गई रकम को लेकर भी कोई पुष्ट आंकड़ा सामने नहीं है। इतना जरूर, मामला उजागर होने के बाद अब आढ़ती संघ ने प्रेसवार्ता कर कई बिंदुओं पर तस्वीर साफ की है। इस कृत्य की निंदा करते हुए जिला प्रशासन से टीम गठित कर जांच कराने की मांग की है।
बता दें कि भारतीय किसान यूनियन टिकैत के पदाधिकारियों संग पहुंचे किसानों ने डीएम ज्ञानेंद्र सिंह से शिकायत की थी। जिसमें मंडी समिति पीलीभीत के करोड़ों की धोखाधड़ी कर आढ़ती प्रियांशु अग्रवाल के परिवार समेत भागने का मामला उजागर हो सका था। आरोपी ने किसानों से धान एवं गेहूं की खरीद की और उसकी रकम हड़प ली। पंद्रह दिन बाद रुपये देने का वायदा किया और टालमटोल चलती रही। बाद में अधिक मुनाफे का लालच देकर रोके रखा और अचानक परिवार समेत भाग गया। शिकायत के बाद प्रशासन जांच करा रहा हैं। इधर, मंडी सचिव प्रवीण कुमार अवस्थी की ओर से मंडी सहायक जहीर अहमद से मिली आंख्या के आधार पर एक्शन लिया। संबंधित आढ़त का लाइसेंस निलंबित कर दिया था। आढ़ती द्वारा दस करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी करने का शोर मचा है। वहीं, जिम्मेदारों की जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। खास बात है कि अधिकांश लोगों को आढ़ती प्रियांशु अग्रवाल के भागने को लेकर पहले से भनक लग रही थी लेकिन इस तरह से अचानक भागेगा, इसका आभास किसी को नहीं था। खाद्यान्न आढ़ती कल्याण समिति की ओर से प्रकरण को लेकर गुरुवार को अध्यक्ष रवि शंकर गंगवार की आढ़त पर प्रेस वार्ता आयोजित की गई। जिसमें कई वरिष्ठ आढ़ती भी शामिल हुए। इस प्रकरण की निंदा करते हुए जिला प्रशासन से टीम गठित कर जांच कराने की मांग की गई। ये भी बताया कि संबंधित आढ़ती प्रियांशु अग्रवाल की फर्म भी 50 साल से अधिक पुरानी व ब्रांडेड में शुमार रही थी। उनके दादा, पिता-चाचा आदि काम करते आ रहे थे। बताया कि जब सितंबर माह में कुछ गड़बड़ी से जुड़ी चर्चाएं संज्ञान में आई थीं, तो समिति की बैठक की गई थी और प्रियांशु अग्रवाल की आढ़त पर क्रय पर पाबंदी भी लगा दी थी। सिर्फ खुला विक्रय चल रहा था, जोकि सीधे किसान से था। इस मौके पर आढ़ती संघ के संरक्षक अशोक अग्रवाल, महामंत्री उमेश गंगवार, प्रकाशवीर, विजयपाल, रमेश, मोहित अग्रवाल, त्रिभुवन, शुभम अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
अध्यक्ष बोले: आढ़ती किसान के हितैषी थे हैं और रहेंगे
खाद्यान्न आढ़ती कल्याण समिति संघ के अध्यक्ष रवि शंकर गंगवार ने कहा कि मंडी समिति में 100 से अधिक आढ़ती व्यापार कर रहे हैं। जिनमें अधिकांश 50 साल से अधिक समय पुराने हैं। ये घटना किन कारणों से हुई, ये जांच का विषय है। मगर, किसानों को लेकर मंडी की प्रक्रिया स्पष्ट की। बताया कि सुबह के वक्त मंडी की टीम की मौजूदगी में बोली लगाकर भाव खोला जाता है। इसके बाद मिलता जुलता दाम ही फसल का किसान को मिलता है। इसका आढ़ती की ओर से नकद भुगतान कर दिया जाता है, उधार सिस्टम नहीं है। कहा कि किसान माल लेकर आए और जहां पर बेचें उनसे नकद भुगतान लें। ये भी कहा कि एक की करनी से पूरे आढ़ती समाज को न जोड़ा जाए। आढ़ती किसान के हितैषी थे, हैं और आगे भी रहेंगे।
आढ़तियों के भी 75 लाख से अधिक, समिति कर चुकी निष्कासित
किसानों के साथ ही अन्य साथी आढ़तियों की भी भारी भरकम रकम आरोपी प्रियांशु अग्रवाल द्वारा धोखाधड़ी करने का शोर मचा हुआ था। इसे लेकर भी प्रेसवार्ता के दौरान खाद्यान्न आढ़ती कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट की। ये बताया कि करीब 75 लाख रुपये के आसपास की धोखाधड़ी के शिकार अन्य आढ़ती भी हुए हैं। अध्यक्ष ने ये भी कहा कि जिस तरह से पीड़ित किसानों ने अपनी शिकायत दर्ज कराई है। उसी तरह से पीड़ित आढ़ती भी आगे आकर प्रशासन से शिकायत करें। उनकी समिति द्वारा हरसंभव मदद की जाएगी। ये भी बताया कि 25 अक्टूबर को कुछ प्रमुख सदस्यों की बैठक हुई और फिर फर्म मैसर्स बालमुकुंद राममूर्ति लाल के स्वामी प्रियांशु अग्रवाल के द्वारा किए गए कृत्य की निंदा की गई। साथ ही सर्वसम्मति से संबंधित फर्म को समिति से निष्कासित भी उसी दिन कर दिया गया है।
