बरेली: उच्च शिक्षा में पोषण और स्वच्छता से जुड़े पाठ्यक्रम होंगे अनिवार्य
बरेली, अमृत विचार। नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रमों में काफी बदलाव किए जा रहे हैं। उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों में भी बदलाव किए जा रहे हैं। इसके तहत कुछ पाठ्यक्रमों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। इसके अलावा कुछ पाठ्यक्रमों को जरूरत के हिसाब से संचालित किया जाएगा। अनिवार्य पाठ्यक्रमों में नैतिक शिक्षा, …
बरेली, अमृत विचार। नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रमों में काफी बदलाव किए जा रहे हैं। उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों में भी बदलाव किए जा रहे हैं। इसके तहत कुछ पाठ्यक्रमों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। इसके अलावा कुछ पाठ्यक्रमों को जरूरत के हिसाब से संचालित किया जाएगा। अनिवार्य पाठ्यक्रमों में नैतिक शिक्षा, स्वास्थ्य व स्वच्छता होंगे।
शासन ने सभी विश्वविद्यालयों को इसको लेकर निर्देश जारी किए हैं। आदेश के तहत सभी संस्थानों में इस तरह के पाठ्यक्रम लागू करने होंगे। विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति के तहत कई पाठ्यक्रम संचालित करने की तैयारी भी कर चुका है, जिसमें आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस, शोध नीति, इन्क्यूबेशन सेंटर व अन्य के कुछ दिनों पहले कार्य परिषद की बैठक में कई प्रस्ताव भी पास हुए थे।
शासन की ओर से विश्वविद्यालयों को निर्देश जारी किए हैं कि अनिवार्य पाठ्यक्रम के तहत मूल्य परक शिक्षा यानी नैतिक शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता, कम्प्यूटर, डिजिटल जागरूकता, संचार कौशल और व्यक्तित्व विकास होंगे। इसके अलावा ऐच्छिक छोटे पाठ्यक्रमों में आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस, मीडिया अध्ययन, बिग डाटा एनालिसिस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, लिबरल क्रिएटिव ऑर्ट्स, जैव प्रौद्योगिकी, नैनो प्रौद्योगिकी, न्यूरो साइंस, थ्रीडी प्रिंटिंग, मशीन लर्निंग, सांख्यिकी, पर्यावरण शिक्षा, व्यावहारिक विज्ञान, पुरातत्व कलाकृति संरक्षण, भारतीय विद्या, लोक विद्या, अनुवाद और विवेचना, संग्रालय प्रशासन, ग्राफिक डिजाइन, वेब डिजाइन, भाषा संबंधी शिक्षा, सामुदायिक सेवा परियोजना, फार्मेसी, कैटरिंग आदि हैं।
इसके अलावा आदेश दिए हैं कि सभी संस्थानों को विद्यार्थियों को अपग्रेड करने के प्रयास करने होंगे। डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कम्पयूटर प्रशिक्षण के कार्यक्रमों को शामिल करना होगा। प्रत्येक संस्थान को प्रयास करना होगा कि वह किसी न किसी क्षेत्र में पीक ऑफ एक्सीलेंस बन सके। विश्वविद्यालयों को इसको लेकर महाविद्यालयों या संस्थानों में इस तरह के पाठ्यक्रमों की शुरुआत करने के लिए कार्य योजना तैयार करनी होगी। कार्यवाही की रिपोर्ट भी शासन को मासिक भेजनी होगी।
