कानपुर : हाईकोर्ट के आदेश पर शासन की टीम ने देखा हैलट का हाल

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Edited By Amrit Vichar
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जीएसवीएम में तैनात रही सिस्टर ने बाल रोग अस्पताल की उजागर की कुछ खामियां

कानपुर, अमृत विचार। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में तैनात रही एक सिस्टर का करीब छह माह पहले तबादला अन्य जिले हो गया, जिससे नाराज सिस्टर ने मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से की। इसके बाद हाईकोर्ट में मामले के संबंध में याचिका दायर की।

सिस्टर द्वारा दर्ज कराई गई इस याचिका को हाईकोर्ट ने संज्ञान में लेकर प्रदेश सरकार को जांच के आदेश दिए, इसपर सोमवार को शासन की तीन सदस्यीय टीम कॉलेज पहुंची और मामले के संबंध में बयान कलमबंद किए। 

हाईकोर्ट के आदेश पर सोमवार को शासन स्तरीय तीन सदस्यीय टीम जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज पहुंची, जिनमे डीजीएमई कार्यालय से अपर निदेशक डॉ. आलोक कुमार, जालौन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.अरविंद त्रिवेदी व कन्नौज मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीपी पाल शामिल हुए। टीम ने मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य प्रो.संजय काला और हैलट अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ.आरके सिंह के साथ बैठक की। इसके बाद टीम हैलट के बाल रोग अस्पताल पहुंची। 

टीम ने यहां इमरजेंसी पर भर्ती मरीजों व तीमारदारों से वार्ता की। टीम ने मुख्य रूप से पूछा कि अस्पताल में कैसा इलाज मिल रहा है, यहां पर दवाएं कौन देता, कोई डॉक्टर परेशान तो नहीं करता है और सिस्टरों व स्टाफ का व्यवहार मरीजों व तीमारदारों के प्रति कैसा है। इसपर तीमारदारों से संतोषजनक उत्तर दिया। वहीं, टीम के सदस्यों ने मौजूद जूनियर डॉक्टरों से चिकित्सा शिक्षा और व्यवहार आदि के संबंध में जानकारी ली। 

इसके बाद टीम ने सिस्टर रूम और कुछ सिस्टरों से वार्ता की। इसके बाद डॉक्टर रूम, वार्ड, दवा भंडारण कक्ष, एनआरसी वार्ड और थैलेसीमिया वार्ड देखा। साथ ही फोटोग्राफी भी की। इसके बाद वह हैलट इमरजेंसी गए। यहां बने रेड जोन में भर्ती मरीजों को दी जा रही सेवाओं की सराहना की। 

इस दौरान साथ में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो.संजय काला, हैलट अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. आरके सिंह, बाल रोग अस्पताल के सीएमएस डॉ.विनय कटियार, बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.शैलेंद्र गौतम, डॉ.अमितेश यादव समेत आदि डॉक्टर व स्टाफ मौजूद रहा। 

टीम के आने की ये बताई गई मुख्य वजह  

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में तैनात सिस्टर रिंकू सिंह का करीब छह माह पहले बांदा तबादला कर दिया गया था। तबादला गलत तरीके से किए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने हाईकोर्ट में बाल रोग अस्पताल की खामियों को उजागर किया। याचिका में कहा कि बाल रोग अस्तपाल में आने वाले बीमार बच्चों को सरकार की तरफ से दी जाने वाली सभी सुविधाएं नहीं मिलती हैं। 

इसके अलावा डॉक्टरों की ड्यूटी भी पैसे लेकर लगाई जाती हैं। वहीं, दवाएं भी बाहर से मंगाई जाती हैं। इसलिए शासन द्वारा गठित टीम ने सिस्टर की ओर से लगाए गए सभी आरोपों कर न सिर्फ गहनता से निरीक्षण किया, बल्कि संबंधित की फोटोग्राफी भी की।

हैलट में गूंजा प्रमुख सचिव के आने का शोर 
हैलट अस्पताल में सोमवार को शासन स्तरीय टीम थी, लेकिन किसी ने सुबह के समय स्टाफ नर्सों, सुरक्षा गार्डों और कर्मचारियों से प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के आने की हवा उड़ा दी। स्टाफ के व्हट्सएप ग्रुप पर भी प्रमुख सचिव के आने की ही सूचना प्रसारित की गई। 

इसकी वजह से ओपीडी से लेकर इमरजेंसी में विशेष सफाई की गई और कागजात दुरस्त रखें गए। स्ट्रेचर और व्हीलचेयर इमरजेंसी गेट पर तरीके से की गई और वार्डों में भी व्यवस्था दुरस्त रखने के निर्देश दिए गए। लेकिन जैसे ही दोपहर में प्रमुख सचिव के नहीं, बल्कि शासन के टीम के आने की जानकारी हुई तो स्टाफ व कर्मचारियों ने चैन की सांस ली।

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