संभल: कुकर्म के बाद बच्चे की हत्या में दो को आजीवन कारावास
कोर्ट ने चार अलग-अलग धाराओं में सुनाई सजा, 6 साल पहले हयातनगर थाना क्षेत्र के गांव में हुई थी घटना
संभल/चंदौसी, अमृत विचार। संभल जनपद के हयातनगर थाना क्षेत्र में 6 साल पहले आठ साल के बच्चे के साथ कुकर्म के बाद उसकी बेरहमी से हत्या कर देने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ने दोनों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा व अर्थदंड से दंडित किया है। कोर्ट ने चार अलग-अलग धाराओं में सजा और जुर्माना लगाया है।
संभल के थाना हयातनगर क्षेत्र के गांव 6 दिसंबर 2019 को ठेले पर पकौड़ी लेने गया 8 साल का बच्चा लापता हो गया था और फिर उसकी लाश 10 दिसंबर को गांव के बाहर आम के बाग में पड़ी मिली थी। बच्चे की गला काटकर बेरहमी से हत्या की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्चे से कुकर्म की बात सामने आई थी। पुलिस को गांव के ही गोकुल ने बताया कि उसने बच्चे को पकौड़ी की दुकान से दानिश के साथ जाते देखा था। दानिश का नाम सामने आया तो बच्चे के पिता ने पुलिस को बताया कि कुछ दिन पहले उसका दानिश से झगड़ा हुआ था तो उसने देख लेने की धमकी दी थी। पिता ने दानिश पर बेटी की हत्या करने का शक जाहिर किया।
इस बीच गांव के ही एक अन्य युवक ने पुलिस को बताया कि बाबू उसे बुलाकर ले गया था और 6 दिसंबर की रात उसने, बाबू व दानिश के साथ ब्लू फिल्म मोबाइल पर देखी थी। उस समय बच्चा भी उनके साथ था। इस जानकारी के बाद पुलिस ने दानिश व बाबू को गिरफ्तार किया तो मासूम की हत्या का खुलासा हुआ। बाबू के पास से हत्या में प्रयुक्त चाकू भी मिला था। पुलिस को बाबू व दानिश ने बताया था कि ब्लू फिल्म देखने के बाद वह मासूम को अपने साथ लेकर जंगल में आम के बाग पर पहुंचे थे। वहां दानिश ने मासूम के साथ कुकर्म किया। बच्चा चिल्लाया तो बाबू ने उसका मुंह दबा लिया। बच्चे ने कहा कि घर जाकर बताऊंगा,तो दानिश ने उसका गला दबा दिया जबकि बाबू ने चाकू से उसकी गर्दन काट दी।
कुत्ता के मुंह में हड्डी देख चला बच्चे की लाश का पता
हत्यारों ने जिस जगह बच्चे की लाश छिपाई थी वहां उसे खोजना आसान नहीं था। पांचवें दिन एक कुत्ता इंसान जैसी हड्डी दबाये दिखा तो गांव के लोगों को शक हुआ। गांव के लोगों ने निगरानी की तो कुत्ता फिर से उसी जगह पहुंचा जहां से वह हड्डी लेकर आया था। ग्रामीणों ने कुत्ते को भगाकर ध्यान से देखा तो मासूम की लाश नजर आई थी।
पिता बोला, होनी चाहिए थी फांसी
कोर्ट में दोषियों को सजा सुनाई जानी थी तो बच्चे का पिता सुबह दस बजे ही कचहरी पहुंच गया था। दोपहर को अदालत ने सजा सुनाई तो पिता ने हाथ जोड़कर अदालत का धन्यवाद किया। पिता ने कहा कि अदालत के इंसाफ से हम खुश हैं लेकिन चाहता था कि फांसी की सजा मिले। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता आदित्य सिंह ने बताया कि दानिश और बाबू को आजीवन कारावास और 1.13 लाख के अर्थदंड से दंडित किया है।
