इस सरकारी जमीन पर 200 से अधिक झुग्गियां... 15 वर्षों में बढ़ती गई अवैध कब्जों की संख्या, नोटिस के बाद भी नहीं छोड़ा कब्जा
झुग्गियों में रहने वालों के पास बिजली, पानी, आधार कार्ड, मतदाता पहचानपत्र तक
लखनऊ, अमृत विचार : राजधानी में अवैध झुग्गियों वाले इलाकों की फेहरिस्त बड़ी लम्बी है। शहर के हर कोने में सुनियोजित तरीके से रेलवे लाइन के किनारे, मुख्य मार्गों और वीआईपी इलाकों में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा बढ़ता जा रहा है। इन झुग्गियों की लगातार बढ़ती संख्या से इलाके के लोग परेशान हैं। रिंग रोड पर विकास नगर के सेक्टर-12 में सरकारी भूखंड पर कब्जा कर झुग्गियां डाल दी गई हैं। बीते 15 वर्षों यहां लगभग 200 से अधिक झुग्गियां बन चुकी हैं। इसके बाद भी इन अवैध कब्जों की रफ्तार कम होने का नाम नहीं ले रही है। बिजली और पानी का कनेक्शन लेकर इनमें रहने वाले लोग अपने को यहां का नागरिक बता रहे हैं। दुबग्गा में इनमें से कई लोगों को मकान भी दिये गए हैं। लेकिन जगह नहीं खाली कर रहे हैं। कई लोगों के पास तो आधार कार्ड से लेकर मतदाता पहचान पत्र तक है। इनमें रहने वाले लोग कौन हैं और कहां से आए हैं इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
नोटिस पर नोटिस पर नहीं खाली कर रहे सरकारी जमीन
सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके15 वर्षों से लोग झुग्गियां डालकर रह रहे हैं। अब धीरे-धीरे इन अवैध कब्जों ने एक बस्ती का रूप ले लिया है। 200 से अधिक झुग्गियों में रहने वाले लोगों को सम्बंधित विभाग ने जगह खाली करने के लिए नोटिस दिए हैं, लेकिन यह टस से मस नहीं हुए। इन बस्ती के लोगों को दुबग्गा में मकान भी दिये जा चुके हैं। झुग्गियों के आस-पास रहने वाले स्थानीय लोगों का कहना है कि एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने से इनमें दहशत का माहौल है। कई लोगों ने दूसरी जगह तलाशनी शुरू कर दी है।
झुग्गियों से बढ़ीं चोरी की घटनाएं और अपराध
क्षेत्र में धीरे-धीरे झुग्गियों के फैलते जाने से चोरी की घटनाएं और अपराध में भी बढ़ोत्तरी हुई है। शाम होते ही रिंग रोड के आस-पास के क्षेत्रों में अराजकतत्वों का जमावड़ा लगने लगता है। महिलाएं अंधेरा होने के बाद घरों से निकलने से बचती हैं। बताया जाता है कि दिन में पुरूष प्राइवेट ठेलियां से घरों से कूड़ा उठाते हैं और शाम को नशे में धुत होकर हंगामा करते हैं। क्षेत्रीय निवासियों को कहना है कि अवैध तरीके से बनीं इन ये अवैध झुग्गियां लखनऊ की खूबसूरती पर दाग की तरह हैं।
