बाराबंकी : नहरों से सिल्ट के बहाने अवैध खनन जारी, ठेकेदारों के हौसले बुलंद, विभागीय मिलीभगत के आरोप
देवा/बाराबंकी, अमृत विचार। देवा क्षेत्र में मंगलवार से नहरों की सिल्ट नीलामी और सफाई का कार्य शुरू होते ही अनियमितताओं के आरोप सामने आने लगे हैं। महोलिया माइनर, मीरपुर माइनर, पटना माइनर और उमरी माइनर के ठेके जारी किए जा चुके हैं। इनमें से महोलिया व पटना माइनर में नीलामी लेने वाले ठेकेदारों ने काम भी शुरू कर दिया है, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार सिल्ट निकासी के नाम पर नहरों के अंदर तक अवैध खनन धड़ल्ले से चल रहा है।
नियमों के अनुसार नहरों के बेड पर जमी पुरानी सिल्ट की नीलामी होती है, जबकि नहर सफाई का ठेका अलग से दिया जाता है। सफाई के दौरान निकली नई सिल्ट को दोबारा नहर के बेड पर डालना अनिवार्य है ताकि भविष्य में उसकी दोबारा नीलामी हो सके। लेकिन देवा क्षेत्र में दोनों प्रक्रियाओं को मिलाकर भारी गड़बड़ियां की जा रही हैं।
स्थानीयों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदार न सिर्फ बेड की सिल्ट बल्कि नहर के अंदर की मिट्टी तक पोकलैंड मशीनों से गहराई में खुदवाकर डंपरों में भरकर महंगे दामों पर बेच रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि नहरों पर सिंचाई विभाग के मेट तैनात रहते हैं और निगरानी की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होती है, बावजूद इसके अवैध खनन बेखौफ जारी है। सूत्रों के मुताबिक नहर की अंदरूनी खुदाई से उसकी संरचना और जल प्रवाह पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई सख्त कार्रवाई न होने से ठेकेदारों के हौसले और बुलंद हैं।
इस संबंध में जब सिंचाई विभाग के जेई संतोष से बात की गई तो उन्होंने बताया कि संभव है कि सिल्ट उठाने और नहर सफाई दोनों के ठेके एक ही ठेकेदार के पास हैं, जिसके चलते ऐसा हो रहा है। ठेकेदार को नहर के अंदर की सिल्ट उठाने से मना किया गया है। हालांकि जमीन पर काम की वास्तविकता जेई के दावे से मेल नहीं खाती, जिससे विभागीय मिलीभगत के आरोप और मजबूत हो रहे हैं।
