हाईकोर्ट : कैंसर पीड़ित शिक्षिका का स्थानांतरण आवेदन खारिज करने पर सचिव को फटकारा
प्रयागराज, अमृत विचार : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज के सचिव के रवैये पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा कि कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद स्तन कैंसर से जूझ रही सहायक अध्यापिका के स्थानांतरण अभ्यावेदन पर प्राधिकारियों ने सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के बजाय तकनीकी आधारों का सहारा लेते हुए उसके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। कोर्ट के इसे अत्यंत खेदजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि कोर्ट के विशिष्ट निर्देशों के बावजूद याची के मामले के वास्तविक पहलुओं पर विचार नहीं किया गया।
कोर्ट ने विभाग के ऐसे उदासीन रवैया पर कड़ा रुख अपनाते हुए सचिव को निर्देश दिया कि वे व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें या अगली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष उपस्थित हों। उक्त आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की एकलपीठ ने कल्पना शर्मा की याचिका पर विचार करते हुए पारित किया। दरअसल याची अगस्त 2015 से शाहजहांपुर के एक जूनियर हाईस्कूल में विज्ञान विषय की सहायक अध्यापिका के रूप में तैनात हैं। वह स्तन कैंसर से पीड़ित हैं।
सर्जरी के बाद वर्तमान में गाजियाबाद स्थित मैक्स कैंसर सेंटर में कीमोथेरेपी ले रही हैं। उनका परिवार भी गाजियाबाद में रहता है, जबकि कार्यस्थल लगभग 320 किमी दूर है। उन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों का हवाला देते हुए स्थानांतरण हेतु आवेदन किया था। हाईकोर्ट ने सितंबर, 2023 में प्राधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे उनके मामले पर “सहानुभूतिपूर्वक” निर्णय लें, लेकिन सचिव ने अभ्यावेदन इस आधार पर निरस्त किया कि विद्यालय में दो ही शिक्षक हैं, जबकि 36 विद्यार्थियों की उपस्थिति के कारण तीन शिक्षकों की आवश्यकता होती है। साथ ही, उन्होंने ‘पारस्परिक स्थानांतरण’ हेतु ऑनलाइन आवेदन करने का सुझाव दिया। इस पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रतिदिन ऐसे मामलों से पाला पड़ रहा है जहां 36 से अधिक छात्र होने के बावजूद कई संस्थानों में केवल एक शिक्षक कार्यरत है। कोर्ट ने इसे नीति के नाम पर मानवीय पहलुओं की उपेक्षा बताया और सचिव के अस्वीकृति आदेश को “दुर्भाग्यपूर्ण” करार देते हुए उनसे स्पष्ट जवाब मांगा। मामले की अगली सुनवाई आगामी 20 नवंबर को सुनिश्चित की गई है।
