रामपुर : आजम खां की मुश्किलें नहीं होंगी कम, 2027 चुनाव पर निगाहें
आजम खां ने 50 माह की काटी सजा, मां-बेटे ने भी कई माह रहे जेल में
रामपुर, अमृत विचार। आजम खां और उनके परिवार से जुड़े मामलों में एमपी-एमएलए कोर्ट लगातार सुनवाई कर रही है। आने वाले दिनों में आजम खां के लिए मुश्किलें कम नहीं होंगी, क्योंकि अन्य मुकदमों में सुनवाई चल रही है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव पर सपाइयों की निगाहें टिकीं हैं। 2027 में बाजी सपा के हाथ लगी तो आजम खां और परिवार को राहत मिल सकती है, जबकि भाजपा फिर से सत्ता में आई तो मुश्किलें और बढ़ेंगी।
सपा नेता आजम खां को अभी तक 50 माह की सजा जेल में काट चुके हैं, जबकि बेटे अब्दुल्ला के साथ फिर से जेल गए हैं। जबकि अब्दुल्ला व पत्नी डॉ. तजीन फात्मा भी कई महीने जेल काट चुकी हैं, पत्नी जमानत पर बाहर हैं। आजम खां को डूंगरपुर में 10 साल की सजा, जन्म प्रमाण पत्र और दो पैन कार्ड मामले में 7-7 साल की सजा हो चुकी है। अगर 2027 में भाजपा सरकार फिर से आती है तो आजम खां के आने वाले दिनों में मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जबकि सत्ता में सपा आई तो राहत के आसार हैं। कभी सियासत की बुलंदियों को छूने वाले सपा नेता आजम खां भाजपा सरकार आने के बाद से बहुत बुरे दौर से गुजर रहे हैं। परिवार के साथ कम और जेल में ज्यादा समय काट रहे हैं। कभी दामन पर एक दाग न लगने की बात कहने वाले आजम खां पर मौजूदा समय में 111 मुकदमे दर्ज हैं, यह सभी मुकदमे भाजपा सरकार आने के बाद हुए। कभी सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव इनके कार्य में हस्तक्षेप नहीं करते थे, लेकिन उनके निधन के बाद से उनका बुरा दौर शुरू हो गया है। चारों तरफ से हुई घेराबंदी के चलते अब सलाखों के पीछे समय काट रहे हैं। दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में जहां सात साल की सजा हुई, तो कुछ ही माह के बाद डूंगरपुर के मामले में 10 साल की सजा हो चुकी है।
मामला यहीं पर नहीं ठहरा कि सोमवार को दो पैन कार्ड में फिर से पिता पुत्र को सात-सात साल की सजा हो चुकी है। जो कि मौजूद समय में रामपुर जिला कारागार में यानि घर से 200 कदम की दूरी पर बंद है। इन सजाओं के आधार पर अंदाजा लगाया जा सकता है 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में आजम खां का चुनाव लड़ना मुश्किल है। क्योंकि इनका वोट डालने तक का अधिकार छीना जा चुका है। अब्दुल्ला आजम पर भी लगभग 45-50 मुकदमे हैं। डॉ. तजीन फात्मा पर लगभग 40 मुकदमे हैं। कोर्ट से सजा मिलने के बाद अब आजम खां और अब्दुल्ला आजम के साथ-साथ डॉ. तजीन फात्मा भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगी। कई मुकदमे आजम खां के बड़े बेटे अदीब आजम भी दर्ज हैं, हालांकि अभी तक वह लंबित हैं।
इन मामलों में सुनाई जा चुकी सजा
27 अक्टूबर 2022 को मिलक कोतवाली में दर्ज भड़काऊ भाषण मामले में एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई थी। सजा के फैसले को सेशन कोर्ट ने निरस्त कर दिया था। 13 फरवरी 2023 को एमपी-एमएलए कोर्ट ने मुरादाबाद के छजलैट में हाईवे जाम करने के मामले में आजम और अब्दुल्ला को दो-दो साल की सजा सुनाई थी। इसमें अब्दुल्ला की विधायकी चली गई थी। 15 जुलाई 2023 के भड़काऊ भाषण के एक दूसरे मामले में आजम खां को दो साल की सजा सुनाई गई थी। जिसको सेशन कोर्ट ने खारिज कर दिया। दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में 18 अक्टूबर 2023 में कोर्ट ने आजम खां,पत्नी डॉ. तजीन फात्मा और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खां को सात-सात साल की सजा सुनाई थी। 18 मार्च 2024 को कोर्ट ने डूंगरपुर मामले में सात साल की सजा सुनाई। इसके अलावा 30 मई 2024 को डूंगरपुर के दूसरे मामले में 10 साल की सजा और 14 लाख का जुर्माना लगाया है। यह अभी तक की सबसे बड़ी सजा है।
रामपुर में दर्ज 93 मुकदमे
आजम पर कुल 111 मुकदमे दर्ज हुए। जिसमें से रामपुर में 93 मुकदमे दर्ज हुए हैं। जमीनों के राजस्व केस 11, मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेंडिंग 57 है। सेशन कोर्ट में 19 पेंडिंग हैं। अन्य जिलों में पेंडिंग 2 है।
