ईसाई धर्म की शांति — चर्च और उनके सामाजिक योगदान

Amrit Vichar Network
Edited By Pradeep Kumar
On

बरेली का सीएनआई चर्च अंग्रेजों के समय का चर्च है। 1838 में इटालियन डिजाइन से बना इस चर्च में अंग्रेज प्रार्थना करने आते थे। मुगल काल के समय जब रुहेलों और अंग्रेजों की लड़ाई हुई तब रुहेलों ने इसी चर्च पर आक्रमण कर इसे आग के हवाले कर कई अंग्रेजों को मौत के घाट उतारा था। उस समय लगभग 100 से ज्यादा अंग्रेज मारे गये थे। यहां के पुराने पादरियों की कब्र भी इसी चर्च के अंदर है। चर्च जलाने के बाद इसका फिर से पुननिर्माण किया गया। 1947 में देश आजाद हुआ तो अंग्रेजों ने कुछ चर्च संस्थाएं भारतीयों के हाथ में दी गई। तब छह ग्रुपों को मिलाकर चर्च आफ नार्थ इंडिया संगठन बनाया गया और उसी के अधीन चलता रहा। फिर विवाद सामने आए तो 1960 से यहां प्रार्थना आराधना बंद हो गई। फिर एक बैपिस्ट चर्च ने सीएनआई चर्च को किराये पर लिया और 1989 से यहां फिर से अराधना और प्रार्थना होने लगी। इस चर्च के पहले पास्टर डा. विलियम सैमुअल बने। मौजूदा समय ऐतिहासिक चर्च के पादरी मेल्विन चार्ल्स हैं।

डा. सैमुअल बताते हैं कि यह चर्च अंग्रेजों के समय का चर्च है। यह एतिहासिक है। इसे पर्यटन के रूप में विकसित किया जा सकता है। डा. विलियम ने बताया कि बरेली का जीरो प्वाइंट भी चर्च को ही माना गया है। कैंट में बिशप के पास स्टीफन चर्च है। बरेली का माइलेज यहीं से नापा जाता है। कुछ लोग कुतुबखाना को जीरो प्वाइंट मानते हैं लेकिन अंग्रेजों के समय का जीरो प्वाइंट सेंटस्टीफन चर्च है।  शहर की ऐतिहासिक धरोहरों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। 19वीं शताब्दी के मध्य में ब्रिटिश शासन के दौरान निर्मित यह चर्च न केवल ईसाई समुदाय के धार्मिक जीवन का केंद्र रहा है, बल्कि बरेली की सांस्कृतिक विविधता का भी एक सुंदर प्रतीक है। अंग्रेजों द्वारा उत्तर भारत में मिशनरी गतिविधियों के विस्तार के साथ यह चर्च स्थापित हुआ।

-इस चर्च की सबसे बड़ी विशेषता इसका वास्तुशिल्प है। गोथिक शैली में निर्मित यह भवन अपनी ऊँची मेहराबों, नुकीले आर्च, पत्थर की पारंपरिक दीवारों और रंगीन काँच की खिड़कियों के कारण दूर से ही पहचान में आ जाता है। चर्च के भीतर लगे स्टेन ग्लास पैनलों पर उत्कीर्ण बाइबिल की कथाएँ न केवल कलात्मक सौंदर्य का अद्भुत उदाहरण हैं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति भी कराती हैं।

-धार्मिक दृष्टि से यह चर्च सदियों से ईसाई समाज का केंद्र रहा है, जहाँ क्रिसमस, गुड फ्राइडे और ईस्टर जैसे प्रमुख पर्व अत्यंत भव्यता और श्रद्धा से मनाए जाते हैं।

-बरेली जैसे बहु-सांस्कृतिक और बहु-धार्मिक शहर में सीएनआई चर्च सौहार्द और सह-अस्तित्व की खूबसूरत मिसाल है। अलखनाथ मंदिर, आला हज़रत दरगाह, जैन तीर्थ, प्राचीन गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक स्थलों के साथ यह चर्च बरेली की विविध आध्यात्मिक विरासत को और भी समृद्ध बनाता है। शहर के इतिहास, औपनिवेशिक वास्तुकला और धार्मिक सौहार्द का अध्ययन करने वाले पर्यटकों व शोधकर्ताओं के लिए यह चर्च विशेष आकर्षण का केंद्र है।

-समय के साथ बरेली बदलता रहा, पर यह चर्च अपनी गरिमा, शांति और आध्यात्मिक महत्त्व के साथ आज भी उसी तरह खड़ा है। यह केवल ईसाई समुदाय का प्रतीक नहीं, बल्कि बरेली की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक स्मृति का एक जीवंत अध्याय है।

संबंधित समाचार