कानपुर : 40 दिन डॉ. शाहीन के साथ रहीं लेडी विंग की नौ किशोरियां

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Edited By Amrit Vichar
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कार्यालय संवाददाता, कानपुर, अमृत विचार : दिल्ली धमाके में आरोपी डॉ. शाहीन सईद के लेडी विंग की नौ किशोरियों ने बड़ा खुलासा किया है। सुरक्षा एजेंसियों की पूछताछ में बताया कि वह 40 दिन तक सईद के साथ रहीं। प्रदेश के कई जिलों में 15 दिन यात्रा की। मेरठ, सहारनपुर, बहराइच, संभल में साथ रहीं। धार्मिक सभाओं का बहाना करके जिहादी कार्यक्रमों में ले जाया गया। नेपाल के रास्ते पाकिस्तान में ट्रेनिंग के लिए ले जाने पर बचकर भागीं। तब से अंडरग्राउंड थी। 

एनआईए व एटीएस ने कानपुर से दिल्ली रुख किया है। सूत्रों के हवाले से अब रिमांड पर लेकर गतिविधियों की पड़ताल होगी। कानपुर में आईबी, एनआईए व एटीएस के दो-दो कर्मी हैं। टीम ने शहर के एक पॉश इलाके के अपार्टमेंट में फ्लैट को नया ठिकाना बनाया है। सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार डॉ. शाहीन की लेडी विंग की नौ सदस्यों से पूछताछ हुई। जिसमें पता चला कि यह सभी किशोरियां 40 दिन शाहीन के साथ रही। धार्मिक प्रचार के नाम पर सभी को विंग में शामिल किया गया था, लेकिन जिहादी सभाओं में ले जाया जाता था। किशोरियों ने एजेंसी को बताया कि वह गरीब परिवार से हैं।

नौकरी के बहाने डॉ. शाहीन बीती मार्च माह में उन्हें दिल्ली ले गई। उसके बाद सफेद क्रेटा से यूपी के तमाम जिलों में ले जाया गया। धर्म का प्रचार के नाम पर उन्हें साथ रखा गया था। कुरआन की जानकारी होने की वजह से उनसे धार्मिक सभाओं के लिए तैयार रहने के लिए कहा गया। 15-15 हजार रुपये वेतन और रहने खाने का प्रबंध था। धर्म सभाओं में जिहादी हरकत पर उन्हें संदेह हुआ। इस पर वह पीछे हटने लगीं। भरोसा था कि शाहीन उनके साथ गलत नहीं करेगी, लेकिन उसे फोन पर समाज विरोध बातें करते सुनकर हैरान रह गई। इसी दौरान एक दिन गोरखपुर, बहराइच और फिर नेपाल पहुंचने के लिए कहा गया। पता चला कि नेपाल के रास्ते ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भेजा जाएगा। इस पर सभी बचकर भाग निकली और अंडरग्राउंड हो गई। 

मजबूरी में फायदा उठाने वाला शाहीन का चेहरा देखा 

लड़कियों ने सुरक्षा एजेंसियों को बताया कि वह गरीब घर से हैं। किसी के पिता नहीं तो कोई अपने घर में बड़ी है। जिससे उस पर रोटी और खर्चों की जिम्मेदारी थी। दुकान और घरों में काम के दौरान लोग गलत नजर रखते थे। धार्मिक प्रचार के साथ वेतन के लालच में उससे जुड़ी थी। पंफलेट पर लिखे नंबर पर संपर्क करने पर लखनऊ के एक होटल में बुलाया गया। वहां डॉ. परवेज के पास ले जाया गया। वहां शाहीन मिली थीं। अपना डॉक्टर वाला परिचय दिया। बताया गया कि धार्मिक प्रचार से कौम की हालत बदल सकते हैं। बाद में उसका खतरनाक इरादा देखकर भागे। 

किशोरियों को दी गई स्लीपर सेल की ट्रेनिंग 

सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार लेडी विंग में शामिल किशोरियों की स्लीपर सेल्स की ट्रेनिंग शुरू हो गई थी। सभी को हरियाणा के साथ यूपी के कई जिलों में घुमाया गया। धार्मिक प्रचार के नाम पर जिहादी कार्यक्रमों में ले गए। वहीं देश विरोधी नारेबाजी नफरत के बयान पर किशोरियों को संदेह हुआ। उन्हें बताया गया कि कौम के नाम पर जो मरता है वह शहीद माना जाता है। इसी बीच किशोरियों को डर लगा और पीछे हटने लगीं। पाकिस्तान भेजने का समय आया, उससे पहले ही भाग निकली। किशोरी ने बताया कि मार्च में वह एक रात बाराबंकी के एक मदरसे में रुकी। वहीं डॉ. शाहीन पर शक हुआ। इसके बाद चार लड़कियां लखनऊ होते कानपुर आ गई, जबकि पांच नेपाल से जंगल के रास्ते भागीं। 

आठ माह तक अंडरग्राउंड रही 

सुरक्षा एजेंसियों को किशोरियों ने बताया कि डॉ. शाहीन के पास से भागने के बाद वह डर के कारण आठ माह तक अंडरग्राउंड रहीं। बाहर निकलना बंद कर दिया। दहशत में रहकर जिंदगी जी रहे थे। कमरे की लाइट बंद करके अंधेरे में रहे। शाहीन के पकड़े जाने और सुरक्षा एजेंसियों के संपर्क करने पर सामने आईं। अपनी बात खुलकर बताई। बयान दर्ज कराए।

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