Moradabad : पराली- गन्ने की पत्ती जलाने पर 7 किसानों से वसूला 35 हजार का जुर्माना
मुरादाबाद, अमृत विचार। जिले में पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कृषि विभाग ने बिलारी और ठाकुरद्वारा क्षेत्र के पांच किसानों पर पराली जलाने का दोषी पाए जाने पर 35 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया है।
रविवार को उप कृषि निदेशक संतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 7 किसानों पर कुल 35 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जा चुका है। पराली जलाने की रोकथाम के लिए डीएम अनुज सिंह के निर्देश पर राजस्व, कृषि और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमें जनपद, तहसील और विकासखंड स्तर पर लगातार निगरानी कर रही हैं। इतना ही नहीं सैटेलाइट से प्रतिदिन लोकेशन ली जा रही है। उन्होंने बताया कि पराली जलाने की सूचना सैटेलाइट सिस्टम से रोजाना प्राप्त होती है, जिसमें स्थल का अक्षांश-देशांतर भी शामिल रहता है। इसके आधार पर विभागीय कर्मचारी मौके पर जाकर जांच करते हैं और रिपोर्ट तैयार करते हैं।
पराली जलाने पर सरकार की ओर से जुर्माने की दरें तय की गई हैं। गन्ना किसानों का सट्टा लॉक करा दिया जाएगा। पराली जलाने पर दो एकड़ तक 5 हजार रूपये, दो से पांच एकड़ तक 10रुपये,पांच एकड़ से ऊपर 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जाएगा। उप कृषि निदेशक ने चेतावनी दी कि पराली जलाते पाए गए किसानों को कृषि विभाग की योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा सकता है। वहीं, गन्ने की पत्तियां जलाने वाले किसानों का गन्ना सट्टा (पर्ची) भी बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पराली जलाने से प्रदूषण बढ़ता है और पैदावार घटती है। बिलारी और ठाकुरद्वारा में कुछ किसानों ने फसल कटान के बाद खेतों में रखी पराली में आग लगा दी। शिकायत मिलने पर विभागीय टीम मौके पर पहुंची और जांच कर किसानों को दोषी पाया।
फसल के साथ स्वास्थ्य के लिए भी खतरा
द्विवेदी ने बताया कि फसल अवशेष जलाने से कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं। इससे श्वास, त्वचा और आंखों के रोग बढ़ते हैं और मिट्टी के लाभदायक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होता है। मौसम में बढ़ते प्रदूषण और धुएं की समस्या को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही किसानों को पराली न जलाने की सख्त हिदायत दी थी। कृषि विभाग द्वारा गांव-गांव जागरुकता अभियान चलाकर पराली प्रबंधन के विकल्प भी बताए गए थे।
