मैं जट यमला पगला दीवाना… अभिनेता धर्मेंद्र आम आदमी का सुपरस्टार, पीढ़ियों का हीरो

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर। मुंबई के फिल्म स्टूडियो की चमकती रोशनियों ने कई चेहरों को स्टारडम दिया, लेकिन कुछ नाम ऐसे हैं जो सिर्फ सितारा नहीं बने, बल्कि कई पीढ़ियों के दिलो-दिमाग में गहरे उतर गए। धर्मेंद्र एक ऐसे ही अलेबेले अभिनेता थे। ही-मैन के नाम से मशहूर बॉलीवुड के इस सुपर स्टार की मुस्कान में अगर गांव की मिट्टी की महक थी, तो चाल में पंजाब के किसी फौजी जैसी चौकसी और आंखों में एक ऐसा अपनापन कि दर्शक उनके किरदार में खुद को परदे पर खोजने लगते थे। संवाद अदायगी का उनका अपना अंदाज, अभिनय में  सादगी के साथ मर्दानगी की मिसाल ने लोगों को धर्मेंद्र का दीवाना बना दिया था।

 बॉलीवुड के बीते छह दशक से ज्यादा के सफर में पांच दशक तक 300 से ज्यादा फिल्मों वाले शानदार करियर की बदौलत किसी बादशाह की तरह  लोगों के दिलों पर राज करने वाले दिलदार स्वभाव और बेजोड़ शख्सियत वाले धर्मेंद्र ने अभी 8 नवंबर को ही अपना 89वां जन्मदिन मनाया था। इसके दो दिन बाद ही उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 

लेकिन फिल्म शोले में बसंती के लिए पानी की टंकी पर चढ़कर जान देने की जानदार एक्टिंग करने वाले धर्मेंद्र जिस तरह फिल्म में मरना कैसिंल करके टंकी से नीचे उतर आए थे, उसी तरह मौत को मात देकर घर आ गए थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था, जिसने हिंदी सिनेमा के इस लेजेंड को 24 नवंबर को दुनिया को अलविदा कहने के लिए मजबूर कर दिया। 

मनोज कुमार न रोकते तो पंजाबी जट्ट धर्मेंद्र नहीं बन पाता 

धर्मेंद्र के फिल्मी हीरो बनने की कहानी बड़ी दिलचस्प है। बात साल 1960 की है। पंजाब के एक छोटे से गांव का एक सीधा-सादा लड़का स्क्रीन पर दिलीप कुमार को देखकर हीरो बनने का सपना पाल बैठा था। लेकिन एक स्कूल मास्टर के बेटे के लिए ये सपना पूरा करना आसान नहीं था, यह जानते हुए भी इस पंजाबी जट्ट ने अटैची उठाई और पहुंच गया मायानगरी मुंबई।

 यह वह दौर था जब फिल्म इंडस्ट्री में “हीरो” की परिभाषा सिर्फ खूबसूरत चेहरे और नपे-तुले एक्शन तक सीमित थी। लेकिन धर्मेंद्र ने जल्दी ही इसे बदल दिया। उन्होंने हीरो को इंसान बनाया, और इंसान को हीरो की ऊंचाई दी। लेकिन इससे पहले उन्हें मुंबई में खासा संघर्ष करना पड़ा। उस समय फिल्म स्टूडियो के बाहर काम मिलने के इंतजार में लाइन लगानी पड़ती थी।

 कई बार सड़क पर सोने की नौबत आ जाती थी। ऐसे में थक-हारकर धर्मेंद्र ने एक दिन ट्रेन पकड़कर वापस पंजाब जाने का फैसला ले लिया। लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था। पंजाब से ही अभिनेता बनने आए मनोज कुमार से मुलाकात हो गई। उन्होंने वापस जाने से रोक लिया और हौसला बढ़ाया तो धर्मेंद्र ने कुछ दिन और रुकने का फैसला किया। इसके बाद निर्देशक बिमल रॉय ने सबसे पहले धर्मेंद्र को स्पॉट किया। फिर तो एक दिन जिस अभिनेता देव आनंद को धर्मेंद्र पर्दे पर देखते थे, उन्होंने उन्हें अपने मेकअप रूम में बुलाया और आगे बढ़ने के लिए मोटिवेट किया। 

बिमल रॉय की बंदिनी से मिली ऐसा ब्रेक फिर रुका नहीं सफर   


अर्जुन हिंगोरानी ने अपनी फिल्म 'दिल भी तेरा, हम भी तेरे' से धर्मेंद्र को ब्रेक दिया। लेकिन उनकी यह पहली फिल्म बस आई-गई जैसी हो गई। हालांकि उनकी दूसरी फिल्म 'शोला और शबनम' कामयाबी की कहानी लेकर आई। इसके बाद उनकी कुछ और फिल्में भी चलीं, लेकिन बड़ा कमाल हुआ उन्हीं बिमल रॉय की फिल्म से, जिन्होंने धर्मेंद्र को अपनी अभिनेता प्रतिभा खोज प्रतियोगिता में स्पॉट किया था। अपने जमाने के आइकॉनिक फिल्ममेकर बिमल ने धर्मेंद्र को 'बंदिनी' (1963) में कास्ट किया। अशोक कुमार और नूतन के लीड वाली इस फिल्म को नेशनल अवॉर्ड मिला और लोगों ने धर्मेंद्र के काम को भी जमकर सराहा। 

आई मिलन की बेला, हकीकत, काजल
फूल और पत्थर से दिलों में बनाई जगह

'आई मिलन की बेला' (1964) के लिए धर्मेंद्र को फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में नॉमिनेशन मिला। उसी साल आई देश की चीन के साथ युद्ध पर बनी पहली फिल्म 'हकीकत' से बड़ी पहचान मिली। 1965 में मल्टीस्टारर 'काजल' हिट होने का धर्मेंद्र को बड़ा फायदा मिला।  'फूल और पत्थर' (1966) में उन्हें लीड रोल मिला और फिल्म खूब चली। इसी साल उनकी 'देवर', 'ममता', 'आए दिन बहार के' और 'अनुपमा' भी बाक्स आफिस पर हिट साबित हुईं। 70 का दशक शुरू होने तक धर्मेंद्र स्टार बन चुके थे। अब जैसे सुपरस्टारडम उनका इंतजार कर रहा था।

….और 70 तथा 80 के दशक ने बना दिया सुपरस्टार

 70-80 के दशक में धर्मेंद्र बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार थे। इस दौर में उन्होंने कई हिट और यादगार फिल्में दीं, जैसे 'मेरा गांव मेरा देश', 'शोले', 'धरमवीर', 'यादों की बारात', 'लोफर', जुगनू, 'यादों की बारात' और 'प्रतिज्ञा' के बेताब और घायल आदि । इस समय वह इंडस्ट्री के सबसे रोमांटिक और एक्शन हीरो में से एक थे और उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफलता की गारंटी थीं। इस दौर में हर निर्देशक और अभिनेत्री उनके साथ काम करना चाहती थीं।

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