सजा दो घर को गुलशन सा, मेरे प्रभु श्रीराम आए हैं...भाव विभोर श्रद्धालु बोले- त्रेतायुग वाली अयोध्या का दिखा सजीव चित्रण 

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Edited By Muskan Dixit
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अद्भुत, अलौकिक, अप्रतिम दिखा अयोध्या का सौंदर्य, सुगंधित फूलों से धार्मिक रहा वातावरण

विशाल तिवारी, अयोध्या, अमृत विचार : रामनगरी मंगलवार को फिर त्रेतायुग में लौट आई। अलौकिक, अद्भुत और अप्रतिम सौंदर्य से पूरा शहर राममय हो उठा। सारा वातावरण सुगंधित पुष्पों की महक से सराबोर था। पब्लिक एड्रेस सिस्टम पर बज रहे भजन सजा दो घर को गुलशन सा, मेरे प्रभु श्रीराम आए हैं..., लोगों को भक्ति के सागर में गोते लगवा रहे थे।

रामपथ समेत नगर के प्रमुख मार्गों पर लगी गेंदा और आम के पत्तों की मालाएं पूरे वातावरण को धार्मिक रंग में रंग रही थीं। राम मंदिर के वीआईपी प्रवेश द्वार जगदगुरु आद्य शंकराचार्य, जगीगुरु रामानंदाचार्य मार्ग समेत प्रवेश का प्रमुख मार्ग श्रीराम जन्मभूमि पथ पर बना भव्य द्वार किसी खास आयोजन का गवाह बन रहा था। मुख्य चौक-चौराहों पर केसरिया, पीले, लाल और सफेद फूलों की लड़ी इतनी सुंदर लग रही थी कि दूर से देखने पर लगता था मानो पूरा शहर सोने-चांदी के आभूषणों से सजा हो। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में गर्भगृह से लेकर मुख्य द्वार तक, हर तरफ गेंदे, गुलाब, चमेली और बेला के फूलों का ऐसा समां बंधा कि हवा में भी मिठास घुल गई।

हनुमानगढ़ी के पास बिहार के बेगूसराय से आए रत्नेश राय, अमिता राय, कुमकुम, मीरा आदि बोले वाह, यह है राजा राम की नगरी के ठाठ, लग रहा है आज सच में त्रेतायुग लौट आया। श्रृंगार हाट में बलिया से आए मीनाक्षी, देवनारायन, श्रीनाथ, राजकुमारी आदि ने कहा कि पूरा शहर फूलों से महक रहा है, हवा में भी राम नाम की सुगंध है। तुलसी उद्यान के पास गोंडा से आई बुजुर्ग बीना पांडेय बोलीं मैंने इतना सुंदर दृश्य कभी नहीं देखा। लता चौक के पास खड़े युवा श्रद्धालु आयुष, आर्यन, प्रशांत, शुभम ने कहा ये फूल, ये सुगंध, यह भक्ति भाव सब कुछ कह रहा है कि राम हमारे बीच हैं। अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन पर मिले मध्य प्रदेश के रीवा निवासी संजीव व उनकी पत्नी सुमन ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को भी बताया जाएगा कि जब राम अपने घर लौटे, तो अयोध्या ने उनका कैसे स्वागत किया।

रात का दृश्य हुआ और मनमोहक

शाम को हजारों दीपक सरयू में प्रवाहित किए गए। जलती हुई बातियां, फूलों से सजी नावें और भजन-कीर्तन की स्वर लहरियां, सब मिलकर एक ऐसी छवि बना रहे थे जो शब्दों में वर्णन करना कठिन है। दूर तक फैले दीपों की लड़ी देखकर लगा जैसे तारों भरा आकाश धरती पर उतर आया हो। रात में विशाल पेड़ों पर जगमगाती सफेद और रंग-बिरंगी लाइटों की झालरें पूरा क्षेत्र आलोकित हो गया।

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