मेरा शहर मेरी प्रेरणा :...ताकि मरीजों को मिल सके रोशन जहां

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Edited By Amrit Vichar
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कहते हैं न कि डॉक्टर का जीवन मरीजों के लिए समर्पित होता है, लेकिन कम उम्र में अगर आप एक कुशल विशेषज्ञ डॉक्टर बन जाते हैं इस दुनिया की चकाचौंध विदेशों तक जगमगाती है लेकिन कुछ ऐसे भी युवा डॉक्टर है जिन्होने अपनी जन्म स्थली को ही कर्मभूमि बना लिया और अन्य के लिए प्रेरणा बन गए।  

हम बात कर रहे हैं  मंडल के अनुभवी वरिष्ठ रेटिना विशेषज्ञ डॉ. दिव्य अग्रवाल की। उन्होने वर्ष 2021 में दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) से रेटिना विशेषज्ञता की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उनके वरिष्ठों ने उनकी कार्यकुशलता देखी तो एम्स में ही सेवाएं देने के लिए तमाम अनुरोध किए लेकिन डा. दिव्य के मन में अपने जन्म स्थान के लिए एक अलग ही सेवा भाव था, उन्होने वर्ष 2022 में बरेली आकर विकल्प आई एंड रेटिना सेंटर में मरीजों का इलाज आरंभ किया जो कि निरंतर जारी है। डॉ. दिव्य बतातें हैं कि मंडल में रेटिना के ऑपरेशन की उन्नत मशीन की कमी एवं रेटिना सर्जन की कमी होने से मरीजों को दिल्ली लखनऊ के चक्कर लगाने होते थे, जिससे उनके मन में टीस थी, बस इसलिए ही उन्होने बरेली आने का फैसला किया। 

अब नहीं लगानी होगी दूर -दराज की दौड़ 
डॉ. दिव्य बताते हैं कि पहले नेत्र रोगियों को गंभीर समस्या होने पर दूर-दराज के क्षेत्रों में इलाज के लिए जाना पड़ रहा था इसका मुख्य कारण ये था कि बीते वर्षों में इलाज की आधुनिक तकनीक और मशीनों का बरेली में अभाव था लेकिन अब शहर के  स्टेडियम रोड के एकता नगर स्थित विकल्प आई एंड रेटिना सेंटर के साथ ही अन्य केंद्रों पर भी रेटिना बीमारियों के सभी इलाज, रेटिनल इंजेक्शन, जर्मनी की लेटेस्ट  मशीन द्वारा रेटिना की जांच, एंजियोग्राफी, अत्याधुनिक लेज़र मशीन द्वारा रेटिनल लेज़र तकनीक से इलाज, इस तकनीक से इलाज में मरीज के जल्दी स्वस्थ होने के साथ ही इलाज में दर्द का एहसास तक नहीं होता है इतना ही नही अब शहर में ही अमेरिका की विटरेक्टॉमी मशीन जो कि पर्दे के ऑपरेशन के लिए सर्वोत्तम मशीन है जिससे बिना टांके के परदे के ऑपरेशन सुरक्षित तरीके से किए जा रहे हैं। 

स्क्रीन टाइम बच्चों को बांट रहा मायोपिया 
डॉ. दिव्य बताते हैं कि दिनों दिन सोशल मीडिया का चलन बढ़ रहा है हर वर्ग इसकी चपेट में है, लेकिन सबसे अधिक दुष्प्रभाव बच्चों की आंखों पर पड़ रहा है। बच्चे मायोपिया बीमारी से ग्रसित मिल रहे है जिसका मुख्य कारण है अधिक स्क्रीन टाइम और शारीरिक गतिविधियों का कम होना। लेकिन समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेने से इससे बचाव हो सकता है। 

हर धुंधलापन मोतियाबिंद नहीं होता 
डॉ. दिव्य बताते हैं कि मधुमेह यानि डायबिटिज से ग्रसित मरीजों को रोशनी कम होने की समस्या अधिक होती है, लेकिन अधिकांश लोग ये समझ लेते हैं कि ये मोतियाबिंद है, कई बार मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने से भी आंखों की रोशनी कम ही रहती है। इसलिए ये जानना जरुरी है कि हर धुंधलापन, मोतियाबिंद ही नहीं होता ये डायबिटिक रेटिनोपैथी भी हो सकती है। इसलिए हर डायबिटिक मरीज को हर साल नेत्र विशेषज्ञ से जांच अवश्य करानी चाहिए। आंखों के आगे  काले धब्बे दिखने पर या चमक का कारण पर्दे की कमजोरी होता है, ऐसे में रेटिनल डिचेमेंट के खतरे से बचने के लिए रेटिना विशेषज्ञ की सलाह जरुरी है।

डॉ. दिव्य ने दिल्ली स्थित एम्स से नेत्र विज्ञान में एमबीबीएस और स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है, जहां उन्हें स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर कई स्वर्ण पदक प्राप्त हुए हैं। उन्होंने एम्स, नई दिल्ली से विट्रोरेटिना, यूविया और आरओपी में अपनी दीर्घकालिक फेलोशिप पूरी की है। उन्होंने पद्मश्री प्रो. अतुल कुमार के मार्गदर्शन में अपनी वरिष्ठ रेजिडेंसी पूरी की। इतना ही नहीं डॉ. दिव्या के प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में 100 से अधिक प्रकाशन हैं और उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई शोधपत्र व संकाय वार्ताएं प्रस्तुत की हैं। 

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