मेरा शहर मेरी प्रेरणा : पीटर क्लटर बक...कलक्टरबक गंज आज भी गाता जिसकी गौरव गाथा

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Published By Monis Khan
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यूनाइटेड प्रॉविंस के चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट सर पीटर क्लटर बक तत्कालीन संयुक्त प्रांत में अपनी तैनाती के दौरान वनों को संरक्षित करने के लिए उन्हें आर्थिकी के साथ जोड़ने का प्रयास किया। उनका मानना था कि जब तक वनोपज धनोपार्जन का जरिया नहीं बनेगी तब तक वनों को संरक्षित नहीं किया जा सकेगा। 

 स्थानीय लोगों को वनों को आर्थिक रूप से मददगार या उनके रोजगार का जरिया बनाना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से उन्होंने बरेली जनपद में 1918 में एक यूटिलाइजेशन सर्किल बनाया था। पहले इस इलाक़े को महेशपुर अटरिया के नाम से जाना जाता था। बाद में इसे सर पीटर के सम्मान में क्लटर बक गंज कहा जाने लगा। स्थानीय लोगों की जुबान पर अंग्रेजी नाम चढ़ने में दिक्कत दे रहा था, इसलिए धीरे-धीरे इसका नाम कलक्टरबक गंज प्रचलित हो गया। यह आज भी बरेली के औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित है।

पीटर क्लटर बक के प्रयास रंग लाए और यहां पर वनोपज पर आधारित उद्योग स्थापित हुए। इससे जंगली क्षेत्र और इसके आसपास रहने वाले  स्थानीय लोगों को रोजगार मुहैया हुए। यहां पर 1926 में भारतीय तारपीन और राल (आईटीआर) की स्थापना हुई। वनों से निकलने वाला लीसा इसका मुख्य कच्चा माल था। अंग्रेजी कंपनी के ठेकेदार भारतीय मजदूरों से जंगल से लीजा इकट्ठा कराते थे और कंपनी को आपूर्ति करते थे। 

इसके कुछ समय बाद 1937 में वेस्टर्न इंडियन मैच कंपनी (WIMCO ) स्थापित हुई। यहां पर कैंफर फैक्ट्री की भी स्थापना की गई। इन उद्योगों के जरिये क्लटर बक गंज की पहचान प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में होने लगी। बड़े उद्योग धंधे स्थापित हुए तो आवागमन बढ़ा, इसलिए क्लटर बक गंज के नाम पर मुरादाबाद-लखनऊ रेल रूट पर रेलवे स्टेशन स्थापित किया गया। आजादी के बाद 1958 में यूपी राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडीसी) ने क्लटर बक गंज में औद्योगिक एस्टेट की स्थापना की।

इसके बाद कई स्थानीय उद्यमियों ने अपने उद्योग स्थापित किए। हालांकि औद्योगिक नीतियों में बदलाव और अन्य स्थानीय कारणों से भारतीय तारपीन और राल (आईटीआर) कारखाने ने अप्रैल 1998 में उत्पादन बंद कर दिया और कभी देश भर में माचिस की आपूर्ति करने वाली विमको फैक्ट्री 2014 में बंद हो गई। हालांकि क्लटर बक गंज से ही सटे परसाखेड़ा में कई नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित हो रही हैं।

एफआरआई देहरादून में क्लटर बक के नाम पर सड़क

बरेली के वरिष्ठ पत्रकार प्रभात सिंह बताते हैं कि वनों के संरक्षण और उनके आर्थिक दोहन के लिए लिए सर पीटर क्लटर बक की ओर से किए गए उल्लेखनीय कार्यों को सम्मान देने के लिए देहरादून स्थित फॉरेस्ट रिसर्च इंटीट्यूट में एक सड़क का नाम क्लटरबक रोड रखा गया है। वह आगे जोड़ते हैं कि जंगलों के संरक्षण और उन्हें विस्तार देने के लिए किए गए प्रयासों के लिए क्लटर बक इससे ज्यादा सम्मान के पात्र थे, लेकिन कलक्टरबक गंज के रूप में वह हमेशा हमारे बीच जीवित रहेंगे। 

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