Pilibhit: पीटीआर में 10 दिसंबर से शुरू होगी राष्ट्रीय बाघ गणना
पीलीभीत, अमृत विचार। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में राष्ट्रीय बाघ गणना (टाइगर एस्टीमेशन) 10 दिसंबर से शुरू होने जा रही है। चार चरणों में होने वाले गणना कार्य के दौरान तृण भोजी (शाकाहारी) वन्यजीवों की भी गिनती की जाएगी। इसको लेकर तैयारियां भी शुरू हो चुकी है। बाघ गणना को लेकर एस्टीमेशन करने वाली टीमों को आज प्रशिक्षित किया जाएगा।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा देश भर में बाघों की संख्या जानने को राष्ट्रीय बाघ गणना (टाइगर एस्टीमेशन) हर चार साल के अंतराल पर कराई जाती है। इससे पूर्व राष्ट्रीय बाघ गणना वर्ष 2022 में संपन्न कराई गई थी। उस दौरान पीलीभीत टाइगर रिजर्व को 365 ग्रिड में विभाजित कर बाघ गणना की गई थी। 700 से अधिक कैमरा ट्रैप लगाकर की गई गणना में उस दौरान 72 बाघ पाए गए थे। इधर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की ओर से पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ गणना को लेकर कार्यक्रम की रुपरेखा जारी कर दी गई। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ गणना को लेकर वन अफसरों को पूर्व में ही प्रशिक्षित किया जा चुका है।
10 दिसंबर से शुरू होने वाली राष्ट्रीय बाघ गणना को लेकर टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से तैयारी तेजी से शुरू कर दी गई है। शुक्रवार को पांचों रेंज में एस्टीमेशन का कार्य करने वाली टीमों को उप प्रभागीय वनाधिकारी रुद्रप्रताप सिंह एवं महोफ रेंज के क्षेत्रीय वनाधिकारी सहेंद्र यादव द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ गणना के दौरान बाघों की मौजूदगी, आवाजाही और उनकी संख्या के बारे में सटीक डेटा एकत्र किया जाएगा। बाघों की पहचान उनके खास स्ट्राइप पैटर्न यानी धारियों के पैटर्न से करने के लिए कैमरा ट्रैप तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। टाइगर रिजर्व प्रशासन के मुताबिक टाइगर एस्टीमेशन के पहले चरण में साइन सर्वे किया जाएगा।
इसमें बाघ-तेंदुआ बाहुल्य जंगल में अनावश्यक रूप से उगी घास काटने के बाद टीमें बाघ और तेंदुओं की साइटिंग, पैरों के निशान आदि देखकर इनकी संख्या का अनुमान लगाएगीं। साथ ही बाघों के भोजन यानी शाकाहारी पशुओं के घनत्व का आकलन होगा। इसके अलावा बाघों के हैबीटेट में बायोटेक इंटरफेयरेंस का पता लगाने का प्रयास किया जाएगा। दूसरे चरण में रिमोट सेंसिंग का काम होगा। इसमें जंगल के रास्तों, रोशनी और पानी के लिए वाटर होल्स की स्थिति का आकलन किया जाएगा। अंतिम चरण में कैमरा ट्रैपिंग होगी। इसमें जंगल को ग्रिड में बांटकर कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे।
इस तरह होगा बाघ गणना का कार्य
1 से 7 दिसंबर- रेंजर एवं अन्य फील्ड स्टाफ को प्रशिक्षण
10 दिसंबर से 5 जनवरी तक- लाइन ट्रांसेक्ट, साइन सर्वे और हैबीटेट सर्वे
6 से 15 जनवरी तक- डेटा संकलन एवं संकलन कार्य
10 दिसंबर से 30 अप्रैल तक- कैमरा ट्रेपिंग
1 से 7 मई तक - डेटा कंपाईलेशन
डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व मनीष सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की ओर राष्ट्रीय बाघ गणना 2026 का कार्यक्रम जारी किया गया है। इसको लेकर तैयारियां तेजी से शुरू कर दी गई। सटीमेशन करने वाली टीमों को शुक्रवार से प्रशिक्षण दिया जाएगा।
