शहीद की विधवा की दुर्दशा पर हाईकोर्ट व्यथित, कहा- यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1971 के युद्ध में शहीद हुए सैनिक की विधवा के मामले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के लिए बलिदान देने वाले सैनिक की पत्नी को आधी सदी से न्याय और अधिकार के लिए भटकना पड़ रहा है।

मामले में तात्कालिकता को रेखांकित करते हुए न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने राज्य सरकार को तुरंत निर्देश प्राप्त करने और शहीद की विधवा के दावे के त्वरित निपटारे के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया, साथ ही संबंधित प्राधिकारियों को सुनवाई की अगली तारीख तक यानी 8 दिसंबर 2025 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए गए। 

आरोप लगाया गया है कि उसे 5 बीघा भूमि के अधिकार के बावजूद मात्र 2.5 बीघा भूमि ही आवंटित की गई है और वह 1974 से अपने वैध हक के लिए संघर्ष कर रही है। ऐसी स्थिति पर कोर्ट ने खेद प्रकट करते हुए कहा कि यदि याचिका में किए गए तथ्य सही हैं, तो यह स्थिति “पूरे समाज की स्थिति की चौंकाने वाली गवाही” है।

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