खतरनाक है अमेजन टिपिंग पॉइंट
हम जानते हैं कि धरती और इसके पर्यावरण से ही हमारा अस्तित्व जुड़ा है। आज बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरण असंतुलन से पृथ्वी का जो हिस्सा सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है वह है दुनिया का सबसे बड़ा उष्णकटिबंधीय वर्षावन अमेजन। अमेजन के जंगल खतरे में हैं और यह खतरा एक और बड़े खतरे को जन्म दे रहा है, वह है कार्बन उत्सर्जन के विस्फोट का खतरा। हो सकता है कि तब धरती का तापमान इतना बढ़ जाए कि धरती पर हमारा या अन्य जीव-जंतुओं का रहना ही मुश्किल हो जाए। अमेजन का जंगल वैश्विक जलवायु को नियंत्रित करने, जैव विविधता को बनाए रखने और कार्बन अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, वह है, लेकिन आज वहां वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन, अवैध खनन और आग जैसी समस्याओं से यह गंभीर संकट का सामना कर रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, अमेजन अब टिपिंग पॉइंट अर्थात वह बिंदु जहां से वापसी असंभव हो जाए, के बहुत करीब पहुंच चुका है, जहां सत्तर प्रतिशत तक जंगल खोने का खतरा है।-- डॉ. इरफ़ान ह्यूमन
1985 से 2022 तक 11 प्रतिशत जंगल, फ्रांस के आकार के बराबर, नष्ट हो चुका है। 2025 में, जबकि आग में कमी आई है, लेकिन कटाई बढ़ रही है, विशेषकर मवेशी पालन, कृषि, खनन और सड़कों के लिए। यहां अवैध गतिविधियों की चर्चा की जाना जरूरी है, जहां भूमि हड़पना, सोने की अवैध खदानों और अपराधियों द्वारा लगाई जाने वाली आग है। इस कारण वर्षा में कमी और सूखा, जो जंगल को और कमजोर कर रहा है। कुछ हिस्सों में अब जंगल कार्बन उत्सर्जन अधिक कर रहे हैं, जितना अवशोषित, यह पर्यावरणविदों के लिए चिंता का विषय है। हालांकि ब्राजील में कुछ प्रगति हुई है, अगस्त 2024 से जुलाई 2025 तक वनों की कटाई 11 प्रतिशत घटी, जो 11 साल के न्यूनतम स्तर पर है। यह कॉप 30 से पहले एक सकारात्मक संकेत है, जहां अमेजन की सुरक्षा पर फोकस होगा। फिर भी, समग्र खतरा बना हुआ है और वैश्विक सहयोग की ज़रूरत है। कॉप 30, वास्वतव में अमेज़न के जंगलों को बचाने की उम्मीद की एक किरण है। कॉप 30 संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन की 30 वीं सम्मेलन ऑफ द पार्टिज है, जो दुनिया के प्रमुख वार्षिक जलवायु शिखर सम्मेलन के रूप में जाना जाता है।
टिपिंग पॉइंट
अमेजन वर्षावन का टिपिंग पॉइंट एक ऐसा महत्वपूर्ण बिंदु है, जहां जंगल अपनी प्राकृतिक पुनरुत्पादन क्षमता खो देगा और अपरिवर्तनीय रूप से सूखी सवाना (घासभूमि) में बदल जाएगा। यह बिंदु पार होने पर जंगल का बड़ा हिस्सा नष्ट हो सकता है, जो वैश्विक जलवायु, जैव विविधता और मानव जीवन को गंभीर खतरे में डाल देगा। वैज्ञानिकों के अनुसार हम इस बिंदु के बहुत करीब पहुंच चुके हैं, वर्तमान में अमेजन का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा कट चुका है और वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। यदि वनों की कटाई 20-25 प्रतिशत तक पहुंच जाती है या तापमान 2-2.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है (जो 2050 तक संभव है), तो यह टिपिंग पॉइंट पार हो सकता है। अब सवाल है कि इसका जोखिम क्या है? तो इसका जवाब हमें चिंता में डाल सकता है, क्योंकि यह टिपिंग पॉइंट न केवल अमेजन के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी होगा। सबसे पहले बात करेंगे जंगल के अपूर्णीय नुकसान की। यदि टिपिंग पॉइंट पार होता है, तो 50-70 प्रतिशत जंगल, जो लगभग 3-4 लाख वर्ग किमी है, खो सकता है, जो इसे कम आर्द्र, आग-संवेदनशील सवाना में बदल देगा। दक्षिण-पूर्वी अमेजन पहले ही कार्बन स्रोत बन चुका है, जहां पेड़ों की मृत्यु बढ़ रही है और अगले 100 वर्षों में पूरा जंगल गायब हो सकता है।
कार्बन उत्सर्जन विस्फोट
कार्बन उत्सर्जन का विस्फोट से तात्पर्य वैश्विक स्तर पर कार्बन डाईऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैसों के रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ने से है, जो जलवायु परिवर्तन को तेज कर रहा है। 2023-2024 के बीच कार्बन डाईऑक्साइड स्तर में रिकॉर्ड 4.7 भाग प्रति मिलियन (पीपीएम) की वृद्धि हुई, जो मानव इतिहास में सबसे अधिक है। 2024 में जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल, गैस) का उपयोग बढ़ने से उत्सर्जन चरम पर पहुंच गया और 2025 में जंगलों की आगों से कार्बन डाईऑक्साइड 9 प्रतिशत अधिक निकली। यह क्लाइमेट कैओस की ओर ले जा रहा है, जहां 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान सीमा पार होने पर अपरिवर्तनीय क्षति हो सकती है। अमेजन जैसे टिपिंग पॉइंट्स पार होने पर यह विस्फोट और भयावह हो जाएगा, जो 200-250 अरब टन कार्बन डाईऑक्साइड रिलीज कर सकता है, जो वैश्विक उत्सर्जन का 26 प्रतिशत के बराबर है।
यह मानव जाति के लिए अस्तित्वगत खतरा है, क्योंकि यह जीवन के हर पहलू को प्रभावित करेगा, जैसे स्वास्थ्य, भोजन, पानी, आवास और शांति। वैज्ञानिकों के अनुसार, 2025 में हम ‘डूम्सडे क्लॉक’ (मानव-निर्मित आपदाओं का संकेतक) के करीब हैं, जहां जलवायु संकट परमाणु युद्ध जितना खतरनाक है।
क्या है डूम्सडे क्लॉक
डूम्सडे क्लॉक एक प्रतीकात्मक घड़ी है, जो मानवता को वैश्विक आपदा, जैसे परमाणु युद्ध, जलवायु परिवर्तन या अन्य विनाशकारी घटनाओं, से कितनी निकटता पर दर्शाती है। डूम्सडे क्लॉक के खतरों के अंतर्गत सबसे पहले पहले चरम मौसम घटनाओं की चर्चा करते हैं। इसके चलते तूफान, बाढ़, सूखा और गर्मी की लहरें तेज हो रही हैं। 2024 में 1.5 डिग्री सेल्सियस सीमा पार हो चुकी है, जो हरिकेन और बाढ़ की तीव्रता बढ़ा रही है। इसके प्रभाव से दक्षिणी यूरोप और एशिया में 2025 की गर्मी की लहरों से हजारों मौतें और वैश्विक आपदाओं से 10 करोड़ लोग विस्थापित हुए हैं। इसके चलते समुद्र स्तर वृद्धि पर नजर डालें तो पाएंगे कि ग्लेशियर पिघलने से 2100 तक 1 मीटर तक समुद्र ऊंचा हो सकता है, लेकिन विस्फोट से यह और तेज होगा। इसके प्रभाव से तटीय शहर (जैसे मुंबई, न्यूयॉर्क) डूबने का खतरा है, इससे 10 करोड़ लोग प्रभावित होने के साथ, कृषि भूमि खराब होने का अनुमान है।
कार्बन स्रोत
2025 तक अमेजन का दक्षिण-पूर्वी हिस्सा (ब्राजील का मुख्य भाग) पूरी तरह नेट कार्बन स्रोत बन चुका है, जहां सूखा मौसम लंबा हो गया है। एक अध्ययन के अनुसार पिछले 40 वर्षों में यहां की वनभूमि अब कुल कार्बन फ्लक्स (अवशोषण माइनस उत्सर्जन) से अधिक कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जित कर रही है। समग्र अमेजन में सिंग की भूमिका घट रही है, 2001-2024 के बीच स्वदेशी क्षेत्रों में कार्बन अवशोषण फ्रांस के वार्षिक जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन के बराबर था, लेकिन 2025 में आगे और कटाई से यह संतुलन बिगड़ गया। इसका कारण वनों की कटाई है। इसके अलावा 2025 में ब्राजील के अमेजन में 1.1 मिलियन हेक्टेयर जला, जो 2024 से 70 प्रतिशत कम है, लेकिन फिर भी दक्षिणी क्षेत्रों में कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। जंगलों की आग अब फीडबैक लूप बना रही है, गर्मी से आग बढ़ती है, जो और गर्मी पैदा करती है।
ज़ूनोटिक रोग
जूनोटिक रोग वे बीमारियां हैं, जो जानवरों से इंसानों में फैलती हैं (या कभी-कभी उल्टा भी होता है)। ये विषाणु यानी वायरस, बैक्टीरिया, परजीवी या कवक के कारण होती हैं और अक्सर जंगली जानवरों (जैसे चमगादड़, कृंतक या कीट) से शुरू होकर इंसानों तक पहुंचती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, सभी मानव संक्रामक रोगों में से 60 प्रतिशत से अधिक जूनोटिक हैं, और ये महामारियों (जैसे कोविड-19, एबोला या सार्स) का प्रमुख कारण बनते हैं। अमेजन जैसे वर्षावनों में जैव विविधता अधिक होने से ज़ूनोटिक रोगों का खतरा स्वाभाविक रूप से ज्यादा है, लेकिन वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन और मानवीय हस्तक्षेप (जैसे खनन, कृषि विस्तार) से ये खतरे और गंभीर हो जाते हैं। जानवरों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है, जिससे संक्रामक जीव इंसानों के करीब पहुंचते हैं। एक हालिया अध्ययन के अनुसार, 2001-2019 के बीच अमेजन में आग, वेक्टर-जनित और ज़ूनोटिक रोगों से लगभग 3 करोड़ मामले सामने आए। स्वदेशी भूमियों पर जंगलों की रक्षा से इनमें से 27 रोगों (जैसे चागास, मलेरिया आदि) के फैलाव को 15 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।
आज अमेजन के जंगलों को बचाने के लिए ज़ीरो डिफॉरेस्टेशन, पुनर्वनीकरण और जैव-आधारित अर्थव्यवस्था की ज़रूरी है। ये अवधारणाएं एक-दूसरे को पूरक बनाती हैं, जीरो डिफॉरेस्टेशन रोकथाम है, पुनर्वनीकरण बहाली है और जैव-आधारित अर्थव्यवस्था टिकाऊ उपयोग प्रदान करती हैं। कॉप 30 जैसे मंचों पर इन्हें बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन वैश्विक फेफड़े कहलाने वाले अमेजन के जंगलों पर अभी खतरा मंडरा रहा है।
