जॉब का पहला दिन: डर, सीख और एक नई शुरुआत
उस दिन मैं थोड़ी सी डरी हुई थी, क्योंकि ये मेरी पहली जॉब थी और पहला ही दिन। सुबह ठीक 10 बजे मैं ऑफिस पहुंची। हाथ में एक छोटा सा बैग था, जिसमें नोटबुक, पेन और एक हल्की सी घबराई हुई मुस्कान छुपी हुई थी। बाहर से न्यूज चैनल का ऑफिस जितना शांत और सामान्य लगता है, अंदर कदम रखते ही उतनी ही तेज़ रफ्तार और हलचल महसूस होती है। जैसे ही मैं अंदर गई, सबसे पहला झटका लगा- चारों तरफ चमकते मॉनिटर्स, हर स्क्रीन पर अलग-अलग न्यूज चल रही थी। कोई स्क्रिप्ट लिख रहा था, कोई फोन पर बात कर रहा था, तो कोई ब्रेकिंग न्यूज की तैयारी में लगा था। हर कोई अपने काम में इतना डूबा हुआ था कि समय जैसे दौड़ रहा हो। थोड़ी ही देर में मैनेजर ने मुझे टीम लीडर और बाकी टीम से मिलवाया।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “पहले दिन बस देखो और समझो, असली काम कल से शुरू होगा।” उनकी बात सुनकर थोड़ी राहत भी मिली और उत्साह भी बढ़ गया। फिर मुझे एक डेस्क पर बैठा दिया गया, जहां एक सीनियर रिपोर्टर काम कर रहे थे। उन्होंने मुझे बड़े ही सहज तरीके से न्यूजरूम के बेसिक्स समझाने शुरू किए, कैसे स्टोरी आइडिया बनता है, कैसे फील्ड में जाकर रिपोर्टिंग की जाती है, और सबसे अहम, डेडलाइन का क्या मतलब होता है। उनके हर शब्द में अनुभव झलक रहा था और मैं हर बात ध्यान से सुन रही थी।
कुछ देर बाद मुझे पहला छोटा सा काम मिला- एक खबर की रिसर्च। समय सिर्फ 10 मिनट था। मैंने तुरंत गूगल पर सर्च करना शुरू किया, लेकिन सीनियर ने रोकते हुए कहा, “गूगल सब कुछ नहीं बताता, असली खबर जमीन से मिलती है। हमारे लोकल रिपोर्टर से बात करो।” तभी मुझे समझ आया कि यहां सिर्फ स्पीड ही नहीं, बल्कि सटीकता भी उतनी ही जरूरी है। दोपहर में थोड़ा ब्रेक मिला, लेकिन दिमाग अब भी उसी माहौल में उलझा हुआ था।
ब्रेक के बाद एडिटर-इन-चीफ आए और उन्होंने दिन की बड़ी खबरों पर चर्चा की। कौन-सी स्टोरी फोकस में रहेगी, कौन एंकर क्या करेगा, किस खबर के लिए ग्राफिक्स बनेंगे- सब कुछ बड़ी तेजी से तय हो रहा था। मैं बस चुपचाप सब देखती और सीखती रही, मन में एक सपना लिए कि एक दिन मैं भी अपनी पहली रिपोर्टिंग करूंगी। शाम को जब पहला दिन खत्म हुआ, तो शरीर थका हुआ था, लेकिन दिल बेहद खुश था। घर लौटते वक्त एक बात साफ समझ आ गई कि न्यूज चैनल में काम करना सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि एक जुनून है। यहां हर दिन नया होता है, हर खबर एक नई कहानी लेकर आती है, और सबसे बड़ी सीख यही है कि यहां समय किसी के लिए नहीं रुकता।-पूनम मौर्य
