संपादकीय: दिल का पुल 

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Published By Monis Khan
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धारचूला उपमंडल के छारछुम गांव में काली नदी पर प्रस्तावित मोटर पुल केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, भारत–नेपाल संबंधों के जमीनी विस्तार का प्रतीक है। यह पुल सीमांत क्षेत्रों में वर्षों से महसूस की जा रही कनेक्टिविटी की कमी दूर करेगा और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सामाजिक तथा आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती देगा। सीमावर्ती इलाकों में आधारभूत ढांचे का विकास हमेशा रणनीतिक और मानवीय दोनों दृष्टियों से अहम होता है और यह पुल इसी श्रेणी में आता है। 

दोनों देशों के बीच काली नदी लंबे समय से एक प्राकृतिक सीमा रही है, लेकिन यही नदी दोनों समाजों को जोड़ने वाली सांस्कृतिक धारा भी रही। धारचूला के छारछुम गांव में इस मोटर पुल बनने से सीमांत क्षेत्र में आवागमन आसान होगा। बनबसा के बाद यह उत्तराखंड–नेपाल सीमा पर दूसरा महत्वपूर्ण मोटर पुल होगा, जिससे स्थानीय व्यापार, आवाजाही और आपसी निर्भरता को नया आयाम मिलेगा। अभी तक इस क्षेत्र में आवाजाही पैदल पुलों या मौसमी साधनों पर निर्भर रही है, जो बारिश और आपदा के समय बाधित हो जाती है। व्यापारिक दृष्टि से देखें तो भारत–नेपाल संबंध पहले से ही प्रगाढ़ हैं। भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 

वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 12 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास है, जिसमें भारत का निर्यात कहीं अधिक और आयात अपेक्षाकृत कम है। यानी व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है। ऐसे में सीमांत क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल औपचारिक व्यापार बढ़ेगा, बल्कि अनौपचारिक और स्थानीय स्तर के लेन-देन को भी वैध और व्यवस्थित स्वरूप मिलेगा। इस पुल के बनने से कृषि उत्पाद, दैनिक उपभोग की वस्तुएं, निर्माण सामग्री, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों के व्यापार में वृद्धि की उम्मीद है। नेपाल से जड़ी-बूटियां, कृषि उपज और हस्तनिर्मित वस्तुएं भारत आ सकती हैं, जबकि भारत से खाद्यान्न, दवाइयां, मशीनरी और उपभोक्ता वस्तुओं का प्रवाह बढ़ेगा।

 इससे सीमांत गांवों की अर्थव्यवस्था को स्थायित्व मिलेगा और पलायन की समस्या पर भी कुछ हद तक अंकुश लगेगा। यह पुल केवल धारचूला ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद के अन्य पर्वतीय क्षेत्रों, जैसे- व्यास घाटी और आसपास के दूरस्थ गांवों के लिए भी लाभकारी होगा। नेपाल की ओर यह धारचूला और समीपवर्ती पहाड़ी इलाकों के लोगों के लिए जीवनरेखा साबित हो सकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच आसान होने से मानव विकास सूचकांकों पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। सीमांत इलाकों में पारिवारिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध सदियों पुराने हैं। 

यह पुल केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहकारी संघवाद का उदाहरण है। केंद्र की रणनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि तथा राज्य सरकार की स्थानीय जरूरतों की समझ दोनों के समन्वय से ही यह परियोजना संभव हो रही है। उम्मीद है कि यह मोटर पुल सीमांत विकास, द्विपक्षीय व्यापार और सामाजिक एकता का मजबूत आधार बनेगा। यह दिखाता है कि बुनियादी ढांचा जब सही दिशा में खड़ा होता है, तो वह दिलों की दूरी को भी पाट देता है।